विस्तृत उत्तर
अहल्या उद्धार का प्रसंग बालकाण्ड में ताड़का वध और यज्ञ रक्षा के बाद आता है। विश्वामित्रजी ने यज्ञ पूर्ण होने के बाद श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर जनकपुर (मिथिला) की ओर प्रस्थान किया।
मार्ग में एक आश्रम दिखा जहाँ कोई पशु-पक्षी नहीं था, केवल एक शिला पड़ी थी। रामजी ने पूछा, तब मुनि ने विस्तारपूर्वक अहल्या की कथा सुनाई।
चौपाई — 'आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं। पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी॥'
अर्थ — मार्गमें एक आश्रम दिखाई पड़ा। वहाँ पशु-पक्षी, कोई भी जीव-जन्तु नहीं था। पत्थरकी शिलाको देखकर प्रभुने पूछा, तब मुनिने विस्तारपूर्वक सब कथा कही।
इसके बाद रामजी ने चरण-स्पर्श से अहल्या का उद्धार किया और फिर गंगाजी के तट पर पहुँचे, जहाँ से जनकपुर गये।





