विस्तृत उत्तर
कुम्भकर्ण और विभीषण रावण के भाई थे। तीनों पुलस्त्य ऋषि के कुल में उत्पन्न हुए।
बालकाण्ड में तीनों भाइयों की तपस्या और वरदान का वर्णन है — 'कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई॥'
इसका अर्थ — तीनों भाइयोंने अनेकों प्रकारकी बड़ी ही कठिन तपस्या की, जिसका वर्णन नहीं हो सकता।
ब्रह्माजी उनके उग्र तप देखकर प्रसन्न हुए और वर माँगने को कहा:
- ▸रावण ने माँगा — वानर और मनुष्य को छोड़कर किसी के भी मारे न मरें
- ▸कुम्भकर्ण ने माँगा — छः महीनों की नींद (ब्रह्माजी ने सरस्वती से बुद्धि फेर दी)
- ▸विभीषण ने माँगा — भगवान के चरणकमलों में निर्मल अनुराग (भक्ति)





