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यमलोक प्रश्नोत्तरी — 89 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यमलोक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 89 प्रश्न

लोक

यमराज की सभा में कौन-कौन उपस्थित रहते हैं?

यमराज की सभा में मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवता, अप्सराएँ और अग्निष्वात्त आदि पितृगण उपस्थित रहते हैं।

यमराज सभापितृगणगंधर्व
लोक

यमराज का दरबार डरावना है या दिव्य?

यमराज का दरबार मूलतः दिव्य और भव्य है, पर पापी आत्मा के लिए वह भय और दंड का स्थान बन जाता है।

यमराज दरबारयमलोकदिव्य सभा
लोक

यमराज की सभा कैसी है?

यमराज की सभा दिव्य, भव्य और विस्तृत है, जहाँ मुनि, सिद्ध, गंधर्व, देवता और पितृगण उपस्थित रहते हैं।

यमराज सभायमलोकगरुड़ पुराण
लोक

यमराज को धर्मराज क्यों कहा जाता है?

यमराज कर्मों का निष्पक्ष न्याय करते हैं और पाप-पुण्य का संतुलन स्थापित करते हैं, इसलिए उन्हें धर्मराज कहा जाता है।

धर्मराजयमराजन्याय
लोक

यमराज कौन हैं?

यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।

यमराजधर्मराजमृत्यु देवता
लोक

मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक क्यों जाती है?

आत्मा मृत्यु के बाद अपने कर्मों का न्याय और फल प्राप्त करने के लिए यमलोक जाती है।

मृत्यु के बादआत्मायमलोक
लोक

यमलोक गर्भोदक सागर के ऊपर क्यों बताया गया है?

यमलोक को पृथ्वी के नीचे और गर्भोदक सागर से थोड़ा ऊपर, त्रिलोकी और गर्भोदक सागर के मध्य स्थित बताया गया है।

यमलोकगर्भोदक सागरभागवत पुराण
लोक

यमलोक पितृलोक के क्षेत्र में क्यों माना गया है?

यमलोक पितृलोक की परिधि में स्थित है, जहाँ यमराज की न्याय-सभा और पितृगणों की उपस्थिति बताई गई है।

यमलोकपितृलोकभागवत पुराण
लोक

यमलोक और नरक में क्या संबंध है?

यमलोक कर्मों का न्याय-स्थान है; नरक वे दंड-स्थल हैं जहाँ पापी आत्माएँ यमराज के निर्णय के बाद यातना भोगती हैं।

यमलोकनरकभागवत पुराण
लोक

यमलोक को पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में कैसे समझाया गया है?

पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में यमलोक कर्म-फल, न्याय और यातना-देह द्वारा कर्म-शोधन का निश्चित पारलौकिक आयाम है।

यमलोकपौराणिक ब्रह्मांड विज्ञानकर्म फल
लोक

यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

यमलोकगरुड़ पुराणकर्म न्याय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमपुरी क्या है?

यमपुरी धर्मराज यम का नगर है, जहाँ आत्मा के कर्मों का निर्णय होता है।

यमपुरीधर्मराज पुरीयमलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी यमलोक से पहले क्यों आती है?

वैतरणी यमराज के नगर से ठीक पहले आने वाला सबसे भयंकर अवरोध है।

वैतरणी नदीयमलोकसीमांत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को यमलोक पहुँचने में कितने दिन लगते हैं?

आत्मा को यमलोक पहुँचने में 348 दिन लगते हैं।

यमलोक348 दिनयमयात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्युलोक से यमलोक की दूरी कितनी है?

मृत्युलोक से यमलोक की दूरी 86,000 योजन बताई गई है।

मृत्युलोकयमलोकदूरी
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग क्या होता है?

यममार्ग पृथ्वी से यमलोक तक की 86,000 योजन लंबी कठोर यात्रा का मार्ग है।

यममार्गयमलोकमृत्युलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सपिण्डीकरण के बाद आत्मा कहाँ प्रवेश करती है?

सपिण्डीकरण के बाद आत्मा पितृलोक की परिधि में प्रवेश करने या यमलोक यात्रा के लिए तैयार होती है।

सपिण्डीकरणआत्मापितृलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सपिण्डीकरण के बाद प्रेतत्व कैसे समाप्त होता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत पितरों में मिल जाता है, इसलिए उसका प्रेतत्व समाप्त हो जाता है।

सपिण्डीकरणप्रेतत्व समाप्तपितर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी नदी यमलोक से पहले आने वाली रक्त, मवाद और अस्थियों से भरी भयंकर नदी है।

वैतरणी नदीयममार्गयमलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत यमलोक जाती है क्या?

नहीं, आत्मा पहले घर और परिजनों के पास रहती है; तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू होती है।

मृत्यु के बादयमलोकआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण, यमदूतों के पाश और 348 दिन की यमयात्रा के रूप में बताई गई है।

गरुड़ पुराणआत्मा की यात्राप्रेत खण्ड
जीवन एवं मृत्यु

पापी को यमलोक में क्यों ले जाया जाता है?

पापी को यमलोक इसलिए ले जाया जाता है — कर्म-न्याय के लिए, पाप-पुण्य का लेखा दिखाने के लिए, अपने कर्मों का साक्षात्कार कराने के लिए और न्यायपूर्ण दंड-निर्धारण के लिए।

पापीयमलोकन्याय
जीवन एवं मृत्यु

नरक क्या है?

नरक = पाप का फल भोगने का स्थान। पाताल लोक में। 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि है' — गरुड़ पुराण का वचन। शाश्वत नहीं — पाप-फल समाप्त होने पर पुनर्जन्म मिलता है। 84 लाख नरकों का उल्लेख है।

नरकपरिभाषायमलोक
जीवन एवं मृत्यु

दान का प्रभाव यमलोक में कैसे पड़ता है?

दान का यमलोक में प्रभाव — यममार्ग पर पाथेय (भोजन-शक्ति), यमदूतों का सौम्य व्यवहार, वैतरणी पर गाय की पूंछ से पार होना, यमराज के दरबार में अनुकूल स्थिति और पाप-पुण्य के निर्णय में लाभ।

दानयमलोकप्रभाव

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।