विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में कहा गया है कि शिवजी ने सतीजी का मानसिक त्याग करने के बाद कैलास पहुँचकर अपनी प्रतिज्ञा याद करके बड़ के पेड़ के नीचे पद्मासन लगाकर बैठ गये और अखण्ड अपार समाधि लगा ली।
चौपाई — 'तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बटतर करि कमलासन। संकर सहज सरूपु सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा॥'
इसका अर्थ — वहाँ (कैलास पर) फिर शिवजी अपनी प्रतिज्ञाको याद करके बड़के पेड़के नीचे पद्मासन लगाकर बैठ गये। शिवजीने अपना स्वाभाविक रूप सँभाला। उनकी अखण्ड और अपार समाधि लग गयी।
रामचरितमानस में समाधि की सटीक अवधि (वर्षों में) का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन 'अखण्ड अपार' शब्दों से यह ध्वनित होता है कि यह बहुत लम्बी समाधि थी। सतीजी कैलास पर रहती थीं और उनका एक-एक दिन युग के समान बीतता था — 'मरमु न कोऊ जान कछु जुग सम दिवस सिराहिं।'





