विस्तृत उत्तर
कामदेव के भस्म होने की खबर सुनकर उनकी पत्नी रति मूर्छित हो गयीं। फिर रोती-चिल्लाती, भाँति-भाँतिसे करुणा करती हुई शिवजी के पास गयीं।
छन्द — 'जोगी अकंटक भए पति गति सुनत रति मुरुछित भई। रोदति बदति बहु भाँति करुना करति संकर पहिं गई। अति प्रेम करि बिनती बिबिध बिधि जोरि कर सन्मुख रही। प्रभु आसुतोष कृपाल सिव अबला निरखि बोले सही॥'
इसका अर्थ — योगी निष्कंटक हो गये, कामदेवकी स्त्री रति अपने पतिकी यह दशा सुनते ही मूर्छित हो गयी। रोती-चिल्लाती और भाँति-भाँतिसे करुणा करती हुई वह शिवजीके पास गयी। अत्यन्त प्रेमके साथ अनेकों प्रकारसे विनती करके हाथ जोड़कर सामने खड़ी हो गयी। शीघ्र प्रसन्न होनेवाले कृपालु शिवजी अबला (असहाय स्त्री) को देखकर सान्त्वना देनेवाले वचन बोले।





