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कृष्ण प्रश्नोत्तरी — 134 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित कृष्ण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 134 प्रश्न

दोष निवारण

घर की कलह दूर करने का मंत्र

परिवार में शांति और प्रेम स्थापित करने के लिए क्लेशनाशक मंत्र 'कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥' का प्रतिदिन पाठ करना सर्वोत्तम उपाय है।

पारिवारिक कलहशांतिकृष्ण
मंत्र साधना

संतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल मंत्र विधि

संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी को बाल गोपाल की प्रतिमा के समक्ष 'ॐ देवकीसुत गोविन्द...' मंत्र का तुलसी की माला से संकल्पित जप करना चाहिए।

संतानगोपाल मंत्रकृष्ण
मंत्र विधि

वैजयंती माला से जप करने से क्या लाभ मिलता है?

वैजयंती = कृष्ण/विष्णु को अत्यंत प्रिय (स्वयं धारण करते)। लाभ: विष्णु कृपा, लक्ष्मी प्रसन्नता, ग्रह शांति (शनि), आत्मविश्वास, विवाह बाधा निवारण। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108। शुक्रवार/सोमवार। तुलसी का शुभ विकल्प।

वैजयंतीमालाविष्णु
देव कथा

कृष्ण मोर पंख मुकुट क्यों पहनते?

कथा: मोर नाचे(बांसुरी)→पंख अर्पित→कृष्ण मुकुट धारण। पंख=ज्ञान नेत्र(Eye)। मोर=प्रेम(वर्षा नृत्य)। सोना नहीं=प्रकृति पंख=सादगी। प्रेम अर्पित=कृष्ण मुकुट पर।

कृष्णमोर पंखमुकुट
विष्णु अस्त्र शस्त्र

पांचजन्य शंख क्या है?

पांचजन्य विष्णु और कृष्ण का दिव्य शंख है। कृष्ण ने गुरु पुत्र को बचाने समुद्र में शंखासुर राक्षस का वध किया और उसके शरीर से बने शंख को पांचजन्य नाम दिया। महाभारत में इससे युद्ध घोषित किया।

पांचजन्य शंखशंखासुरकृष्ण
मंदिर ज्ञान

मंदिर में 56 भोग क्या होता है और कब लगता है?

7 दिन × 8 पहर = 56। जन्माष्टमी/अन्नकूट। जगन्नाथ = प्रतिदिन। भक्त/सूप/प्रलेह/फेणिका/सुधाकुंडलिका। सरल: माखन-मिश्री।

56 भोगछप्पनकृष्ण
देव कथा

कृष्ण ने सुदामा की गरीबी कैसे दूर की?

सुदामा=गरीब बालसखा, मुट्ठी चावल भेंट। कृष्ण ने खाए, बिना माँगे झोपड़ी→महल। 'माँगो मत, प्रेम दो=सब मिलेगा।' सच्ची मित्रता=धन नहीं देखती। मुट्ठी=करोड़ लौटे।

कृष्णसुदामामित्रता
कृष्ण भक्ति

गोपाल मंत्र का जप कृष्ण भक्ति के लिए कैसे करें?

गोपाल तापनी: 'क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा'। द्वादशाक्षर: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'। तुलसी माला, माखन-मिश्री, एकादशी/जन्माष्टमी। संतान गोपाल = संतान हेतु। कृष्ण = गो (ज्ञान) + पाल (रक्षक)।

गोपालकृष्णमंत्र
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने पंचजन्य शंख क्यों बजाया?

कृष्ण ने पंचजन्य शंख इसलिए बजाया कि द्वारका के लोग उनके आने का संकेत पाएं और उनका विरह-दुख शांत हो।

पंचजन्यकृष्णद्वारका वापसी
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह के प्राण त्यागने पर क्या हुआ?

भीष्म के प्राण त्यागने पर सब मौन हो गए, देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे, राजाओं ने प्रशंसा की और आकाश से फूल बरसे।

भीष्म प्राण त्यागकृष्णदेवता
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह को मोक्ष कैसे मिला?

भीष्म को मोक्ष कृष्ण-स्मरण से मिला; उन्होंने मन, वाणी और दृष्टि कृष्ण में लीन की और भेद-मोह छोड़कर कृष्ण को प्राप्त हुए।

भीष्म मोक्षकृष्णप्राण त्याग
श्रीमद्भागवत

भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?

भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

कृष्णपरमात्माभीष्म स्तुति
श्रीमद्भागवत

भीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग क्या है?

भीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग अर्जुन का मोह दूर करने और कृष्ण के पार्थसारथी रूप को दिखाने के लिए आता है।

भीष्म स्तुतिगीताअर्जुन
श्रीमद्भागवत

भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी क्यों याद किया?

भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी इसलिए याद किया क्योंकि कृष्ण ने अर्जुन के सारथी बनकर रथ चलाया, गीता सुनाई और भक्तवत्सल रूप दिखाया।

पार्थसारथीकृष्णअर्जुन
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय किसका ध्यान किया?

भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण का ध्यान किया और मन, वाणी तथा दृष्टि को उन्हीं में लगा दिया।

भीष्म ध्यानकृष्णप्राण त्याग
श्रीमद्भागवत

भीष्म स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

भीष्म स्तुति का भाव है कि मृत्यु के समय बुद्धि, मन और प्रेम श्रीकृष्ण में स्थिर हों, क्योंकि वही परमात्मा और अंतिम आश्रय हैं।

भीष्म स्तुति अर्थकृष्णपार्थसारथी
श्रीमद्भागवत

भीष्म स्तुति क्या है?

भीष्म स्तुति मृत्यु के समय श्रीकृष्ण को समर्पित प्रार्थना है, जिसमें भीष्म ने कृष्ण के सौंदर्य, युद्ध रूप और परमात्मा स्वरूप का ध्यान किया।

भीष्म स्तुतिकृष्णमहाभारत
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?

भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।

भीष्म और कृष्णकृष्णपार्थसारथी
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण क्यों छोड़े?

उत्तरायण वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण योगी चाहते हैं; उसी समय भीष्म ने मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।

भीष्म उत्तरायणप्राण त्यागयोगी
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?

भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।

भीष्म शरशय्याकुरुक्षेत्रयुधिष्ठिर
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह कौन थे?

भीष्म पितामह भरतवंशियों के गौरव, पांडवों के पितामह, धर्मज्ञ महापुरुष और श्रीकृष्ण के भक्त थे।

भीष्म पितामहशरशय्यापांडव
अघोर कुमार

अघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?

अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।

चार कुमारकृष्णकृष्णशिख
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने पांडवों को किन विपत्तियों से बचाया?

कुंती ने कहा कि कृष्ण ने पांडवों को विष, लाक्षागृह की आग, राक्षसों, द्यूतसभा, वनवास, युद्धों और अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया।

कृष्णपांडवकुंती
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।

कुंती स्तुति अर्थकृष्णविपदः सन्तु

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।