विस्तृत उत्तर
विश्वामित्रजी ने राजा दशरथ से श्रीरामजी और लक्ष्मणजी को अपने यज्ञ की रक्षा के लिये माँगा।
चौपाई — 'अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा॥'
अर्थ — छोटे भाईसहित श्रीरघुनाथजीको मुझे दो। राक्षसोंके मारे जानेपर मैं सनाथ हो जाऊँगा।
विश्वामित्रजी ने स्पष्ट कहा कि राक्षसों का समूह उन्हें बहुत सताता है, इसीलिये वे राजा के पास याचना लेकर आये हैं। उन्हें विश्वास था कि श्रीरामजी में राक्षसों का वध करने की शक्ति है।





