गणेश पूजागणेश जी की पूजा से बुद्धि कैसे बढ़ती है?गणेश = ज्ञानमय (अथर्वशीर्ष)। स्वरूप: बड़ा सिर=बुद्धि, बड़े कान=ज्ञान ग्रहण, एक दांत=एकाग्रता। मूलाधार चक्र अधिपति → कुण्डलिनी → बुद्धि चक्र सक्रिय। बुध ग्रह संबंधित → बुद्धि कारक। उपाय: 108 जप, दूर्वा, अथर्वशीर्ष, बुधवार व्रत।#बुद्धि#गणेश#विद्या
मंत्र साधनागणेश जी का 'ग्लौम' बीज मंत्र और उसका प्रभाव'ग्लौं' पृथ्वी तत्व का बीज मंत्र है। इसके उच्चारण से जीवन, व्यापार और बुद्धि में स्थिरता आती है और जड़ जमा चुके बड़े-बड़े विघ्न आसानी से नष्ट हो जाते हैं।#गणेश#ग्लौम#बीज मंत्र
गणेश पूजादाएं सूंड वाले गणेश की पूजा में क्या विशेष सावधानी बरतें?नियमित पूजा अनिवार्य (एक दिन न छोड़ें)। कठोर शुद्धता, ब्रह्मचर्य। निश्चित समय। शुद्ध मंत्र। गुरु दीक्षा। सामान्य गृहस्थ = बाईं सूंड ही रखें।#दाईं सूंड#सिद्ध गणपति#सावधानी
नाम महिमा एवं भक्तिगणेश नाम जपने से बुद्धि कैसे बढ़ती है'ॐ गं गणपतये नमः' गणेश का बीज मंत्र है जो एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है। गणेश की पत्नियाँ सिद्धि और बुद्धि हैं — उनका नाम जपने से दोनों की प्राप्ति होती है। विद्यारंभ और हर नए कार्य में गणेश-वंदना इसीलिए होती है।#गणेश नाम#बुद्धि वृद्धि#गणपति जप
गणेश व्रतसंकट चतुर्थी व्रत की विधि और कथा क्या है?कृष्ण पक्ष चतुर्थी (मासिक)। संध्या पूजा, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, कथा श्रवण। चंद्रोदय बाद पारण। कथा: ब्राह्मण→व्रत→संकट दूर। माघ चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।#संकट चतुर्थी#व्रत#विधि
स्तोत्र विधिगणपति अथर्वशीर्ष 21 बार पढ़ने से क्या होता है?संकष्टी पर 21 बार=दोगुना फल, बिगड़े काम बनें। अथर्वशीर्ष: 1000 बार=सभी कामना सिद्ध। महाविघ्न/महापाप मुक्ति। दैनिक 1, बुधवार विशेष। विद्यार्थी/व्यापारी/सभी।#गणपति अथर्वशीर्ष#21 बार#संकष्टी
गणेश कथागणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों बनाया गया?गणेश जी प्रथम पूज्य दो कारणों से बने — पहला: पार्वती जी के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने यह वरदान दिया। दूसरा: ब्रह्मांड-परिक्रमा प्रतियोगिता में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके बुद्धि से विजय पाई।#गणेश प्रथम पूज्य#विघ्नहर्ता#शिव वरदान
वास्तु तस्वीर नियमघर में लक्ष्मी गणेश की तस्वीर कहाँ लगाएं वास्तु अनुसार?लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर पूजा घर (ईशान कोण), मुख्य द्वार या उत्तर दिशा में लगाएँ। तिजोरी के पास भी शुभ। गणेश दाईं, लक्ष्मी बाईं ओर, प्रसन्न मुद्रा में। बेडरूम/शौचालय/दक्षिण में न लगाएँ।#लक्ष्मी गणेश#तस्वीर#वास्तु
लक्ष्मी-गणेशलक्ष्मी जी की पूजा में गणेश जी को पहले क्यों पूजते हैं?गणेश = प्रथम पूज्य (ब्रह्मा वरदान — बिना गणेश = विघ्न)। रिद्धि-सिद्धि पति + लक्ष्मी = सम्पूर्ण समृद्धि। बुद्धि पहले → धन बाद। दीपावली: गणेश→लक्ष्मी→सरस्वती→कुबेर।#गणेश#लक्ष्मी#पहले
गणेश पूजागणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।#गणेश चालीसा#पाठ विधि#नियम
गणेश पूजा नियमगणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?तुलसी ने विवाह प्रस्ताव → गणेश ने मना → तुलसी शाप → गणेश प्रति-शाप: 'मेरी पूजा में तुम वर्जित।' गणेश = दूर्वा; विष्णु = तुलसी। कुछ दक्षिण परंपरा में मान्य।#तुलसी#गणेश#वर्जित
गणेश कथाशिव ने गणेश जी को हाथी का सिर कैसे लगाया?शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने गणों को उत्तर दिशा में भेजा। वहाँ माँ की तरफ पीठ करके सोते हुए हाथी के बच्चे का सिर लाया गया। शिव जी ने उसे गणेश के धड़ से जोड़कर मंत्रबल से प्राण डाले और गणेश जी पुनर्जीवित हुए।#गणेश हाथी सिर#शिव वरदान#गजमुख
गणेश पूजागणेश विसर्जन कितने दिन बाद करना चाहिए?1.5 दिन सामान्य, 10 दिन (अनंत चतुर्दशी) सर्वोत्तम। 3/5/7/11/21 भी मान्य। विसर्जन पूर्व पूर्ण पूजा+आरती। नदी/कृत्रिम टैंक। मिट्टी मूर्ति = इको-फ्रेंडली।#विसर्जन#दिन#गणेश चतुर्थी
गणेश पूजा सामग्रीगणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है और कितनी चढ़ाएं?अनलासुर निगलने → अग्नि ताप → 88,000 ऋषियों ने दूर्वा दी → शीतलता। 21 दूर्वा सर्वप्रचलित। 3/5 पत्ती गांठ, ताजी हरी, जड़ सहित। 101 = विशेष।#दूर्वा#गणेश#कारण
वास्तु तस्वीर नियमघर में गणेश जी की तस्वीर किस दिशा में लगाएं?गणेश जी की तस्वीर ईशान कोण, उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएँ। मुख्य द्वार पर भी शुभ है। सौम्य मुद्रा, सम संख्या में रखें। दक्षिणमुखी गणेश घर में न रखें।#गणेश जी#तस्वीर दिशा#वास्तु
गणेश मंत्रगणेश अथर्वशीर्ष का पाठ कब और कैसे करें?अथर्ववेद उपनिषद्। चतुर्थी/बुधवार/प्रतिदिन। 1 बार शुभ, 11 बार सर्वसिद्धि। दूर्वा+मोदक+लाल फूल। शुद्ध उच्चारण। फल: 'ब्रह्मभूयाय कल्पते' — ब्रह्म प्राप्ति। सर्वशक्तिमान गणेश स्तोत्र।#अथर्वशीर्ष#गणेश#पाठ
पूजा विधि एवं कर्मकांडगणेश जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा हैगणेश के सर्वप्रभावी मंत्र — नित्य जप 'ॐ गं गणपतये नमः' (बीज मंत्र), हर कार्यारंभ में 'वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ...', और विशेष साधना में गणेश गायत्री 'ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि...'।#गणेश मंत्र#ॐ गं गणपतये नमः#वक्रतुण्ड
भक्ति एवं आध्यात्मगणेश जी की कथा से जीवन में क्या शिक्षा मिलती हैगणेश-कथाओं की शिक्षाएँ — परिक्रमा-प्रसंग: बुद्धि बल से श्रेष्ठ है; महाभारत-लेखन: बड़े काम में एकाग्र समर्पण अनिवार्य है; प्रथम पूज्यता: हर कार्य में बुद्धि का आह्वान पहले करो; और नम्रता: महाज्ञान के साथ सरलता होनी चाहिए।#गणेश जीवन शिक्षा#बुद्धि बल#प्रथम पूज्य
पूजा विधि एवं कर्मकांडगणेश जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैंगणेश पूजा की सबसे बड़ी गलती — तुलसी चढ़ाना (तुलसी-गणेश में पौराणिक बैर है)। अन्य — टूटे दाँत वाली मूर्ति, केतकी का फूल, बासी भोग, और गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन।#गणेश पूजा गलती#तुलसी वर्जित#टूटी मूर्ति
पूजा विधि एवं कर्मकांडगणेश जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या हैगणेश को प्रसन्न करने के उपाय — 21 दूर्वा अर्पण, मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप, बुधवार को पीले फूल-वस्त्र के साथ पूजन, और 'वक्रतुण्ड महाकाय...' श्लोक बोलकर हर कार्य आरंभ करना।#गणेश प्रसन्न#मोदक दूर्वा#गणेश उपाय
भक्ति एवं आध्यात्मगणेश जी नाराज हों तो क्या लक्षण दिखते हैंगणेश-नाराजगी के संकेत — हर काम में अकारण विघ्न, शुभ कार्यों का बिगड़ना, बुद्धि-निर्णय में भटकाव। कारण — तुलसी अर्पण, टूटी मूर्ति की पूजा, अन्यमनस्कता। 'ॐ गं गणपतये नमः' और दूर्वा से सुधार।#गणेश नाराज#गणपति रुष्ट#विघ्न संकेत
भक्ति एवं आध्यात्मगणेश जी की कृपा प्राप्त होने पर क्या संकेत मिलते हैंगणेश-कृपा के संकेत — अटके काम बनने लगना, बुद्धि और एकाग्रता की वृद्धि, नए कार्यों में बाधा न आना, स्वप्न में हाथी या मोदक दिखना, और ज्ञान-धर्म की ओर स्वाभाविक झुकाव।#गणेश कृपा#गणपति संकेत#विघ्नहर्ता
गणेश पूजागणेश जी की सूंड बाएं और दाएं दोनों तरफ की मूर्ति में क्या अंतर है?बाईं सूंड: सौम्य, गृहस्थ, सरल नियम, शीघ्र प्रसन्न (इड़ा/चंद्र)। दाईं सूंड: सिद्ध, उग्र, कठोर नियम, तांत्रिक (पिंगला/सूर्य)। घर = बाईं सूंड।#सूंड#बाएं#दाएं
इतिहास-पुराणमहाभारत किसने लिखा?महाभारत के रचयिता: महर्षि वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन)। गणेश ने लेखनी से लिखा — परंपरागत आख्यान। एक लाख श्लोक, 18 पर्व। भगवद्गीता इसी का अंश। 'पंचम वेद' कहलाता है। व्यास ने 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र भी रचे।#महाभारत#वेदव्यास#गणेश
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
मंत्र साधनारुका हुआ काम बनाने का गणेश मंत्रलंबे समय से अटके या रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए भगवान गणेश के मंत्र 'ॐ वक्रतुण्ड महाकाय...' का उच्चारण कर घर से दायां पैर पहले बाहर निकालना चाहिए।#गणेश#रुका काम#विघ्नहर्ता
मंत्र साधनाबच्चों का पढ़ाई में मन लगाने का मंत्रबच्चों की चंचलता दूर कर पढ़ाई में मन लगाने के लिए, अध्ययन शुरू करने से पूर्व उनसे विघ्नहर्ता गणेश के मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार उच्चारण करवाना चाहिए।#बच्चे#पढ़ाई#गणेश
दोष निवारणकर्ज उतारने का रामबाण मंत्रकर्ज के जाल से शीघ्र बाहर निकलने के लिए मंगल देव के मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' और गणेश जी के 'ऋणहर्ता मंत्र' का नियमित रूप से जप करना रामबाण उपाय है।#कर्ज मुक्ति#मंगल देव#गणेश
मंत्र साधनाबच्चों की बुद्धि और याददाश्त बढ़ाने का मंत्रबच्चों की चंचलता दूर कर स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए उनसे प्रतिदिन माता सरस्वती के 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः' और गणेश मंत्र का उच्चारण करवाना चाहिए।#बुद्धि#याददाश्त#सरस्वती
मंत्र साधनापढ़ाई में मन लगाने का गणेश मंत्रपढ़ाई में एकाग्रता और स्मरण शक्ति के लिए अध्ययन से पूर्व 'ॐ गं गणपतये नमः' या गणेश गायत्री मंत्र का 11 या 21 बार मानसिक जप करना चाहिए।#गणेश मंत्र#शिक्षा#विद्या
गणेश पूजागणेश जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?पौराणिक कथा: बालक गणेश ने माता पार्वती देखकर पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया (शिव प्रसन्नता हेतु) — शिव-पार्वती प्रसन्न, परंपरा आरंभ। अन्य: सिंदूर = शक्ति/शुभता। गणेश = मूलाधार चक्र अधिपति (लाल रंग)। शुद्ध सिंदूर ललाट + उदर पर लगाएं।#सिंदूर#गणेश#लाल रंग
गणेश कथापार्वती ने उबटन से गणेश जी को क्यों बनाया?पार्वती जी ने उबटन से गणेश को इसलिए बनाया क्योंकि शिव के गण नंदी ने शिव जी के आने पर उनकी आज्ञा की अनदेखी की थी। पार्वती को एक ऐसे विश्वस्त गण की जरूरत थी जो केवल उन्हीं की आज्ञा माने।#पार्वती उबटन#गणेश जन्म#पार्वती गण
गणेश पूजा सामग्रीगणेश जी को मोदक भोग क्यों प्रिय है — पौराणिक कारण?शिव-पार्वती प्रतियोगिता: गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा = ब्रह्मांड → विजयी → मोदक पुरस्कार। 'मोद' = आनंद। 21 मोदक। गुड़+नारियल/खोया।#मोदक#गणेश#प्रिय
गणेश पूजागणेश जी की पूजा से विघ्न कैसे दूर होते हैं?गणेश = विघ्नहर्ता + विघ्नेश्वर। शिव पुराण: प्रथम पूज्य वरदान — बिना गणेश पूजा कार्य अशुभ। अथर्वशीर्ष: 'ध्यान से सर्व विघ्न मुक्ति, महाविघ्न से भी।' विघ्न अधिपति: पूजा = विघ्न हटाएं, उपेक्षा = विघ्न आएं। उपाय: 108 जप, दूर्वा, मोदक, बुधवार/चतुर्थी पूजन।#विघ्नहर्ता#विघ्न नाश#गणेश
आरती लाभगणेश आरती जय गणेश देवा का लाभ?विघ्न नाश, बुद्धि, कार्यसिद्धि, शुभारंभ। बुधवार/संकष्टी/गणेश चतुर्थी। किसी भी पूजा शुरुआत। बच्चे भी गा सकते=सबसे सरल।#जय गणेश#आरती#विघ्नहर्ता
गणेश पूजाबुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।#बुधवार#गणेश#बुध ग्रह
गणेश कथागणेश जी का सिर हाथी का क्यों है, शिव पुराण में क्या कारण बताया है?शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने क्रोध में गणेश जी का सिर काट दिया था। पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने पुत्र को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। उत्तर दिशा में मिले हाथी के बच्चे का सिर लाकर जोड़ा गया और इस प्रकार गणेश जी गजमुख हुए।#गणेश हाथी सिर#शिव पुराण#गजमुख
गणेश पूजागणेश गायत्री मंत्र का जप किस उद्देश्य से करें?मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्'। उद्देश्य: बुद्धि-विवेक वृद्धि, विघ्न नाश, शिक्षा/परीक्षा सफलता, नए कार्य शुभारंभ, ग्रह शांति। 108 बार नित्य, बुधवार विशेष। दीक्षा अनिवार्य नहीं।#गणेश गायत्री#मंत्र#बुद्धि
गणेश पूजागणेश जी की मिट्टी और प्लास्टर की मूर्ति में कौन सी शुभ है?मिट्टी = सर्वोत्तम और शुभ (शास्त्र सम्मत, प्राकृतिक, विसर्जन में विलय)। POP = अनुशंसित नहीं (जल प्रदूषण, कई राज्यों में प्रतिबंधित)। सर्वोत्तम: शाडू माटी + प्राकृतिक रंग। घर पर मिट्टी/हल्दी से बनाना अत्यंत शुभ।#मिट्टी#प्लास्टर#मूर्ति
गणेश पूजागणेश जी के 12 नामों का जप कैसे करें?12 नाम: सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, गजानन। फल (श्लोक): विद्यारंभ, विवाह, संग्राम, संकट — कहीं विघ्न नहीं। विधि: 'ॐ (नाम) नमः' 108 बार या श्लोक 11/21 बार।#द्वादश नाम#12 नाम#गणेश
गणेश पूजागणेश यंत्र स्थापित करने की विधि और लाभ क्या हैं?शुभ मुहूर्त: बुधवार/चतुर्थी। शुद्धि: गंगाजल+पंचामृत। पूर्व/उत्तर दिशा, लाल कपड़े पर। सिंदूर तिलक, दूर्वा, 108 जप। लाभ: विघ्न नाश, व्यापार उन्नति, ऋण मुक्ति, बुद्धि, वास्तु शांति। प्रतिदिन पूजा अनिवार्य।#गणेश यंत्र#स्थापना#विघ्न नाश
रुद्राष्टाध्यायी के अध्यायशिवसंकल्प सूक्त क्या है?शिवसंकल्प सूक्त = रुद्राष्टाध्यायी का प्रथम अध्याय। देवता: मन और गणेश। 'गणानां त्वा गणपति...' से आरंभ। मुख्य मंत्र: 'तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु' (मेरा मन शुभ संकल्पों वाला हो)। जाग्रत और सुषुप्त में मन नियंत्रित करता है।#शिवसंकल्प सूक्त#प्रथम अध्याय#गणेश
गणपति पूजन और संकल्परुद्राभिषेक का संकल्प कैसे लेते हैं?संकल्प: दाहिने हाथ में जल-अक्षत-कुशा-पुष्प-मुद्रा लेकर ब्रह्मांडीय समय (कल्प-मन्वंतर-युग) + अपना गोत्र-नाम-देश + अपनी मनोकामना बोलकर संकल्प मंत्र का उच्चारण करें। जल भूमि पर छोड़ दें।#रुद्राभिषेक संकल्प#ब्रह्मांडीय समय#गोत्र नाम
गणपति पूजन और संकल्परुद्राभिषेक से पहले गणेश पूजन कैसे करें?रुद्राभिषेक से पहले: घी का दीपक जलाएं → गुरु-कुलदेवता-माता-पिता स्मरण → गणपति अथर्वशीर्ष पाठ → 'ॐ गं गणपतये नमः' और गणेश गायत्री जप → लाल चंदन, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।#गणेश पूजन#गणपति अथर्वशीर्ष#दूर्वा मोदक
परिवार और सती-पार्वतीगणेश को 'प्रथम पूज्य' का वरदान क्यों मिला?शिव गणेश की ज्ञाननिष्ठा से प्रसन्न हुए → 'प्रथम पूज्य' का सर्वोच्च वरदान दिया। शिव पुराण: जब शक्ति और ज्ञान/बुद्धि के बीच संघर्ष हो — केवल शिव तत्त्व (परम चेतना) ही संतुलन स्थापित कर सकता है।#गणेश प्रथम पूज्य#ज्ञाननिष्ठा#शिव वरदान
कार्तिकेय और गणेश जन्मब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?ब्रह्मवैवर्त पुराण: पार्वती का 'पुण्यक व्रत' → विष्णु शिशु रूप में अवतरित → शनि की दृष्टि से मस्तक भस्म → विष्णु गरुड़ पर गजराज का मस्तक लाए।#गणेश जन्म#ब्रह्मवैवर्त पुराण#पुण्यक व्रत
कार्तिकेय और गणेश जन्मलिंग पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?लिंग पुराण: देवताओं ने दैत्यों के यज्ञों में विघ्न के लिए प्रार्थना की → शिव ने स्वयं दिव्य गजमुख स्वरूप प्रकट किया (हाथ में त्रिशूल और पाश) → विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों उपाधि दी।#गणेश जन्म#लिंग पुराण#विघ्नहर्ता
कार्तिकेय और गणेश जन्मपद्म पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?पद्म पुराण: पार्वती ने उबटन से हाथी मुख वाली प्रतिमा बनाई → गंगा जल में प्रवाहित किया → विशालकाय देवपुरुष (गांगेय) बन गया → ब्रह्मा जी ने 'गणेश' नाम दिया।#गणेश जन्म#पद्म पुराण#गंगा जल
कार्तिकेय और गणेश जन्मशिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?शिव पुराण: पार्वती ने उबटन से बालक बनाया → शिव रोके गए → शिव ने मस्तक काटा → पार्वती का क्रोध → नंदी हाथी का सिर लाए → शिव ने जोड़कर जीवित किया और 'गणपति' नाम दिया। हाथी मस्तक = परम ज्ञान, पूर्व मस्तक = अहंकार नाश।#गणेश जन्म#शिव पुराण#उबटन
कार्तिकेय और गणेश जन्मभगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।#कार्तिकेय जन्म#षडानन#कृत्तिका