विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में श्रीरामजी की बाललीलाओं का अत्यन्त सुन्दर वर्णन है:
- 1माता कौशल्या की गोद में खेलना — 'व्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद। सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद॥'
- 1ठुमककर चलना, पैंजनियाँ बजना — माता कभी उन्हें गोद में लेतीं, कभी उत्तम पालने में लिटाकर झुलातीं।
- 1भोजन करते समय चंचलता — 'भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ। भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ॥' — भोजन करते हैं पर चित्त चंचल है, अवसर पाकर दही-भात मुँह में लपटाये किलकारी मारते हुए भाग चलते हैं।
- 1धूल में लोटना — शरीरमें धूल लपेटे हुए आते हैं और राजा हँसकर उन्हें गोद में बैठा लेते।
- 1ईष्टदेव का नैवेद्य खाना — माता ने पूजा की और भोजन बनाने गयीं, लौटकर देखा तो बालक नैवेद्य खा रहे। माता भयभीत हुईं।
इन सब लीलाओं में भगवान ने माता-पिता और अयोध्यावासियों को परम आनन्द दिया।





