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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने रथ का पहिया क्यों उठाया?

कृष्ण ने रथ का पहिया भीष्म की प्रतिज्ञा को सत्य करने और अपनी भक्तवत्सलता प्रकट करने के लिए उठाया।

कृष्ण रथ का पहियाभीष्मअर्जुन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने भीष्म के लिए प्रतिज्ञा क्यों तोड़ी?

कृष्ण ने भीष्म की प्रतिज्ञा को सत्य और ऊँचा करने के लिए अपनी शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा तोड़ी।

कृष्ण प्रतिज्ञाभीष्ममहाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवत

भीष्म को कृष्ण का कौन सा रूप दिखा?

भीष्म को प्रसन्न मुख, अरुण नेत्र, पीतांबर और चतुर्भुज रूप में कृष्ण दिखे; स्तुति में उन्होंने पार्थसारथी युद्ध रूप भी याद किया।

भीष्मकृष्ण रूपचतुर्भुज
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय किसका ध्यान किया?

भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण का ध्यान किया और मन, वाणी तथा दृष्टि को उन्हीं में लगा दिया।

भीष्म ध्यानकृष्णप्राण त्याग
श्रीमद्भागवत

भीष्म स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

भीष्म स्तुति का भाव है कि मृत्यु के समय बुद्धि, मन और प्रेम श्रीकृष्ण में स्थिर हों, क्योंकि वही परमात्मा और अंतिम आश्रय हैं।

भीष्म स्तुति अर्थकृष्णपार्थसारथी
श्रीमद्भागवत

भीष्म स्तुति क्या है?

भीष्म स्तुति मृत्यु के समय श्रीकृष्ण को समर्पित प्रार्थना है, जिसमें भीष्म ने कृष्ण के सौंदर्य, युद्ध रूप और परमात्मा स्वरूप का ध्यान किया।

भीष्म स्तुतिकृष्णमहाभारत
श्रीमद्भागवत

भीष्म को मृत्यु के समय कृष्ण दर्शन क्यों मिले?

भीष्म को मृत्यु के समय कृष्ण दर्शन इसलिए मिले क्योंकि कृष्ण अपने अनन्य प्रेमी भक्तों पर कृपा करते हैं।

भीष्मकृष्ण दर्शनभक्ति
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?

भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।

भीष्म और कृष्णकृष्णपार्थसारथी
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण क्यों छोड़े?

उत्तरायण वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण योगी चाहते हैं; उसी समय भीष्म ने मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।

भीष्म उत्तरायणप्राण त्यागयोगी
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह की मृत्यु कैसे हुई?

भीष्म पितामह ने उत्तरायण में वाणी रोककर मन कृष्ण में लगाया, कृष्ण की स्तुति की और उनके प्राण कृष्ण में लीन हो गए।

भीष्म मृत्युउत्तरायणकृष्ण ध्यान
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?

भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।

भीष्म शरशय्याकुरुक्षेत्रयुधिष्ठिर
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह कौन थे?

भीष्म पितामह भरतवंशियों के गौरव, पांडवों के पितामह, धर्मज्ञ महापुरुष और श्रीकृष्ण के भक्त थे।

भीष्म पितामहशरशय्यापांडव
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने हिंसा के प्रायश्चित पर क्या कहा?

युधिष्ठिर ने कहा कि जिन स्त्रियों के पति और भाई-बंधु मारे गए, उनके प्रति हुए अपराध को गृहस्थ यज्ञों से शुद्ध करना संभव नहीं।

युधिष्ठिरहिंसाप्रायश्चित
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर को महाभारत युद्ध का पाप क्यों लगा?

युधिष्ठिर को लगा कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक स्वजनों, गुरुओं और सेनाओं का वध कराया; इसलिए शास्त्र-वचन भी उन्हें संतोष नहीं दे पाया।

युधिष्ठिरयुद्ध पापधर्मयुद्ध
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर युद्ध के बाद दुखी क्यों थे?

युधिष्ठिर अपने भाई-बंधुओं और स्वजनों के मारे जाने से दुखी थे; उन्हें लगता था कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ मरवा दीं।

युधिष्ठिरमहाभारत युद्धशोक
श्रीमद्भागवत

कुंती ने कृष्ण से मोह छुड़ाने की प्रार्थना क्यों की?

कुंती ने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मजबूत ममता को काटने और अपनी बुद्धि को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना की।

कुंतीमोहकृष्ण भक्ति
श्रीमद्भागवत

कृष्ण दर्शन से जन्म-मृत्यु कैसे मिटती है?

कुंती के अनुसार विपत्ति में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण के चरणकमल का दर्शन जन्म-मृत्यु के प्रवाह को रोक देता है।

कृष्ण दर्शनजन्म मृत्युकुंती
श्रीमद्भागवत

कृष्ण लीला सुनने का फल क्या है?

कृष्ण लीला को सुनने, गाने, कीर्तन करने और याद करने वाले भक्त शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन पाते हैं, जो जन्म-मृत्यु का प्रवाह रोक देता है।

कृष्ण लीलाश्रवणकीर्तन
श्रीमद्भागवत

कृष्ण अवतार का उद्देश्य क्या है?

कुंती स्तुति में कृष्ण अवतार के कई कारण बताए गए हैं: भक्तों की कीर्ति, देवकी-वसुदेव का वर, दैत्यों का नाश, पृथ्वी का भार हटाना और सुनने-स्मरण योग्य लीला।

कृष्ण अवतारकुंती स्तुतिदैत्य विनाश
श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने पांडवों को किन विपत्तियों से बचाया?

कुंती ने कहा कि कृष्ण ने पांडवों को विष, लाक्षागृह की आग, राक्षसों, द्यूतसभा, वनवास, युद्धों और अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया।

कृष्णपांडवकुंती
श्रीमद्भागवत

विपदः सन्तु नः शश्वत् का अर्थ क्या है?

इस वाक्य का भाव है कि हमारे जीवन में विपत्तियाँ आती रहें, क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है और उनका दर्शन जन्म-मृत्यु से मुक्त करता है।

विपदः सन्तु नः शश्वत्कुंती स्तुतिकृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवत

कुंती ने कृष्ण से विपत्ति क्यों मांगी?

कुंती ने विपत्ति इसलिए मांगी क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण-दर्शन के बाद जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं आना पड़ता।

कुंतीविपत्तिकृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।

कुंती स्तुति अर्थकृष्णविपदः सन्तु
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति क्या है?

कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।

कुंती स्तुतिकृष्णभक्ति

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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