दीपावली और उपासना विधिदीपावली पर गणेश-लक्ष्मी-सरस्वती की एक साथ पूजा क्यों होती है?बिना गणेश (सद्बुद्धि) और सरस्वती (ज्ञान) के लक्ष्मी (धन) विनाश और पतन का कारण बन सकती है। धन (लक्ष्मी) + ज्ञान (सरस्वती) + विवेक (गणेश) के संतुलन से ही जीवन में सर्वोच्च और स्थायी सफलता मिलती है।#गणेश लक्ष्मी सरस्वती#त्रिदेवी पूजा#सद्बुद्धि ज्ञान धन
प्रमुख बीज मंत्रों का अर्थ'गं' (गणपति बीज) का क्या अर्थ है?'गं' = भगवान श्री गणेश का गणपति बीज। 'ग' = गणेश, बिंदु = विघ्नहर्ता/दुःखहर्ता। अर्थ: 'भगवान गणेश मेरे समस्त विघ्नों और दुःखों को दूर करें।' यह साधना मार्ग की सभी बाधाओं का नाश करता है।#गं गणपति बीज#गणेश#विघ्नहर्ता
शिव शाबर मंत्रसाधना से पहले 'गणेश पूजन' क्यों अनिवार्य है?साधना को निर्विघ्न और सफल बनाने के लिए श्री गणेश का पूजन अनिवार्य रूप से किया जाता है।#गणेश पूजन#विघ्नहर्ता#साधना प्रारंभ
शिव शाबर मंत्रभंडार भरण मंत्र में शिव परिवार का ध्यान क्यों किया जाता है?शिव परिवार की समग्र ऊर्जा (समृद्धि, बुद्धि, शक्ति) को जीवन में स्थापित करने के लिए उनका ध्यान होता है।#शिव परिवार#गौरा#गणेश
भूतनाथ मंत्र साधनागणेश पूजन के बिना साधना अधूरी क्यों है?साधना में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उसे निर्विघ्न बनाने के लिए गणेश पूजन अनिवार्य है।#गणेश पूजन#विघ्नहर्ता#साधना
लोक कथाकुम्हार की भट्टी (आग) में बच्चा कैसे बचा?उस बच्चे की गरीब माँ द्वारा किए गए संकष्टी चतुर्थी (सकट चौथ) व्रत के अमोघ प्रभाव और भगवान गणेश के चमत्कार से बच्चा भयंकर आग में भी सुरक्षित बच गया।#चमत्कार#सकट चौथ#गजानन
उपासना विधान12 महीनों के गणेश जी के नाम क्या हैं?महीनों के अनुसार गणेश जी के नाम हैं: विकट, एकदंत, कृष्ण पिंगल, गजानन, हेरम्ब, विघ्नराज, वक्रतुंड, गणाधिप, अखुरथ, लम्बोदर, द्विजप्रिय और भालचंद्र।#12 मास#गणेश स्वरूप#पीठ
सांस्कृतिक समन्वयगणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का आपस में क्या कनेक्शन है?दार्शनिक रूप से इसका मतलब है कि भगवान का 'साकार रूप' (गणेश जी की मूर्ति) अंत में 'अरूप और अनंत सत्ता' (भगवान विष्णु) में जाकर मिल जाता है।#गणेश विसर्जन#लोकमान्य तिलक#अरूप
नियम और निषेधगणेश जी की पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?गणेश पुराण के अनुसार विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने के कारण हुए विवाद में गणेश जी ने तुलसी को शाप दिया था। इसलिए गणेश पूजा में तुलसी चढ़ाना बिल्कुल मना है।#तुलसी निषेध#गणेश पुराण#शाप
पूजा विधिगणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं?गणेश पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान गणेश ने तुलसी को श्राप दिया था, इसी वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना बिल्कुल मना है।#तुलसी निषेध#गणेश पुराण#वर्जित सामग्री
पूजा विधिगणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?गणेश जी को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ानी चाहिए। दूर्वा अमृत का प्रतीक है जो भगवान गणेश को शीतलता प्रदान करती है।#दूर्वा#21 गांठें#अमृत तत्व
तुलनात्मक अध्ययनभगवान शिव के गण 'महोदर' और श्री गणेश के 'महोदर' अवतार (मोहासुर वध) में क्या तात्त्विक समानता है?दोनों स्वरूपों में 'विशाल उदर' ब्रह्मांडीय भ्रम, अज्ञान और लोभ को निगलने का प्रतीक है। जैसे गणेश जी के महोदर अवतार ने 'मोहासुर' का वध किया, वैसे ही शिव गण महोदर की ऊर्जा साधक के भीतर के मोह और लोभ को भस्म करती है।#महोदर अवतार#मोहासुर वध#भगवान गणेश
तीर्थ एवं धार्मिक स्थलअष्टविनायक के आठ गणेश मंदिर कहाँ हैं?अष्टविनायक महाराष्ट्र में पुणे और रायगढ़ के आसपास आठ स्वयंभू गणेश मंदिर हैं — मोरगाँव (मयूरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लालेश्वर), महाड़ (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणी), लेण्याद्री (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर) और रांजणगाँव (महागणपति)।#अष्टविनायक#गणेश मंदिर#महाराष्ट्र
व्रत एवं त्योहारसंकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में अंतरशुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी में रात्रि को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है, जो इसकी मुख्य विशेषता है। मंगलवार की संकष्टी को अंगारकी कहते हैं।#संकष्टी चतुर्थी#विनायक चतुर्थी#गणेश चतुर्थी
व्रत एवं त्योहारगणेश चतुर्थी व्रत की विधिगणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मूर्ति स्थापना, पंचामृत स्नान, दूर्वा, मोदक, लाल फूल, धूप-दीप, कथा और आरती मुख्य अंग हैं। इस दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।#गणेश चतुर्थी#विनायक चतुर्थी#गणपति पूजा
देवी-देवता पूजनगणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?मुद्गल पुराण के अनुसार अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में जलन हुई, जो केवल 21 दूर्वा खाने से शांत हुई। तभी से गणेश को दूर्वा अर्पण की परंपरा है। दूर्वा गणेश को सर्वाधिक प्रिय है।#गणेश#दूर्वा#दूब
गणेशकर्ज से मुक्ति पाने के लिए ऋणहर्ता मंत्र का महत्व और विधि क्या हैकर्ज मुक्ति के लिए 'ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरण्यं हुं नमः फट्' मंत्र और ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।#कर्ज मुक्ति#ऋणहर्ता#गणेश
मंत्र जप एवं साधनागणेश जी के 108 नामों का जप कैसे करेंबुधवार को स्नान करके, दूर्वा-मोदक चढ़ाएं, लाल माला से 'ॐ [नाम] नमः' क्रम में 108 नाम जपें। गणेश चतुर्थी को यह जप विशेष फलदायक है।#गणेश 108 नाम#जप विधि#गणेश पूजा
तीर्थ यात्राअष्टविनायक मंदिर कहाँ कहाँ हैं कैसे पहुंचेंमहाराष्ट्र 8 गणेश मंदिर: मोरगांव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेउर, लेण्याद्रि, ओझर, रांजणगांव। पुणे केंद्र; 2-3 दिन; ~600-700km सर्किट। मोरगांव से शुरू।#अष्टविनायक#गणेश#महाराष्ट्र
स्तोत्र एवं पाठगणेश चालीसा पढ़ने से विघ्न कैसे दूरगणेश=विघ्नहर्ता+प्रथम पूज्य। चालीसा पाठ=गणेश प्रसन्न=बाधा नाश। नया कार्य, परीक्षा, व्यापार, बुद्धि। बुधवार/चतुर्थी। ~10-12 min।#गणेश चालीसा#विघ्नहर्ता#बाधा
स्तोत्र एवं पाठगणेश अथर्वशीर्ष से बुद्धि कैसे बढ़ती हैअथर्ववेद उपनिषद (वैदिक प्रामाणिक)। गणेश=ब्रह्म='त्वं बुद्धि:' — बुद्धि/विवेक/स्मृति। विघ्न नाश, मोक्ष। बुधवार/चतुर्थी। ~8-10 min।#गणेश अथर्वशीर्ष#बुद्धि#उपनिषद
दैनिक आचारमहत्वपूर्ण काम से पहले कौन सा मंत्र जपें'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार (30 सेकंड) — विघ्न निवारण। या 'वक्रतुण्ड महाकाय...'। हनुमान (बल), सरस्वती (बुद्धि), गायत्री (सार्वभौमिक)। गणेश = प्रथम पूज्य = किसी भी कार्य का आरंभ।#महत्वपूर्ण काम#मंत्र#गणेश
दैनिक आचारगणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से दोष लगता है क्याहाँ — भागवत पुराण (10.57) आधारित। गणेश ने चंद्र को शाप दिया; कृष्ण को भी स्यमंतक मणि चोरी का कलंक लगा। उपाय: 'सिंहः प्रसेनमवधीत्...' 21-108 बार + स्यमंतक कथा पढ़ें + गणेश पूजन। पौराणिक शास्त्रीय आधार।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#कलंक
दैनिक आचारनया वाहन खरीदने पर कौन सी पूजा करेंगणेश पूजा + नारियल + स्वस्तिक + माला। शुभ मुहूर्त में पहली सवारी। हनुमान/गणेश चित्र वाहन में। प्रथम यात्रा = मंदिर। सुरक्षा: महामृत्युंजय।#वाहन#पूजा#गणेश
दैनिक आचारनई नौकरी ज्वाइन करने पर कौन सी पूजागणेश (विघ्न निवारण) + सरस्वती (बुद्धि) + हनुमान (शक्ति) पूजा। ज्वाइनिंग दिन: ईश्वर स्मरण, आशीर्वाद, दही-चीनी, 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार।#नौकरी#पूजा#सफलता
दैनिक आचारव्यापार शुरू करने से पहले कौन सी पूजागणेश (विघ्न निवारण) + लक्ष्मी (धन) + सरस्वती (बुद्धि) पूजा। शुभ मुहूर्त, गणेश-लक्ष्मी हवन, श्री यंत्र स्थापना। पहला लाभ दान करें। 'ॐ श्रीं...' लक्ष्मी मंत्र।#व्यापार#पूजा#गणेश
दैनिक आचारपरीक्षा में सफलता के लिए कौन सी पूजा करेंसरस्वती ('ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः') + गणेश ('ॐ गं गणपतये नमः') + हयग्रीव (ज्ञान अवतार)। नियमित पढ़ाई = सबसे बड़ी पूजा। पूजा + मेहनत = सफलता। पूजा मेहनत का विकल्प नहीं।#परीक्षा#सफलता#सरस्वती
दैनिक आचारयात्रा पर जाने से पहले कौन सा मंत्र पढ़ेंगणेश ('ॐ गं गणपतये नमः'), हनुमान चालीसा (सुरक्षा), महामृत्युंजय (दुर्घटना रक्षा)। दही-चीनी खाकर, कुल देवता स्मरण करके निकलें।#यात्रा#मंत्र#सुरक्षा
दैनिक आचारघर से निकलते समय कौन सा मंत्र बोलेंगणेश: 'वक्रतुण्ड महाकाय...' (विघ्न निवारण) या 'ॐ गं गणपतये नमः'। हनुमान स्मरण। दाहिने पैर से निकलें। माता/बड़ों का आशीर्वाद। द्वार पर प्रणाम।#घर से निकलना#मंत्र#सुरक्षा
स्वप्न शास्त्रसपने में हाथी दिखने का क्या मतलबहाथी = अत्यंत शुभ। गणेश कृपा, राजयोग, धन-समृद्धि, बुद्धि, दीर्घायु। सफेद हाथी=दुर्लभ सौभाग्य; सवारी=उच्च पद; शांत=धैर्य; क्रोधित=सावधानी। शकुन शास्त्र में भी शुभ। सर्वसम्मत शुभ सपना।#हाथी#सपना#गणेश
पौराणिक कथागणेश जी का सिर क्यों कटा और हाथी सिर कैसे लगापार्वती ने उबटन से बालक बनाया, द्वारपाल नियुक्त किया। शिव को रोकने पर शिव ने क्रोध में सिर काटा। पार्वती के क्रोध पर शिव ने हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया। वरदान: सर्वप्रथम पूज्य। आध्यात्मिक: मानव सिर कटना = अहंकार नाश; गज सिर = बुद्धि, विवेक।#गणेश#सिर कटना#हाथी
पूजा विधिपूजा घर में दो गणेश जी की मूर्ति रख सकते हैं क्यालोक परंपरा में पूजा घर में एक ही गणेश मूर्ति रखना उत्तम माना जाता है — दो रखने से विघ्न बने रहने की मान्यता है। शास्त्रों में कोई स्पष्ट निषेध नहीं है। टूटी मूर्ति न रखें, संदेह हो तो कुल पंडित से पूछें।#गणेश#मूर्ति#पूजा घर
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखना अशुभ क्यों माना जाता है?चन्द्र अशुभ: चन्द्रमा ने गणेश का उपहास → श्राप: 'देखने वाले पर मिथ्या दोष।' कृष्ण पर भी स्यमंतक आरोप। उपाय: स्यमंतक कथा + 'सिंहः प्रसेनम...' मंत्र + गणेश व्रत।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#श्राप
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर मूर्ति विसर्जन का वैज्ञानिक प्रभाव क्या है?विसर्जन प्रभाव: मिट्टी मूर्ति=पर्यावरण अनुकूल (शास्त्रीय)। PoP+रासायनिक=प्रदूषण (जल विषाक्तता, जलजीव मृत्यु, CPCB चिंता)। समाधान: मिट्टी लौटें, प्राकृतिक रंग, घर विसर्जन, कृत्रिम तालाब। पर्यावरण रक्षा=धर्म।#गणेश विसर्जन#पर्यावरण#प्रदूषण
लक्ष्मी उपासनादीपावली पर लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश पूजा क्यों करते हैंगणेश पहले क्यों: (1) शिव का वरदान — सर्वप्रथम पूज्य। (2) विघ्नहर्ता — पूजा में बाधा न आए। (3) बुद्धि पहले, धन बाद — विवेकपूर्ण धन उपयोग। (4) रिद्धि-सिद्धि = लक्ष्मी को आकर्षित। (5) लक्ष्मी: जहाँ गणेश पूजा, वहीं मेरा निवास। क्रम: गणेश → लक्ष्मी → सरस्वती → कुबेर।#दीपावली#गणेश#लक्ष्मी
गणेश उपासनागणेश विसर्जन के बाद मूर्ति घर में रख सकते हैं या नहींगणेश मूर्ति: मिट्टी/POP = अस्थायी, विसर्जन अनिवार्य (आवाहन हुई हो)। धातु/पत्थर = स्थायी, घर में रखें, नित्य पूजा। विसर्जित मूर्ति वापस न रखें। इको-फ्रेंडली: शुद्ध मिट्टी, बाल्टी विसर्जन → मिट्टी बगीचे में। पीढ़ियों की धातु मूर्ति = पूर्णतः शुभ।#गणेश#विसर्जन#मूर्ति
गणेश उपासनागणेश पूजा में दूर्वा कैसे तोड़ें और कब तोड़ेंगणेश दूर्वा: 3/5 पत्तियों वाली, हरी-ताज़ी, गाँठ सहित। 21 संख्या उत्तम। प्रातः तोड़ें, रविवार वर्जित (कुछ में)। जड़ न उखाड़ें, सूखी/पीली वर्जित। धोकर, 'ॐ गं...' बोलकर मस्तक पर। कथा: अनलासुर ताप शमन हेतु 21 दूर्वा → शीतलता।#गणेश#दूर्वा#घास
गणेश उपासनागणेश जी को कौन से फल प्रिय हैंगणेश प्रिय फल: केला (सर्वप्रिय, अनिवार्य), जामुन, अनार, सेब, आम, बेर, नारियल, अमरूद। मोदक = सबसे प्रिय भोग। विषम संख्या (1/3/5/7)। 5 प्रकार के फल (चतुर्थी)। ताज़े, शुद्ध, बिना कीड़े।#गणेश#फल#केला
गणेश उपासनागणेश जी को लड्डू कितने अर्पित करने चाहिएगणेश लड्डू: 1 (न्यूनतम), 5, 11 (अत्यन्त शुभ), 21, 108। विषम संख्या प्रचलित। मोदक = सर्वप्रिय ('मोदकप्रिय')। बेसन/बूँदी लड्डू भी मान्य। शुद्ध घी। 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलकर अर्पित। चतुर्थी = 21/108 विशेष।#गणेश#लड्डू#मोदक
गणेश उपासनागणेश जी की मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिएगणेश दिशा: मुख पूर्व/पश्चिम। सूँड: बायीं (सर्वोत्तम — सौम्य, गृहस्थ शुभ, कम नियम), दायीं (सिद्धिविनायक — कठोर नियम), सीधी (योगी)। स्थान: ईशान कोण। प्रवेश पर मुख बाहर। घर = बायीं सूँड सबसे अच्छा।#गणेश#मूर्ति#दिशा
त्योहार पूजादीपावली पर गणेश लक्ष्मी पूजा में सरस्वती क्यों बैठती हैं?सरस्वती क्यों: धन (लक्ष्मी) + ज्ञान (सरस्वती) = सम्पूर्ण समृद्धि। बहीखाता = सरस्वती, तिजोरी = लक्ष्मी। पंचपूजन: गणेश + लक्ष्मी + काली (दवात) + सरस्वती (बही) + कुबेर (तिजोरी)। केवल धन नहीं, ज्ञानपूर्वक धन = शाश्वत समृद्धि।#गणेश लक्ष्मी सरस्वती#दीपावली#त्रिदेवी
व्रतसंकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखेंसंकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।#संकष्टी#चतुर्थी#गणेश
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना कैसे करें?गणपति स्थापना: मिट्टी मूर्ति → चौकी सज्जा → प्राण प्रतिष्ठा (पंचामृत स्नान, 'ॐ गं गणपतये नमः') → षोडशोपचार → गणेश अथर्वशीर्ष → 21 मोदक भोग → आरती → प्रतिदिन पूजा → अनंत चतुर्दशी विसर्जन। दूर्वा 21 गाँठ। चन्द्र दर्शन वर्जित।#गणेश चतुर्थी#गणपति स्थापना#प्राण प्रतिष्ठा
नित्य मंत्रदुकान खोलते समय कौन सा मंत्र बोलें?दुकान मंत्र: गणेश (वक्रतुण्ड...) → लक्ष्मी (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः) → कुबेर मंत्र। विधि: गंगाजल छिड़काव → दीपक-अगरबत्ती → मंत्र → प्रणाम → गल्ले पर स्वस्तिक। धनतेरस, दीपावली पर विशेष पूजा।#दुकान मंत्र#व्यापार मंत्र#लक्ष्मी
दैनिक कर्मनया कार्य शुरू करने से पहले कौन सा मंत्र बोलेंनया कार्य शुरू करने से पहले: गणेश वन्दना — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव'। बीज मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (11/21 बार)। ज्ञान कार्य हेतु सरस्वती वन्दना। ऋग्वेद: 'ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे'। गणेश प्रथम पूज्य — सभी शुभ कार्य उनकी वन्दना से आरम्भ होते हैं।#शुभारम्भ#गणेश#विघ्न निवारण
मंत्रपरीक्षा से पहले कौन सा मंत्र बोलने से सफलता मिलती हैपरीक्षा हेतु: (1) 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' — सरस्वती बीज मंत्र। (2) सरस्वती वन्दना — 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला'। (3) 'ॐ गं गणपतये नमः'। (4) हनुमान चालीसा — 'बुद्धिहीनतनु जानिके'। (5) गायत्री मंत्र — बुद्धि प्रेरणा। मंत्र + नियमित अध्ययन = सफलता।#परीक्षा#विद्या#सरस्वती
दैनिक कर्मयात्रा से पहले कौन सा मंत्र बोलेंयात्रा से पहले: (1) गणेश मंत्र — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव' (2) विष्णु स्मरण — 'मंगलं भगवान् विष्णुः' (3) हनुमान स्मरण। 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार जपें। इष्टदेव को प्रणाम, दही-शक्कर, दाहिना पैर पहले — परम्परागत शुभ विधान।#यात्रा मंत्र#गणेश#सुरक्षा
स्वप्न दर्शनस्वप्न में गणेश जी के दर्शन का क्या शकुन है?गणेश स्वप्न = सर्वाधिक शुभ: (1) विघ्न नाश+कार्य सिद्धि (2) नवीन शुभारम्भ (3) बुद्धि/विद्या (विद्यार्थियों विशेष) (4) ऋद्धि-सिद्धि (समृद्धि+सफलता) (5) पारिवारिक सुख। मोदक=आनन्द, लिखते=परीक्षा सफलता, नृत्य=उत्सव। करें: गणपति मंदिर+मोदक+'ॐ गं गणपतये नमः'+दूर्वा। गणेश पुराण: 'स्वप्न दर्शन=परम कृपा।'#गणेश स्वप्न#विघ्नहर्ता#बुद्धि
मंदिर वास्तुमंदिर में गणपति प्रतिमा सबसे पहले क्यों स्थापित की जाती है?कारण: (1) ऋग्वेद: 'गणानां त्वा गणपतिं हवामहे' = प्रथम आवाहनीय (2) विघ्नहर्ता — प्रारम्भ में पूजन = विघ्न पूर्व-निवारण (3) शिवपुराण कथा — माता-पिता प्रदक्षिणा = प्रथम पूज्य वरदान। स्थान: प्रवेश द्वार पर/अलग मंडप। सर्वत्र: निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा, विवाह, हवन, पत्र — सब में पहले।#गणपति#प्रथम पूज्य#विघ्नहर्ता
मंत्र सिद्धिगणेश मंत्र सिद्धि कैसे करें?मुख्य मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (6 अक्षर = 6 लाख पुरश्चरण)। बुधवार, गणेश चतुर्थी। लाल वस्त्र। भोग: मोदक, दूर्वा (21/108)। गणपत्यथर्वशीर्ष के 21 पाठ शक्तिशाली। गणेश-सिद्धि से सभी साधनाओं के विघ्न दूर। ध्यान: एकदंत, मोदकहस्त गणपति।#गणेश मंत्र#गणपति सिद्धि#विघ्नहर्ता