विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड के अनुसार शिवजी अगस्त्यजी (कुम्भज मुनि) के आश्रम से रामकथा सुनकर कुछ दिन वहाँ रहने के बाद मुनिसे विदा माँगकर दक्षकुमारी सतीजीके साथ अपने घर कैलास को चले।
चौपाई — 'कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा। मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी॥'
अर्थ — श्रीरघुनाथजीके गुणोंकी कथाएँ कहते-सुनते कुछ दिनोंतक शिवजी वहाँ रहे। फिर मुनिसे विदा माँगकर शिवजी दक्षकुमारी सतीजीके साथ घर (कैलास) को चले।
उसी मार्ग में उन्हें भगवान श्रीरामचन्द्रजी दण्डकवन में वनवासी वेष में सीताजी की खोज करते दिखे — 'तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा। पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी॥'
अर्थ — उन्हीं दिनों पृथ्वीका भार उतारनेके लिये श्रीहरिने रघुवंशमें अवतार लिया था। वे अविनाशी भगवान् उस समय पिताके वचनसे राज्यका त्याग करके दण्डकवनमें विचर रहे थे।





