विस्तृत उत्तर
श्रीराम-लक्ष्मण ने गुरु विश्वामित्रजी की आज्ञा से जनकपुर में अनेक स्थानों का भ्रमण किया:
- 1नगर भ्रमण — गलियों, बाज़ारों में फूल लेने गये
- 2राजा का सुन्दर बाग (पुष्पवाटिका) — जहाँ वसन्त ऋतु छायी थी
- 3बाग का सरोवर — मणियों की सीढ़ियाँ, कमल, पक्षी
- 4पुष्पवाटिका का लता-मण्डप — जहाँ सीताजी से प्रथम दर्शन हुआ
दोहा — 'बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत। परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत॥'
अर्थ — बाग और सरोवरको देखकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी भाई लक्ष्मणसहित हर्षित हुए। यह बाग वास्तवमें परम रमणीय है, जो जगतको सुख देनेवाले श्रीरामचन्द्रजीको भी सुख दे रहा है।
इसके बाद दोनों भाइयों ने मालियों से पूछकर प्रसन्न मन से फूल चुने और फिर सीताजी का दर्शन हुआ।



