विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वर्णित 28 प्रमुख नरकों में 'पर्यावर्तन' नरक उन लोगों के लिए है जो अपने यहाँ आए अतिथियों और याचकों को तुच्छ दृष्टि से देखते हैं, उनका तिरस्कार करते हैं और उन्हें भोजन, जल आदि से वंचित करते हैं। इसके अलावा जो लोग घर आए मेहमान की आँखों में आँखें डालकर निर्लज्जता से उन्हें लौटा देते हैं, उन्हें भी इस नरक में स्थान मिलता है।
पर्यावर्तन नरक में पापी जीवात्मा को विशालकाय गिद्ध और चीलें अपनी तीखी चोंच से नोचते हैं। ये पक्षी बड़े आकार के और क्रूर होते हैं — उनकी चोंच वज्र के समान कठोर होती है। पापी प्राणी का शरीर बार-बार बनता है और बार-बार नोचा जाता है, जिससे यातना अनन्त काल तक चलती रहती है।
इस नरक का नाम 'पर्यावर्तन' इसलिए है क्योंकि पापी को यहाँ बार-बार घुमाया-पलटाया जाता है और हर ओर से गिद्ध और चील उसे नोचते रहते हैं।
गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में यम-मार्ग के वर्णन में भी बताया गया है कि यममार्ग में स्थित असिपत्रवन नामक भीषण स्थान कौओं, उल्लुओं, गीधों और डाँसों से व्याप्त है — वहाँ भी पापी जीव को ये पक्षी क्षत-विक्षत करते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार जिस व्यक्ति ने गायों और ब्राह्मणों के लिए प्रयास नहीं किया, उन्हें अतिथि-देवो-भव की भावना से नहीं देखा और जो दूसरों को सताने में आनंद लेता रहा — उसे भी इस नरक की पीड़ा भोगनी पड़ती है।



