विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध की विधि का विस्तृत वर्णन है।
तर्पण — जल, दूध और तिल मिलाकर दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों का आह्वान कर तर्पण अर्पित किया जाता है। तांबे, चांदी या पीतल के पात्र में तर्पण होता है।
पिंडदान — जौ, तिल और जल से बने पिंड पितरों को अर्पित किए जाते हैं। गरुड़ पुराण के तेरहवें अध्याय में कहा गया है — 'एक वर्ष पूर्ण हो जाने पर श्राद्ध में हमेशा तीन पिंड दान करना चाहिए।'
ब्राह्मण भोजन — ब्राह्मणों को सुस्वादु भोजन कराया जाता है। भोजन से पहले पाँच जगह अंश निकाले जाते हैं — गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटियों के लिए।
दान-दक्षिणा — भोजन के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा दी जाती है।
मंत्रोच्चार — पितृ गायत्री मंत्र और अन्य पितृ मंत्रों का पाठ होता है।
संकल्प — नाम, गोत्र और उद्देश्य सहित संकल्प लिया जाता है।
गरुड़ पुराण में श्राद्ध में मौन, प्रसन्न मन और श्रद्धा को अनिवार्य बताया गया है।





