मंदिर ज्ञानमंदिर में 56 भोग क्या होता है और कब लगता है?7 दिन × 8 पहर = 56। जन्माष्टमी/अन्नकूट। जगन्नाथ = प्रतिदिन। भक्त/सूप/प्रलेह/फेणिका/सुधाकुंडलिका। सरल: माखन-मिश्री।#56 भोग#छप्पन#कृष्ण
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग क्या है?भीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग अर्जुन का मोह दूर करने और कृष्ण के पार्थसारथी रूप को दिखाने के लिए आता है।#भीष्म स्तुति#गीता#अर्जुन
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?भीष्म स्तुति का भाव है कि मृत्यु के समय बुद्धि, मन और प्रेम श्रीकृष्ण में स्थिर हों, क्योंकि वही परमात्मा और अंतिम आश्रय हैं।#भीष्म स्तुति अर्थ#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति क्या है?भीष्म स्तुति मृत्यु के समय श्रीकृष्ण को समर्पित प्रार्थना है, जिसमें भीष्म ने कृष्ण के सौंदर्य, युद्ध रूप और परमात्मा स्वरूप का ध्यान किया।#भीष्म स्तुति#कृष्ण#महाभारत
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।#भीष्म और कृष्ण#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।#भीष्म शरशय्या#कुरुक्षेत्र#युधिष्ठिर
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह कौन थे?भीष्म पितामह भरतवंशियों के गौरव, पांडवों के पितामह, धर्मज्ञ महापुरुष और श्रीकृष्ण के भक्त थे।#भीष्म पितामह#शरशय्या#पांडव
अघोर कुमारअघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
श्रीमद्भागवतकुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।#कुंती स्तुति अर्थ#कृष्ण#विपदः सन्तु
श्रीमद्भागवतकुंती स्तुति क्या है?कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।#कुंती स्तुति#कृष्ण#भक्ति
श्रीमद्भागवतपांडव वंश को बचाने की कथा क्या है?पांडव वंश को कृष्ण ने बचाया; उन्होंने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ की रक्षा की।#पांडव वंश#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतअश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने पांडव वंश मिटाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा कर दी।#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतपरीक्षित की जन्म कथा क्या है?परीक्षित की पूरी जन्म-घटना नहीं, बल्कि जन्म से पहले गर्भ में उनकी रक्षा की कथा आती है।#परीक्षित जन्म कथा#उत्तरा गर्भ#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवतपरीक्षित कौन थे?परीक्षित उत्तरा के गर्भ में वह बालक थे जिनकी रक्षा कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से की, ताकि पांडव वंश बना रहे।#परीक्षित#उत्तरा#कृष्ण
श्रीमद्भागवतअर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा क्या है?अश्वत्थामा ने भय में ब्रह्मास्त्र चलाया; कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से उसका निवारण किया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।#अर्जुन#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवतभक्ति योग वाला ज्ञान क्या है?भगवान की प्रसन्नता के लिए किए गए कर्मों से जो ज्ञान मिलता है, वह भक्ति योग से संयुक्त ज्ञान बताया गया है।#भक्ति योग#ज्ञान#भगवान की प्रसन्नता
श्रीमद्भागवतभगवान विष्णु के अवतारों की सूची क्या है?पुरुष, कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम-कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का वर्णन है।#विष्णु अवतार#अवतार सूची#भागवत पुराण
श्रीमद्भागवतवेदों का अंतिम लक्ष्य क्या है?वेद, यज्ञ, योग, कर्म, ज्ञान, तप, धर्म और सभी गतियों का अंतिम लक्ष्य वासुदेव श्रीकृष्ण बताया गया है।#वेद#वासुदेव#कृष्ण
श्रीमद्भागवतसच्ची भक्ति क्या है?सच्ची भक्ति वह है जो भगवान कृष्ण में हो, बिना किसी कामना के हो और निरंतर बनी रहे।#भक्ति#सच्ची भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवतकृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।#धर्म#कृष्ण#धाम
श्रीमद्भागवतकृष्ण के बाद भक्तों का सहारा क्या है?उद्धव की चिंता के उत्तर में भगवान भक्तों के अवलंबन के लिये अपना तेज श्रीमद्भागवत में स्थापित करते हैं।#कृष्ण#उद्धव#भक्त
श्रीमद्भागवतभागवत दान करने का फल क्या है?सोने के सिंहासन पर रखकर भागवत को वैष्णव को दान करने से कृष्ण के साथ सायुज्य प्राप्ति कही गई है।#भागवत दान#वैष्णव#सायुज्य
लोकमहातल में कालिय नाग कौन है?कालिय नाग महातल का प्रमुख नाग है, जिसे भगवान कृष्ण ने कालिय-मर्दन के बाद महातल लौटने का आदेश दिया।#कालिय नाग#महातल#कृष्ण
व्रत एवं त्योहारगोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्या है?अन्नकूट का अर्थ है 'अन्न का पर्वत।' गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन भूखे रहने के बाद ब्रजवासियों ने कृष्ण को 7 दिन × 8 पहर = 56 प्रकार के व्यंजन खिलाए — यही छप्पन भोग की परंपरा है। इसे अन्नकूट कहते हैं।#गोवर्धन पूजा#अन्नकूट#56 भोग
व्रत एवं त्योहारनरक चतुर्दशी की कथा क्या है?नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और 16 हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी की खुशी में दीप जलाए गए और यह पर्व मनाया जाने लगा।#नरक चतुर्दशी#नरकासुर#कृष्ण
हिंदू दर्शनभागवत पुराण का मुख्य संदेश क्या हैभागवत पुराण का मुख्य संदेश: अनन्य भक्ति = मोक्ष का सरलतम मार्ग। नवधा भक्ति (7.5.23), कृष्ण लीला (10वां स्कंध), प्रह्लाद की भक्ति शक्ति, अजामिल की नाम-मुक्ति। सार: किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवन्नाम = मुक्ति। 12 स्कंध, 18,000 श्लोक।#भागवत पुराण#कृष्ण#भक्ति
पर्वअन्नकूट उत्सव में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि क्या हैगोवर्धन विधि: गाय गोबर से लेटे पुरुष (गिरिराज) बनाएँ → नाभि पर कटोरा (दूध/दही) → फूल-तुलसी सजाएँ → पूजा → 56 भोग (छप्पन) अर्पण → 7 परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने इन्द्र के बजाय गोवर्धन पूजा कराई।#अन्नकूट#गोवर्धन#गोबर
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कंस वध की लीला का आध्यात्मिक संदेश क्या है?कंस वध: कंस=अहंकार/भय, कृष्ण=सत्य। गीता 4.7-8 (अवतार)। अत्याचार अंत निश्चित। प्रेम>भय। आंतरिक कंस (लोभ-मोह)=विवेक से नष्ट।#कंस वध#जन्माष्टमी#कृष्ण
त्योहार पूजाहोली पर रंग खेलने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?रंग अर्थ: कृष्ण-गोपी लीला, समानता (सब एक=अद्वैत), जीवन रंग (अनुभव स्वीकार), बुराई बाद अच्छाई उत्सव, वसंत-प्रकृति एकत्व, क्षमा+नवीनता ('बुरा न मानो')। प्राकृतिक रंग (टेसू/हल्दी) प्रयोग।#होली#रंग#आध्यात्मिक
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर दही हांडी की परंपरा का पौराणिक आधार क्या है?दही हांडी आधार: भागवत दशम स्कन्ध — बालकृष्ण+ग्वाल=गोपियों का माखन चुराना। ऊँची मटकी=गोपी रक्षा, मानव पिरामिड=ग्वाल, शीर्ष=कृष्ण (गोविन्दा)। पुनराभिनय। महाराष्ट्र=भव्य। 'गोविन्दा आला रे!'#दही हांडी#जन्माष्टमी#कृष्ण
पर्वअन्नकूट पूजा की विधि क्या हैअन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।#अन्नकूट#छप्पन भोग#गोवर्धन
भक्तिभक्ति में सख्य भाव क्या है?ईश्वर=मित्र। अर्जुन-कृष्ण (गीता), सुदामा (पोहा→महल), गोपबाल। 'दोस्त से सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत।' 5 भाव: शांत→दास्य→**सख्य**→वात्सल्य→माधुर्य।#सख्य#भाव#क्या
स्तोत्र लाभअच्युतम केशवम पढ़ने से क्या होता है?कृष्ण भक्ति मधुर गीत। अनेक विष्णु नाम(अच्युत/केशव/राम/नारायण/दामोदर)=अनेक पुण्य। शांति, आनंद, नकारात्मकता दूर। किसी भी समय।#अच्युतम केशवम#कृष्ण#भक्ति