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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

मृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत यमराज की आज्ञा से आयु पूर्ण होने पर आते हैं।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत यमराज की आज्ञा से आयु पूर्ण होने पर आते हैं। पापी को मृत्यु से लगभग एक पहर पहले उनकी उपस्थिति का भयावह आभास होता है। पुण्यात्मा के लिए विष्णुदूत दिव्य विमान से आते हैं।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यमदूतों के आगमन का बहुत विशद वर्णन है। शास्त्र के अनुसार यमदूत तभी आते हैं जब किसी जीव की आयु पूर्ण होती है और यमराज की आज्ञा होती है। इनके आगमन की कोई पूर्व सूचना सामान्यतः नहीं होती, परंतु मृत्यु से लगभग एक पहर (तीन घंटे) पहले मरणासन्न व्यक्ति को उनकी उपस्थिति का आभास होने लगता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत दो की संख्या में आते हैं। उनका प्रयोजन है — यमराज की आज्ञा से जीवात्मा को शरीर से निकालकर यमलोक ले जाना। यदि व्यक्ति पुण्यात्मा है, तो यमदूतों के स्थान पर विष्णुदूत या देवदूत दिव्य विमान लेकर आते हैं और आत्मा को सहर्ष ले जाते हैं।

पापी और दुराचारी व्यक्ति को मृत्यु से पहले यमदूतों की उपस्थिति अत्यंत भयावह रूप में अनुभव होती है। वह उन्हें देखकर भय से काँप उठता है, मल-मूत्र त्याग देता है।

इसके विपरीत जो भक्त ईश्वर की शरण में रहते हैं — जैसे अजामिल का प्रसंग विष्णु पुराण में है — उनके पास विष्णुदूत पहले पहुँच जाते हैं और यमदूत उन्हें ले नहीं जा पाते।

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