ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भगवान की लीला सुनने से दुख कैसे मिटता है?

नारदजी कहते हैं कि हरि लीला का वर्णन दुखी लोगों के लिए संसार-सागर पार करने की नौका और शांति का उपाय है।

भगवान की लीलादुखहरि कथा
श्रीमद्भागवत

दुनियावी सुख के पीछे भागना क्यों ठीक नहीं?

नारदजी कहते हैं कि विषय-सुख कर्मफल से अपने आप मिलते हैं, जैसे दुख मिल जाता है; बुद्धिमान को परम लक्ष्य के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

दुनियावी सुखवैराग्यकर्मफल
श्रीमद्भागवत

भक्ति शुरू करके छूट जाए तो क्या नुकसान होता है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान के चरणों का भजन शुरू करके बीच में छूट भी जाए तो भक्त का अमंगल नहीं होता।

भक्तिभजनभगवान
श्रीमद्भागवत

सिर्फ धर्म पालन से क्या भगवान मिलते हैं?

नारदजी कहते हैं कि केवल स्वधर्म पालन करने वाले और भगवान का भजन न करने वाले को वास्तविक लाभ क्या मिला, यह विचारणीय है।

धर्म पालनभक्तिस्वधर्म
श्रीमद्भागवत

सकाम कर्म से बचना क्यों जरूरी है?

नारदजी चेतावनी देते हैं कि विषयों में फँसे लोगों को सकाम कर्म मुख्य धर्म जैसा लग सकता है, इसलिए भगवान की भक्ति की दिशा जरूरी है।

सकाम कर्मधर्मभक्ति
श्रीमद्भागवत

भगवान को समर्पित कर्म क्या है?

भगवान को समर्पित कर्म वह है जो शास्त्र-विहित होकर भगवान की प्रसन्नता के लिए किया जाए और कृष्ण नाम-स्मरण से जुड़ा हो।

समर्पित कर्मभगवदर्थ कर्मभक्ति योग
श्रीमद्भागवत

कर्म बंधन से मुक्ति कैसे मिले?

कर्म बंधन से मुक्ति तब होती है जब वही कर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए समर्पित होकर किए जाएँ।

कर्म बंधनमुक्तिभगवान को अर्पण
श्रीमद्भागवत

कर्म भगवान को अर्पित कैसे करें?

नारदजी कहते हैं कि समस्त कर्म पुरुषोत्तम भगवान को समर्पित करना ही संसार के तीन तापों की औषधि है।

कर्म समर्पणभगवानभक्ति योग
श्रीमद्भागवत

साधारण भाषा में भगवान का नाम हो तो क्या वह पवित्र होती है?

हाँ। नारदजी कहते हैं कि दोषयुक्त वाणी भी यदि भगवान के नाम और यश से युक्त हो तो साधु उसे सुनते और गाते हैं।

भगवान का नामभाषाहरि यश
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनने से पाप कैसे मिटते हैं?

भगवान के नाम-यश से युक्त वाणी पाप मिटाती है; नारदजी ने संतों की सेवा और कृष्ण कथा सुनकर अपना हृदय शुद्ध किया।

कृष्ण कथापाप नाशसत्संग
श्रीमद्भागवत

भगवान का नाम लेने से क्या फल मिलता है?

भगवान के नाम और यश से युक्त वाणी पापों का नाश करती है; साधुजन उसे सुनते, गाते और ग्रहण करते हैं।

भगवान का नामकृष्ण नामकीर्तन
श्रीमद्भागवत

भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा क्यों है?

नारदजी कहते हैं कि मोक्ष देने वाला निर्मल ज्ञान भी यदि अच्युत भाव से रहित हो तो उसकी शोभा पूर्ण नहीं रहती।

भक्तिज्ञानमोक्ष
श्रीमद्भागवत

भगवान की महिमा गाना क्यों जरूरी है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान की महिमा के बिना ज्ञान और कर्म शोभा नहीं पाते; सभी साधनों का लक्ष्य कृष्ण गुणों का वर्णन है।

भगवान की महिमाकृष्ण कीर्तनहरि यश
श्रीमद्भागवत

भगवान की कथा लिखना क्यों जरूरी है?

भगवान की कथा इसलिए जरूरी है क्योंकि वही जीवों को बंधन से मुक्त करती है और दुखी मनुष्यों को शांति देती है।

भगवान की कथाकृष्ण लीलाभक्ति
श्रीमद्भागवत

नारद जी ने व्यास जी को क्या सलाह दी?

नारदजी ने व्यासजी से भगवान के निर्मल यश, नाम और प्रेममयी लीलाओं का कल्याणकारी वर्णन करने को कहा।

नारद उपदेशवेदव्यासभगवान की लीला
श्रीमद्भागवत

वेदव्यास को भागवत लिखने की प्रेरणा किसने दी?

वेदव्यास को भगवान की लीला और यश का वर्णन करने की प्रेरणा देवर्षि नारदजी ने दी।

वेदव्यासनारदजीभागवत प्रेरणा
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण क्यों लिखा गया?

नारदजी ने व्यासजी को भगवान के निर्मल यश और लीला का वर्णन करने को कहा, क्योंकि उसी से जीवों का बंधन और दुख मिटता है।

भागवत पुराणवेदव्यासनारद
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?

शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।

भागवत कथाशुकदेवपरीक्षित
श्रीमद्भागवत

नारद और व्यास संवाद क्या है?

नारद-व्यास संवाद की भूमिका है: व्यासजी अपने अधूरेपन पर विचार कर रहे थे, तभी नारदजी आए और व्यासजी ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया।

नारद व्यास संवादव्यास असंतोषनारद
श्रीमद्भागवत

परीक्षित गंगा किनारे क्यों बैठे?

शौनकजी यही पूछते हैं कि सम्राट परीक्षित ने राज्य छोड़कर गंगातट पर मृत्यु तक अनशन का व्रत क्यों लिया।

परीक्षितगंगाउपवास
श्रीमद्भागवत

परीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?

कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।

परीक्षितभागवत कथाशुकदेव
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी इतने बड़े योगी क्यों माने जाते हैं?

वे समदर्शी, भेदभावरहित, परमात्मा में स्थित और इतनी विरक्त दृष्टि वाले थे कि स्त्री-पुरुष भेद भी नहीं देखते थे।

शुकदेव योगीवैराग्यसमदर्शी
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी कौन थे?

शुकदेवजी व्यासजी के पुत्र, महान योगी, समदर्शी, भेदभावरहित और परमात्मा में स्थित मुनि बताए गए हैं।

शुकदेवव्यास पुत्रयोगी
श्रीमद्भागवत

वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ?

व्यासजी का जन्म द्वापर युग में महर्षि पराशर से वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से बताया गया है।

वेदव्यास जन्मपराशरसत्यवती

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।