विस्तृत उत्तर
वृत्रासुर एक विशालकाय और भयानक असुर था जिसका जन्म त्वष्टा प्रजापति के महायज्ञ की अग्नि से हुआ था। त्वष्टा ने यह यज्ञ इंद्र से प्रतिशोध लेने के लिए किया था क्योंकि इंद्र ने उनके पुत्र विश्वरूप का वध किया था। वृत्र ने जल्द ही अपनी अपार शक्ति से देवों को पराजित कर दिया, इंद्र को उनके सिंहासन से हटा दिया और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उसका सबसे भयानक कृत्य था संसार के समस्त जल को निगल लेना, जिससे पूरे ब्रह्मांड में सूखा पड़ गया और जीवन समाप्त होने के कगार पर आ गया।
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