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सम्मानजनक

श्री राम सम्बन्धित प्रश्न(27)

श्री राम पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 27 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।  राम को श्रीराम, रामचंद्र, रघुनाथ के रूप में भी जाना जाता है।

राम क्यों (14)राम कैसे (26)राम कौन (10)श्री राम (27)
श्री राम पर पूछे गए प्रश्न
  1. श्रीराम ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा में वायव्यास्त्र का प्रयोग कैसे किया?
  2. श्रीराम को वायव्यास्त्र कैसे मिला?
  3. रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना का पौराणिक महत्व क्या है?
  4. रामायण में आग्नेयास्त्र का प्रयोग कब हुआ
  5. किम्पुरुष वर्ष में हनुमान जी क्या करते हैं?
दिव्यास्त्र

श्रीराम ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा में वायव्यास्त्र का प्रयोग कैसे किया?

विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा डालने आए सुबाहु और अन्य राक्षसों का विनाश करने के लिए श्रीराम ने वायव्यास्त्र का प्रयोग किया जिससे यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ।

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दिव्यास्त्र

श्रीराम को वायव्यास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को वायव्यास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र ने दिया था जब वे यज्ञ रक्षा के लिए उन्हें वन ले गए थे।

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शिव मंदिर

रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना का पौराणिक महत्व क्या है?

श्रीराम ने रावण वध (ब्रह्महत्या) प्रायश्चित हेतु शिवलिंग स्थापित किया (रामायण)। दो शिवलिंग: रामलिंगम् (सीता द्वारा बालू से) + विश्वलिंगम् (हनुमान कैलाश से)। शिव-राम एकता = शैव-वैष्णव एकता। चार धाम (दक्षिण)। 22 कुंडों में स्नान विशेष।

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दिव्यास्त्र

रामायण में आग्नेयास्त्र का प्रयोग कब हुआ

रामायण में बालकाण्ड में विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को आग्नेयास्त्र की दीक्षा दी। लंका युद्ध में भी विभिन्न अग्नि-आधारित अस्त्रों का प्रयोग हुआ। यह राम सहित अनेक योद्धाओं के पास था।

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लोक

किम्पुरुष वर्ष में हनुमान जी क्या करते हैं?

किम्पुरुष वर्ष (हिमालय और हेमकूट के बीच) में हनुमान जी अन्य किम्पुरुषों के साथ भगवान श्रीराम की निरंतर आराधना और कीर्तन करते हैं।

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दिव्यास्त्र

भौमास्त्र के प्रतिकार के लिए श्रीराम ने क्या सोचा?

भौमास्त्र के प्रतिकार के लिए श्रीराम को ब्रह्मशिरा जैसे और भी विनाशकारी महाअस्त्र का प्रयोग करने पर विचार करना पड़ा, जो इसकी उच्च श्रेणी का प्रमाण है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

जय श्री राम और राम राम में क्या अंतर

राम राम एक प्राचीन लोक-अभिवादन है जिसमें राम-नाम के माध्यम से परस्पर सम्मान होता है। जय श्री राम एक जयघोष है जो भगवान राम की विजय और महिमा का उद्घोष है — यह धार्मिक अवसरों और सत्संग में बोला जाता है।

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दिव्यास्त्र

श्रीराम को आग्नेयास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को आग्नेयास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र से मिला था जो उन्हें राक्षसों से यज्ञ की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए दिया गया था।

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दिव्यास्त्र

सुबाहु राक्षस का वध कैसे हुआ?

विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डालने आए राक्षस सुबाहु का वध श्रीराम ने आग्नेयास्त्र (अनलास्त्र) से किया था।

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दिव्यास्त्र

श्रीराम ने समुद्र के संदर्भ में आग्नेयास्त्र का प्रयोग क्यों नहीं किया?

समुद्र देव के क्षमा मांगकर सहायता का वचन देने पर श्रीराम ने आग्नेयास्त्र नहीं चलाया। यह उनकी विवेकशीलता और अनावश्यक विनाश से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

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पूजा विधि एवं कर्मकांड

राम जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा है

राम के सर्वप्रभावी मंत्र — सर्वोच्च 'राम' (तारक मंत्र), नित्य जप 'श्री राम जय राम जय जय राम', बीज मंत्र 'रां रामाय नमः', और मोक्ष के लिए 'राम रामेति रामेति... सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।'

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लोक

रावण को भगवान विष्णु ने क्यों मारा?

श्रीराम ने रावण को अधर्म के नाश और जय के उद्धार के लिए मारा।

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लोक

रावण को मुक्ति कैसे मिली?

रावण को श्रीराम के हाथों वध होकर श्राप से मुक्ति मिली।

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अवतारवाद

श्री राम अवतार का क्या महत्व है?

श्री राम = त्रेता युग में रावण वध और धर्म स्थापना के लिए अवतार। प्रतीक: आदर्श, मर्यादा पुरुषोत्तम और सामाजिक नियमों से पूर्णतः बंधे हुए सभ्य मनुष्य।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विनम्रता की शिक्षा — श्रीरामजी के चरित्र से?

सर्वशक्तिमान पर सबसे विनम्र — गुरु को प्रणाम, परशुराम से मृदु वाणी, माता की आज्ञा मानी। शिक्षा — सच्ची शक्ति विनम्रता में।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?

'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी ने शिव धनुष कैसे उठाया?

अत्यन्त सहजता से — जबकि दस हज़ार राजा हिला नहीं सके। सहज भाव से उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई, खींचा — बीच से टूट गया। 'संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु' — धनुष = जहाज, राम बाहुबल = समुद्र।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में किन-किन स्थानों का भ्रमण किया?

नगर भ्रमण (गलियाँ-बाज़ार), राजा का सुन्दर बाग (पुष्पवाटिका), बाग का मणि-सीढ़ियों वाला सरोवर, लता-मण्डप। 'बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत' — बाग-सरोवर देखकर भाई सहित हर्षित हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

किस सखी ने सीताजी को श्रीराम-लक्ष्मण के बारे में बताया?

एक चतुर सयानी सखी ने — 'धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी' — हाथ पकड़कर कहा कि गिरिजा पूजन बाद में, पहले राजकुमार को देख लो। सखी के वचन सीताजी को अत्यन्त प्रिय लगे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जनकपुर की स्त्रियों ने श्रीराम-लक्ष्मण को देखकर क्या-क्या कहा?

स्त्रियों ने कहा — (1) यह वर जानकी के योग्य है, (2) राजा देख ले तो प्रतिज्ञा छोड़कर विवाह करा दे, (3) विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही मिलेगा, (4) पर शंकर धनुष कठोर है और ये कोमल किशोर — चिन्ता भी जताई।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?

राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?

विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर कहाँ गये?

जनकपुर (मिथिला/विदेहनगर) — जहाँ राजा जनक का धनुष-यज्ञ होने वाला था। मार्ग में गंगा-स्नान किया, विश्वामित्रजी ने गंगावतरण की कथा सुनाई, फिर जनकपुर पहुँचे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी ने ताड़का का वध कैसे किया?

एक ही बाण से — 'एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥' — एक बाण से प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया। भगवान शत्रु को मारकर भी कल्याण करते हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी की बाललीला में कौन-कौन सी लीलाएँ प्रमुख हैं?

प्रमुख बाललीलाएँ — (1) कौशल्या की गोद में खेलना, (2) ठुमककर चलना-पैंजनी बजना, (3) दही-भात मुँह लपटाकर भागना, (4) धूल में लोटना, (5) ईष्टदेव का नैवेद्य खाना। सबको परम आनन्द दिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने श्रीराम की परीक्षा लेने के लिये किसका रूप धारण किया?

सतीजी ने माता सीताजी का रूप धारण किया। दोहा — 'पुनि पुनि हृदयँ बिचारु करि धरि सीता कर रूप।' सतीजी ने सोचा कि यदि ये सचमुच परब्रह्म हैं तो सीता रूप पहचान लेंगे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में सती और शिवजी कहाँ जा रहे थे जब उन्होंने श्रीराम को देखा?

शिवजी अगस्त्य मुनि के आश्रम से रामकथा सुनकर सतीजी के साथ कैलास लौट रहे थे। मार्ग में उन्हें भगवान श्रीराम दण्डकवन में वनवासी वेष में सीताजी की खोज करते दिखे।

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