विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में स्त्रियों और बच्चों के संग्रहित धन को छीनना एक अत्यंत गंभीर पाप माना गया है। गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में स्पष्ट वर्णन है — 'जो व्यक्ति स्त्रियों और बच्चों का संग्रहीत धन छीन लेता है, वह प्रेत योनि में अवश्य जाता है और उसे अनेकानेक नारकीय कष्ट भोगना पड़ता है।'
स्त्रियों का 'स्त्रीधन' शास्त्र में विशेष रूप से संरक्षित माना गया है — विवाह में मिला धन, पिता-माता का दिया धन, पति का दिया धन — यह स्त्री की अपनी संपत्ति है। इसे छीनना एक प्रकार का ब्राह्मण-धन-हरण के समान पाप है।
गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में 'स्त्रीद्रव्यहारी' और 'बालद्रव्यहारी' को वैतरणी नदी में गिरने वाले पापियों की सूची में स्पष्ट रूप से रखा गया है — अर्थात् ये लोग वैतरणी नदी की यातना भी भोगते हैं।
इसके अलावा इन पापियों को प्रेत-योनि में दीर्घकाल तक भटकना पड़ता है। प्रेत योनि में भूख-प्यास से व्याकुल होकर परिजनों के आस-पास भटकते हैं लेकिन उनसे भोजन ग्रहण नहीं कर सकते।
शास्त्र में इसीलिए स्त्रीधन की रक्षा करना गृहस्थ का प्रमुख कर्तव्य बताया गया है। जो पति या परिजन स्त्री के धन पर अनुचित अधिकार जमाते हैं, वे इस भयंकर दंड के भागी होते हैं।





