विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वर्णित नरकों में 'अवीचि' (कहीं 'अविची' या 'अवीची' भी लिखा है) को अत्यंत कठोर नरक माना गया है। इसका नाम 'अवीचि' है अर्थात् जहाँ तरंगें नहीं हैं — कोई उतार-चढ़ाव नहीं, बस निरंतर एकसमान यातना।
गरुड़ पुराण के अनुसार अवीचि नरक में वे पापी जाते हैं जो झूठ बोलते हैं, झूठी कसम खाते हैं और झूठी गवाही देते हैं। इनमें भी झूठी गवाही देने वाले — अर्थात् जिन्होंने अपने स्वार्थ या रिश्वत के लिए किसी निर्दोष को झूठे आरोप में फँसाया — उन्हें सर्वाधिक कठोर दंड मिलता है।
इस नरक में दंड का प्रकार यह है कि पापी को एक ऊँचे पहाड़ से नीचे धकेला जाता है — वह गिरकर चकनाचूर हो जाता है, फिर यमदूत उसे पुनः खड़ा करते हैं और फिर गिराते हैं। यह क्रम बार-बार होता है। एक अन्य वर्णन में कहा गया है कि यहाँ पापी को जलते हुए पर्वत से नीचे गिराया जाता है।
कुछ स्रोतों में अवीचि नरक को उन लोगों के लिए भी बताया गया है जो धर्मद्रोही हैं अर्थात् जिन्होंने धर्म और सत्य दोनों को जानते हुए भी उनका उल्लंघन किया।
झूठ को गरुड़ पुराण में इतना गंभीर पाप माना गया है क्योंकि झूठ से समाज का न्याय-तंत्र टूटता है, निर्दोष पीड़ित होते हैं और पापी बच निकलते हैं — इस प्रकार एक झूठ अनगिनत अन्य पापों की जड़ बन जाता है।





