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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?

राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।

बालकाण्डजनकपुरनगर वर्णन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?

विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।

बालकाण्डराम लक्ष्मणजनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर में राजा जनक ने विश्वामित्रजी का कैसे स्वागत किया?

जनक ने ब्राह्मणों के साथ आकर दण्डवत किया, आसन दिया, चरण पखारे, भोजन करवाया। रामजी को देखकर मुग्ध हो गये — 'जनु चकोर पूरन ससि लोभा' — जैसे चकोर पूर्ण चन्द्रमा देखकर लुभा जाये।

बालकाण्डजनकविश्वामित्र स्वागत
रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर किसकी राजधानी थी?

जनकपुर राजा जनक (विदेह/मिथिलेश) की राजधानी थी। जनक विदेह वंश के प्रतापी, विरक्त राजा थे। सीताजी उन्हीं की पुत्री थीं — इसीलिये 'जानकी' और 'वैदेही' कहलाती हैं।

बालकाण्डजनकपुरराजा जनक
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर कहाँ गये?

जनकपुर (मिथिला/विदेहनगर) — जहाँ राजा जनक का धनुष-यज्ञ होने वाला था। मार्ग में गंगा-स्नान किया, विश्वामित्रजी ने गंगावतरण की कथा सुनाई, फिर जनकपुर पहुँचे।

बालकाण्डजनकपुरविश्वामित्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'अहिल्या' उद्धार का प्रसंग बालकाण्ड में किस प्रकरण के बाद आता है?

ताड़का वध और यज्ञ रक्षा के बाद, जनकपुर जाते मार्ग में। एक आश्रम में शिला देखकर रामजी ने पूछा, मुनि ने कथा सुनाई, चरण-स्पर्श से उद्धार हुआ। इसके बाद गंगा तट से जनकपुर गये।

बालकाण्डअहल्या उद्धारकथा क्रम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

यज्ञ रक्षा के बाद विश्वामित्रजी ने क्या प्रसन्नता व्यक्त की?

विश्वामित्रजी को 'महानिधि' प्राप्त हुई। उन्होंने रामजी को 'ब्रह्मण्यदेव' (ब्राह्मणों का भगवान) जाना — 'मोहि निति पिता तजेउ भगवाना' — मेरे लिये भगवान ने पिता भी छोड़ दिया। फिर जनकपुर की ओर चले।

बालकाण्डयज्ञ रक्षाविश्वामित्र प्रसन्न
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी को कौन-कौन से दिव्यास्त्र दिये?

विश्वामित्रजी ने 'विद्यानिधि' (विद्याओं के भण्डार) रामजी को अनेक विद्याएँ दीं — जिनसे भूख-प्यास न लगे, अतुलित बल-तेज प्रकट हो। मानस में विशिष्ट नाम नहीं। वाल्मीकि रामायण में बला-अतिबला आदि का विस्तार है।

बालकाण्डदिव्यास्त्रविश्वामित्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी के यज्ञ में कौन से राक्षस बाधा डाल रहे थे?

विश्वामित्रजी ने कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही।' मार्ग में ताड़का का वध हुआ। वाल्मीकि रामायण के अनुसार मारीच और सुबाहु मुख्य राक्षस थे। मानस में संक्षिप्त वर्णन है।

बालकाण्डराक्षसयज्ञ बाधा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी के चरण-स्पर्श से अहल्या का क्या हुआ?

शिला से तपोमूर्ति अहल्या प्रकट हुईं — शरीर पुलकित, प्रेम से अधीर, नेत्रों से आँसुओं की धारा। चरणों में लिपटीं, स्तुति की — 'मेरा मन-भौंरा आपके चरण-रज का प्रेम-रस सदा पान करे।' आनन्दपूर्वक पतिलोक गयीं।

बालकाण्डअहल्या प्रकटचरण स्पर्श
रामचरितमानस — बालकाण्ड

अहल्या का उद्धार कैसे हुआ?

श्रीरामजी के चरण-स्पर्श से — 'परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही' — पवित्र चरणों का स्पर्श पाते ही शिला से तपोमूर्ति अहल्या प्रकट हुईं। स्तुति करके आनन्दपूर्वक पतिलोक गयीं।

बालकाण्डअहल्या उद्धारचरण स्पर्श
रामचरितमानस — बालकाण्ड

गौतम ऋषि ने अहल्या को क्या शाप दिया?

शिला (पत्थर) बनने का शाप दिया — 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।' इन्द्र के छल के कारण शाप मिला। शाप-मुक्ति — भगवान राम के चरण-स्पर्श से। मानस में कारण विस्तार से नहीं बताया।

बालकाण्डगौतम शापअहल्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

अहल्या कौन थीं — किसकी पत्नी?

अहल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं। गौतम ऋषि के शाप से शिला (पत्थर) बनी थीं। 'गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर॥' — रामजी के चरण-स्पर्श की प्रतीक्षा में।

बालकाण्डअहल्यागौतम ऋषि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी ने ताड़का का वध कैसे किया?

एक ही बाण से — 'एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥' — एक बाण से प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया। भगवान शत्रु को मारकर भी कल्याण करते हैं।

बालकाण्डताड़का वधएक बाण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

ताड़का कौन थी?

ताड़का एक भयानक राक्षसी थी — सुकेतु यक्ष की कन्या (वाल्मीकि रामायण अनुसार)। विश्वामित्रजी के यज्ञ क्षेत्र के मार्ग में रहती थी। रामजी ने एक ही बाण से उसके प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया।

बालकाण्डताड़कायक्ष कन्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी के साथ कौन-कौन गये?

श्रीरामजी और लक्ष्मणजी — दोनों भाई विश्वामित्रजी के साथ गये। 'पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन' — पुरुषों में सिंह दोनों वीर भाई मुनि का भय हरने प्रसन्न होकर चले।

बालकाण्डराम लक्ष्मणविश्वामित्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

वसिष्ठजी ने राजा दशरथ को कैसे समझाया?

वसिष्ठजी ने बहुत प्रकार से समझाया — राजा का सन्देह नष्ट हुआ। दशरथ ने दोनों पुत्रों को हृदय से लगाकर शिक्षा दी और विश्वामित्रजी को सौंपा — 'सौंपे भूप रिषिहि सुत बहुबिधि देइ असीस।'

बालकाण्डवसिष्ठदशरथ समझाना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?

अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।

बालकाण्डदशरथ वचनचौपाई अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा दशरथ ने श्रीरामजी को देने में क्या आपत्ति जताई?

दशरथ का हृदय काँपा — 'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — सब पुत्र प्राण समान हैं, राम को देना सम्भव नहीं। कहाँ भयानक राक्षस और कहाँ मेरा सुकुमार किशोर पुत्र!

बालकाण्डदशरथपुत्र मोह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने राजा दशरथ से क्या माँगा?

अनुज (लक्ष्मण) समेत श्रीरघुनाथजी (रामजी) को यज्ञ रक्षा के लिये माँगा — 'अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा॥' — राक्षसों के वध से सनाथ हो जाऊँगा।

बालकाण्डविश्वामित्रराम लक्ष्मण माँगा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी राजा दशरथ के पास क्यों आये?

राक्षसों के समूह विश्वामित्रजी के यज्ञ में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने दशरथ से कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही' — राम-लक्ष्मण को दो, राक्षसों के वध से मैं सनाथ हो जाऊँगा।

बालकाण्डविश्वामित्रदशरथ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'राम' नाम का अर्थ वसिष्ठजी ने क्या बताया?

'राम' = जो सबके हृदय में रमण करते हैं, आनन्दस्वरूप। 'र' 'आ' 'म' — अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा का बीज। ब्रह्मा, विष्णु, शिव स्वरूप। वेदों का प्राण, निर्गुण, अनुपम, गुणनिधान।

बालकाण्डराम नाम अर्थवसिष्ठ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'ठुमकि चलत रामचन्द्र बाजत पैंजनियाँ' — यह किस लीला का वर्णन है?

श्रीरामजी की बाललीला — जब वे ठुमक-ठुमककर चलते और माता कौशल्या बुलाने जातीं तो भागते। 'निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरैं जननी हठि धावा' — जिनका अन्त वेद और शिव भी नहीं पाते, उन्हें माता हठ से पकड़ने दौड़तीं।

बालकाण्डठुमकि चलतपैंजनियाँ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी की बाललीला में कौन-कौन सी लीलाएँ प्रमुख हैं?

प्रमुख बाललीलाएँ — (1) कौशल्या की गोद में खेलना, (2) ठुमककर चलना-पैंजनी बजना, (3) दही-भात मुँह लपटाकर भागना, (4) धूल में लोटना, (5) ईष्टदेव का नैवेद्य खाना। सबको परम आनन्द दिया।

बालकाण्डबाललीलाराम

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