जीवन एवं मृत्युअसिपत्रवन नरक क्या है?असिपत्रवन = 'तलवार जैसे पत्तों वाला वन'। 2000 योजन विस्तार। पेड़ों पर पत्तों की जगह तीखी तलवारें। दावाग्नि और भयावह पक्षियों से व्याप्त। गरुड़ पुराण अध्याय 2 व 4 में वर्णित।#असिपत्रवन नरक#परिभाषा#तलवार पत्ते
जीवन एवं मृत्युकालसूत्र नरक में क्या कष्ट होता है?कालसूत्र में — आग पर नंगे पाँव चलाया जाता है, काल-सूत्र से बाँधकर भागना असंभव, कोई छाया-विश्राम नहीं। 'समय बर्बाद किया, इसलिए समय की यातना।'#कालसूत्र नरक#कष्ट#आग
जीवन एवं मृत्युकालसूत्र नरक क्या है?कालसूत्र = 'काल के धागे का नरक'। 21 प्रमुख नरकों में से एक। 'समय बर्बाद करने वालों को आग पर चलाया जाता है।' कालसूत्र से बाँधकर यातना — भागना असंभव।#कालसूत्र नरक#परिभाषा#समय
जीवन एवं मृत्युअंध तामिस्र नरक में क्या कष्ट मिलता है?अंधतामिस्र में — असंख्य जौंकें रक्त चूसती हैं, परम अंधकार में तड़पाया जाता है, लोहे की छड़ों की अदृश्य पिटाई और भयावह पक्षियों का आक्रमण। रक्त चूसकर पुनः भरने का चक्र।#अंधतामिस्र नरक#कष्ट#जौंक
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक में किसे भेजा जाता है?तामिस्र नरक में — चोर (प्रमुख), धोखेबाज, दूसरों की संपत्ति हड़पने वाले और लोभ से निर्दोष जीव-हत्यारे भेजे जाते हैं।#तामिस्र नरक#पात्र#चोरी
जीवन एवं मृत्युअंध तामिस्र नरक क्या है?अंधतामिस्र = 'परम अंधकार'। जौंकें रक्त चूसती हैं। माता-पिता-मित्र की हत्या करने वाले और परिवार से विश्वासघात करने वाले यहाँ जाते हैं। तामिस्र से भी अधिक भयंकर।#अंधतामिस्र नरक#परिभाषा#परम अंधकार
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक क्या है?तामिस्र = 'घना अंधकार'। 21 प्रमुख नरकों में प्रथम। अंधकारमय गुफा, लोहे की पट्टियों-मुग्दरों से पिटाई। चोरों और धोखेबाजों के लिए यह नरक है।#तामिस्र नरक#परिभाषा#अंधकार
जीवन एवं मृत्युमहा रौरव नरक में क्या होता है?महारौरव में — रौरव से अधिक विषैले रुरु सर्पों का निरंतर दंश, तीव्र अग्नि-यातना, रौरव से अधिक लंबा दंड-काल। 'निर्दोष की हत्या करने वालों के लिए' — रौरव से भी कठोर दंड।#महारौरव नरक#यातना#रुरु सर्प
जीवन एवं मृत्युमहा रौरव नरक क्या है?महारौरव = रौरव से भी अधिक भयंकर नरक। 21 प्रमुख नरकों में सम्मिलित। 'निर्दोष प्राणियों की हत्या करने वालों के लिए।' रुरु सर्पों की अधिक संख्या और तीव्र विष।#महारौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक में क्या कष्ट मिलता है?रौरव नरक में — विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना और रुरु सर्पों का दंश। मृत्यु नहीं आती — यातना तब तक जारी।#रौरव नरक#कष्ट#यातना
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक में किसे भेजा जाता है?रौरव नरक में — झूठी गवाही देने वाले, लालची-ईर्ष्यालु-स्वार्थी, झूठ बोलने वाले, निर्दोष को कष्ट देने वाले और पत्नी को प्रताड़ित करने वाले भेजे जाते हैं।#रौरव नरक#पात्र#झूठी गवाही
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक क्या है?रौरव = 'रुरु सर्प' या 'चीत्कार' से बना नाम। 21 प्रमुख नरकों में से एक। विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के जलते तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना — यह रौरव नरक का स्वरूप है।#रौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को पुनः जीवित किया जाता है?हाँ। नरक में जीव बार-बार जीवित किया जाता है — 'पिटाई तब तक जब तक दंड अवधि समाप्त नहीं।' बेहोश होने पर यमदूत जगाते हैं। पाप-फल पूरा होने पर शुद्ध होकर पुनर्जन्म।#नरक#पुनः जीवित#यातना
जीवन एवं मृत्युकुंभिपाक नरक में क्या कष्ट होता है?कुंभिपाक में — खौलते तेल में उबाला जाना, जलती रेत में फेंका जाना, मृत्यु नहीं — बार-बार यातना। 'आत्मा पकाई जाती है पर नष्ट नहीं होती।' पाप-फल समाप्त होने तक जारी।#कुंभिपाक#कष्ट#खौलता तेल
जीवन एवं मृत्युकुंभिपाक नरक में किसे डाला जाता है?कुंभिपाक में — ब्राह्मण-हत्यारे, हिंसा को जीवनशैली बनाने वाले, दूसरों की संपत्ति हड़पने वाले और निर्दोष जीवों की बड़े पैमाने पर हत्या करने वाले भेजे जाते हैं।#कुंभिपाक#पात्र#ब्रह्महत्या
जीवन एवं मृत्युकुंभिपाक नरक क्या है?कुंभीपाक = 'कड़ाही में पकाने का नरक'। खौलते तेल या जलती रेत में आत्मा को पकाया जाता है। ब्रह्महत्यारे, हिंसक और संपत्ति हड़पने वाले यहाँ जाते हैं। गरुड़ पुराण के सर्वाधिक भयंकर नरकों में।#कुंभिपाक#नरक#परिभाषा
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को काटा जाता है?हाँ। नरक में — जलते तीरों से बींधना, संडासियों से माँस नोचना, पक्षियों की चोंच, लोहे की कीलें (लोहशंकु), बीच से चीरना (निर्भक्षण), काँटेदार पेड़ (शल्मली)।#नरक#काटना#यातना
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को आग में डाला जाता है?हाँ। रौरव (अग्निकुंड), कुंभीपाक (खौलता तेल), सूलप्रोत (ज्वालाओं में), तप्तलोहमय (तपता लोहा), तप्तकुंभ (खौलता बर्तन), कालसूत्र (आग पर चलना) — अनेक नरकों में अग्नि-यातना।#नरक#आग#कुंभिपाक
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को अंधकार में रखा जाता है?हाँ। तामिस्र नरक (अंधकारमय गुफा), अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार, अधर्म के लिए), अंधतोमिस्र नरक (चुगली पर अंधेरे में तड़पाना)। पाप ज्ञान नष्ट करता है — इसीलिए अंधकार।#नरक#अंधकार#तामिस्र
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को विश्राम मिलता है?नरक में विश्राम नहीं — 'केवल तड़प ही उसका भाग्य।' बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। 'नरक में दुःख की अधिकता है।' दानी पुण्यात्मा को यममार्ग पर कुछ राहत।#नरक#विश्राम#यातना
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती?नरक में मृत्यु नहीं — 'आत्मा जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।' पाप-फल पूरा भोगने तक यातना जारी। बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। पाप-फल समाप्त होने पर अगले जन्म।#नरक#मृत्यु नहीं#यातना
जीवन एवं मृत्युछल करने वाले को क्या दंड मिलता है?छल करने वाले को — तमिश्रम नरक (बार-बार पिटाई), गर्म रेत-अंगारे पर चलना, शाल्मी-वृक्ष, गुरु को धोखे पर महापातक नरक। पुनर्जन्म में उल्लू योनि।#छल#दंड#तमिश्रम
जीवन एवं मृत्युहिंसा करने वाले को क्या दंड मिलता है?हिंसा करने वाले को — कुंभीपाक नरक (खौलता तेल), क्रीमिक नरक (कीट), सूलप्रोत नरक (लोहे के शूल), तामिस्र नरक (पिटाई)। पुनर्जन्म में हिंसा का शिकार।#हिंसा#दंड#कुंभिपाक
जीवन एवं मृत्युईर्ष्या करने वाले को क्या दंड मिलता है?ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (अग्नि-यातना), निंदा पर संधांश नरक (नाखूनों से खरोंचना), दूसरों के कलह में प्रसन्नता पर नरक। ईर्ष्यालु का जीवन दुखी — पुनर्जन्म में अभाव।#ईर्ष्या#दंड#रौरव
जीवन एवं मृत्युक्रोध करने वाले को क्या दंड मिलता है?क्रोधी को — क्रोध में हिंसा पर लोहशंकु-क्रीमिक नरक, स्त्री-पीड़न पर रौरव नरक (कष्ट कई गुना), अन्याय पर सुघोर्म नरक (खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।#क्रोध#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युलोभ करने वाले को क्या दंड मिलता है?लोभी को — रौरव नरक (अग्निकुंड), लोभ से जीव-हत्या पर तामिस्र नरक (पिटाई), संपत्ति हड़पने पर तमिश्रम नरक। 'अकेला ही अंधकारपूर्ण नरक में जाता है।' पुनर्जन्म में दरिद्रता।#लोभ#दंड#रौरव
जीवन एवं मृत्युअधर्म करने वाले को क्या दंड मिलता है?अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार), विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा)। मृत्यु में यमदूत पाश बाँधकर घसीटते हैं। इस जीवन में दुर्भाग्य।#अधर्म#दंड#अंधतामिस्त्र
जीवन एवं मृत्युपाप करके पछतावा न करने वाले को क्या दंड मिलता है?पाप करके पछतावा न करने वाले को — एक नरक से दूसरे नरक, दंड में कोई राहत नहीं। 'एक दुःख के बाद दूसरा दुःख।' पश्चाताप बिना मृत्युकाल का अवसर भी गँवाता है।#पछतावा#पाप#दंड
जीवन एवं मृत्युदान न करने वाले को क्या दंड मिलता है?दान न करने वाले को — यमदूत का उलाहना, यममार्ग पर भूख-प्यास, वैतरणी की गंदगी, भोजन न बाँटने पर कीड़ों वाला नरक और पुनर्जन्म में दरिद्रता।#दान न करना#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युजल की चोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?जल की चोरी — यममार्ग पर भयंकर प्यास, वैतरणी में रक्त-मवाद से प्यास बुझाने को विवश। 'जल का दान क्यों नहीं दिया' — यमदूत का उलाहना। जल-स्रोत नाश पर वैतरणी।#जल चोरी#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युभोजन की चोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?भोजन की चोरी — पयू नरक (मल में), हिंसा से कमाया अन्न खाने पर खरभोजन नरक (काँटे)। यमदूत का उलाहना — 'अन्न का दान क्यों नहीं दिया?' इस जीवन में भी रोग-दुर्भाग्य।#भोजन चोरी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युपवित्र वस्तुओं का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?पवित्र वस्तुओं का अपमान — ब्राह्मण-भोजन अपमान पर लालभोजन नरक (मांस), शुद्धता का अनादर पर मल में डुबोना, मंदिर-संपत्ति हरण पर प्रेत योनि, वन-नाश पर वैतरणी।#पवित्र वस्तु#अपमान#दंड
जीवन एवं मृत्युधर्म का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?धर्म का अपमान — ईश्वर में अविश्वास पर प्रेत योनि, देव-पूजा न करने पर नरक, व्रत-तीर्थ-परित्याग पर शाल्मी-वृक्ष, धर्म का ढोंग करने पर वैतरणी, अधर्म से परिवार-पोषण पर अंधतामिस्त्र।#धर्म अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युमाता-पिता का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?माता-पिता का अपमान — इस जीवन में दुर्भाग्य-रोग। पुनर्जन्म में गर्भ में ही मृत्यु। 'माता-पिता देवताओं के समान हैं — उनका अपमान जीवन में बाधाओं का कारण है।'#माता-पिता अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युस्त्री का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?स्त्री का अपमान — सूकरमुख नरक (सूअर नोचते हैं)। स्त्री-हत्या पर चांडाल योनि। शोषण पर भयंकर रोग। परस्त्री-गमन पर प्रपतन नरक (पहाड़ से गिराना)। गर्भपात पर वैतरणी।#स्त्री अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युब्राह्मण को कष्ट देने वाले को क्या दंड मिलता है?ब्राह्मण को कष्ट देने पर — हत्या पर वैतरणी, संपत्ति-हरण पर वैतरणी, ब्राह्मण-पीड़न पर अंगारों में दंड। ब्राह्मण-कलह को प्रोत्साहित करने वाले भी नरकगामी होते हैं।#ब्राह्मण पीड़न#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युगुरु का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?गुरु का अपमान — नरक का द्वार। कुतर्क करने वाला शिष्य ब्रह्मराक्षस योनि में, गुरु-धन हरण पर वैतरणी, गुरुपत्नी-गमन पर कुष्ठ-रोग और महापातक नरक में कीड़ों द्वारा भक्षण।#गुरु अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युधोखा देने वाले को क्या दंड मिलता है?धोखा देने वाले को — सुघोर्म नरक (खौलता तेल), गुरु को धोखे पर महापातक नरक (कीड़े)। पुनर्जन्म में उल्लू योनि। इस जीवन में भी कोई स्थायी सुख नहीं।#धोखा#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युझूठ बोलने वाले को क्या दंड मिलता है?झूठ बोलने वाले को — रौरव नरक (अग्निकुंड), झूठी गवाही वाले को शल्मली नरक (काँटेदार पेड़) और निर्भक्षण नरक (बीच से चीरना)। पुनर्जन्म में अंधापन।#झूठ#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युचोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?चोरी करने वाले को — सामान्य चोर को पयू नरक (मल में), छल से धन कमाने वाले को शाल्मी-वृक्ष, धरोहर हड़पने वाले को वैतरणी की यातना। पुनर्जन्म में दरिद्रता और निरंतर अभाव।#चोरी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युहत्या करने वाले को क्या दंड मिलता है?हत्यारे को — ब्रह्महत्यारे को वैतरणी, निर्दोष-हत्यारे को लोहशंकु नरक (कीलें), गोहत्यारे को रक्त-गड्ढे में काँटे, जीव-हत्यारे को क्रीमिक नरक (कीट)। पुनर्जन्म में स्वयं उसी हिंसा का शिकार।#हत्या#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युमहापापी के लिए कौन-सा नरक बताया गया है?महापापियों के लिए — रौरव (अग्निकुंड), महापातक (कीड़े खाते हैं), लोहशंकु (लोहे की कीलें), शल्मली (कांटेदार पेड़), सूकरमुख (सूअर नोचते हैं), कुंभीपाक (खौलते तेल में) और वैतरणी नरक।#महापापी#नरक#रौरव
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को मुक्ति मिल सकती है?हाँ, किंतु कठिन। वृषोत्सर्ग, भूमिदान, गया-श्राद्ध और मृत्युकाल में भगवन्नाम से महापापी भी मुक्त हो सकता है। 'ब्रह्महत्यारा भी वृषोत्सर्ग से पापमुक्त होता है' — गरुड़ पुराण का वचन।#महापापी#मुक्ति#प्रायश्चित
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को पुनर्जन्म मिलता है?हाँ, परंतु अधम योनि में। 'छल-कपट वाला उल्लू, झूठी गवाही देने वाला अंधा, स्त्री-हत्यारा चांडाल योनि में।' माता-पिता को कष्ट देने वाले का गर्भ में ही मृत्यु। नरक-शुद्धि के बाद पुनर्जन्म मिलता है।#महापापी#पुनर्जन्म#अधम योनि
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को बार-बार दंड मिलता है?हाँ। नरक में मृत्यु नहीं आती — बार-बार यातना देकर पुनः जीवित किया जाता है। एक नरक के बाद दूसरा नरक। पुनर्जन्म में भी पाप का प्रभाव जारी रहता है।#महापापी#बार-बार दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को लंबा दंड मिलता है?हाँ। महापापी को एक नरक से दूसरे नरक, फिर अधम योनि — यह श्रृंखला लंबी चलती है। 'करोड़ों कल्पों में भी बिना भोगे कर्म नष्ट नहीं होता।' महापाप के लिए दंड-काल सर्वाधिक लंबा है।#महापापी#लंबा दंड#कर्मफल
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को अधिक कष्ट मिलता है?हाँ। महापापी को — साधारण पापी से कहीं अधिक कष्ट। भयंकर नरक (रौरव-महारौरव), वैतरणी में अकेले पार करने की पीड़ा, यमदूतों का अत्यंत कठोर व्यवहार और शाल्मली वृक्ष की अतिरिक्त यातना।#महापापी#कष्ट#यातना
जीवन एवं मृत्युक्या महापापी को नरक मिलता है?हाँ, अवश्य। महापापी को वैतरणी की यातना के बाद घोर नरक मिलता है। 'एक नरक से दूसरे नरक तक भटकना' — महापापी की नियति है। 'बिना भोगे कर्म नष्ट नहीं होता।'#महापापी#नरक#कर्मफल
जीवन एवं मृत्युमहापापी को क्या दंड मिलता है?महापापी को — दक्षिण द्वार से यमलोक प्रवेश, वैतरणी में घोर यातना, रौरव-महारौरव जैसे भयंकर नरक और एक नरक से दूसरे नरक में भटकना। इस जीवन में भी कष्ट और मृत्यु के बाद अत्यंत लंबा दंड-काल।#महापापी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युमहापापी किसे कहा जाता है?महापापी = पंच महापापों का कर्ता (ब्रह्महत्यारा, सुरापान, स्वर्ण-चोरी, गुरुपत्नीगमन, महापातकी-संसर्ग)। गरुड़ पुराण में — 'मित्रद्रोही, कृतघ्न, ब्रह्महत्यारा — ये महापापी हैं।'#महापापी#परिभाषा#पंच महापाप