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विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने श्रीराम अवतार लेकर रावण का वध धर्म की स्थापना के लिए किया। रावण ने काम, अहंकार और अधर्म के वशीभूत होकर माता सीता का अपहरण किया था, जिससे उसका विनाश निश्चित हो गया। जय-विजय की कथा के अनुसार रावण वास्तव में जय का श्रापित जन्म था, जिसे भगवान के हाथों मृत्यु पाकर श्राप से आगे बढ़ना था। इसलिए श्रीराम का रावण-वध बाहरी रूप से अधर्म का नाश था, और भीतर से अपने ही पार्षद का उद्धार भी था।
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