विस्तृत उत्तर
जब कोई भी राजा धनुष नहीं उठा सका तो राजा जनक ने निराश होकर कहा कि पृथ्वी वीरविहीन हो गयी — अब सीताजी का विवाह कैसे होगा?
बालकाण्ड में जनक की निराशा का वर्णन है — उन्होंने सभा में कहा कि इतने राजा आये पर कोई धनुष नहीं तोड़ सका। अब तो शिवजी के धनुष का ही आसरा है।
यह सुनकर कुछ अभिमानी राजा क्रोधित हुए — 'बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी' — दूसरे राजा जो अविवेकसे अन्धे और अभिमानी थे, यह सुनकर बहुत हँसे। और कुछ ने कहा — धनुष तोड़नेपर भी विवाह कठिन है।
जनक के इन वचनों से लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया।



