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भागवत प्रश्नोत्तरी — 68 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 68 प्रश्न

लोक

शिशुमार चक्र क्या है?

शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।

शिशुमार चक्रध्रुवलोकग्रह नक्षत्र
लोक

कर्मकांडी और ब्रह्मज्ञानी के दृष्टिकोण में स्वर्लोक को लेकर क्या अंतर है?

कर्मकांडी स्वर्लोक को अंतिम लक्ष्य मानते हैं। ब्रह्मज्ञानी और भक्त इसे अस्थायी मानते हैं और सीधे मोक्ष चाहते हैं। भागवत कहता है — शुद्ध भक्त स्वर्लोक की कामना नहीं करते।

कर्मकांडीब्रह्मज्ञानीस्वर्लोक
लोक

स्वर्लोक के खगोलीय वर्णन में आकाशगंगा को क्या कहा गया है?

भागवत पुराण में शिशुमार चक्र के वर्णन में आकाशगंगा को शिशुमार का 'पेट' (Belly) कहा गया है — यह भगवान वासुदेव के विराट स्वरूप का एक दृश्यमान अंग है।

आकाशगंगाशिशुमारस्वर्लोक
लोक

शिशुमार चक्र का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?

शिशुमार चक्र का दिन में तीन बार स्मरण और नमन करने से उस समय के समस्त पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ 'नमो ज्योतिर्लोकाय' मंत्र का जाप करते हैं।

शिशुमार चक्रध्यानपाप नाश
लोक

शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?

शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।

शिशुमार चक्रदेवतानक्षत्र
लोक

शिशुमार चक्र में ध्रुव तारा किस स्थान पर है?

शिशुमार चक्र की पूंछ के अंतिम छोर पर ध्रुव तारा स्थित है। यही इस पूरे चक्र की धुरी है जिसके चारों ओर सभी ग्रह-नक्षत्र परिक्रमा करते हैं।

शिशुमार चक्रध्रुव तारापूंछ
लोक

महाराज प्रियव्रत ने सात द्वीपों का शासन किसे सौंपा?

प्रियव्रत के सात पुत्रों को सात द्वीप मिले — आग्नीध्र (जम्बू), इध्मजिह्व (प्लक्ष), यज्ञबाहु (शाल्मलि), हिरण्यरेता (कुश), घृतपृष्ठ (क्रौंच), मेधातिथि (शाक), वीतिहोत्र (पुष्कर)।

प्रियव्रतसात पुत्रशासन
लोक

लोकालोक पर्वत क्या है?

लोकालोक पर्वत भूमण्डल की सबसे बाहरी सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यह 10,000 योजन ऊँचा है और यहाँ स्वयं भगवान विष्णु निवास करते हैं।

लोकालोक पर्वतप्रकाश अंधकारभूलोक सीमा
लोक

महाराज प्रियव्रत कौन थे?

महाराज प्रियव्रत स्वायम्भुव मनु के पुत्र थे जिन्होंने 11 करोड़ वर्षों तक शासन किया। उनके रथ के पहियों से सप्तद्वीप बने और उन्होंने सात पुत्रों को सात द्वीपों का राजा बनाया।

महाराज प्रियव्रतस्वायम्भुव मनुभूमण्डल
लोक

राहु से सिद्धलोक कितनी दूरी पर है?

भागवत (५.२४.४) के अनुसार राहु से दस हजार योजन (अस्सी हजार मील) नीचे सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक स्थित हैं जो भुवर्लोक के सर्वोच्च क्षेत्र हैं।

राहुसिद्धलोकदूरी
लोक

ब्रह्मा के रजोगुण से तीन लोकों की रचना कैसे हुई?

भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने तपोबल और रजोगुण से भूः, भुवः और स्वः की रचना की। रजोगुण से उत्पन्न होने के कारण ये तीनों परिवर्तनशील और नश्वर हैं।

ब्रह्मारजोगुणतीन लोक
लोक

भुवर्लोक में 'विहाराजिरम्' का क्या अर्थ है?

'विहाराजिरम्' का अर्थ है 'विचरण का क्षेत्र या क्रीड़ा-स्थल'। भागवत में यह भुवर्लोक के उस निचले हिस्से को कहते हैं जहाँ यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत विचरण करते हैं।

विहाराजिरम्भुवर्लोकयक्ष राक्षस
लोक

'यावद्वायु: प्रवाति यावन्मेघा उपलभ्यन्ते' का क्या अर्थ है?

इस श्लोक का अर्थ है — 'जहाँ तक वायु बहती है और जहाँ तक बादल दिखते हैं' — वह क्षेत्र भुवर्लोक (अंतरिक्ष) का निचला और मध्य हिस्सा है।

यावद्वायुश्लोक अर्थभुवर्लोक
पौराणिक ज्ञान

भागवत पुराण में कृष्ण लीला का आध्यात्मिक अर्थ?

माखन चोरी=मन अर्पण। रासलीला=जीवात्मा+परमात्मा मिलन(भक्ति)। कालिया=अहंकार विजय। गोवर्धन=भक्त रक्षा। बाँसुरी=अहंकार रहित=ईश्वर बजाते। मूल: भक्ति(प्रेम)=मोक्ष।

भागवतकृष्ण लीलाआध्यात्मिक
दिव्यास्त्र

राजा अंबरीष की रक्षा सुदर्शन चक्र ने कैसे की?

जब दुर्वासा मुनि ने भक्त राजा अंबरीष पर कृत्या भेजी तो विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र भेजा जिसने कृत्या नष्ट की और दुर्वासा का पीछा किया जब तक उन्होंने क्षमा नहीं मांगी।

सुदर्शन चक्रअंबरीषदुर्वासा
दिव्यास्त्र

वज्र से वृत्रासुर का वध कैसे हुआ

इंद्र ने दधीचि-अस्थि-निर्मित वज्र से वृत्रासुर पर पूर्ण बल से प्रहार किया। वज्र में नारायण-शक्ति, दधीचि-तपस्या और इंद्र-प्रारब्ध तीनों शक्तियाँ थीं। वृत्रासुर भगवान का भक्त था इसलिए वज्र-वध से उसे मोक्ष मिला।

वृत्रासुर वधइंद्र वज्रदेवासुर संग्राम
दिव्यास्त्र

यमदण्ड से मुक्ति कैसे मिल सकती है?

यमदण्ड से मुक्ति के तीन उपाय हैं — मृत्यु के समय तुलसी पत्ता, गंगाजल, या श्रीमद्भागवत का पाठ सुनते हुए प्राण त्यागना।

यमदण्डमुक्तितुलसी
पौराणिक शिक्षाएँ

भागवत में ध्रुव की कथा से क्या प्रेरणा मिलती है?

ध्रुव से प्रेरणा: पाँच वर्षीय बालक ने अटूट संकल्प से भगवान विष्णु को प्राप्त किया। भक्ति में डूबने पर सांसारिक इच्छाएँ विलीन हो जाती हैं। माँ का मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प ही सच्ची शक्ति है।

ध्रुवभागवतभक्ति
श्रीमद्भागवत

कुंती स्तुति क्या है?

कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।

कुंती स्तुतिकृष्णभक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत से शोक मोह भय कैसे मिटते हैं?

भागवत में बताया गया भक्ति-योग जीव को माया से उत्पन्न भ्रम से हटाता है, इसलिए शोक, मोह और भय मिटते हैं।

शोक मोह भयभागवतभक्ति योग
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी ने भागवत क्यों सीखी?

शुकदेवजी आत्माराम और निवृत्तिपरायण थे, फिर भी भगवान हरि के गुण इतने मधुर हैं कि उन्होंने भागवत का अध्ययन किया।

शुकदेवआत्मारामभागवत
श्रीमद्भागवत

नारद और व्यास संवाद क्या है?

नारद-व्यास संवाद की भूमिका है: व्यासजी अपने अधूरेपन पर विचार कर रहे थे, तभी नारदजी आए और व्यासजी ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया।

नारद व्यास संवादव्यास असंतोषनारद
श्रीमद्भागवत

काम और लोभ से कैसे बचें?

भागवत और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट होती हैं, फिर काम-लोभ शांत होकर चित्त निर्मल होता है।

कामलोभभागवत
श्रीमद्भागवत

भागवत वैष्णवों का धन क्यों है?

शुकदेवजी भागवत को पुराणों का तिलक और वैष्णवों का धन कहते हैं, क्योंकि इसमें परमहंसों का निर्मल ज्ञान और भक्ति-ज्ञान-वैराग्य सहित मुक्ति मार्ग है।

वैष्णवभागवतधन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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