विस्तृत उत्तर
नहीं। यह एक व्यापक भ्रांति है। गरुड़ पुराण का प्रेतकल्प केवल मृत्यु से नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु दोनों से संबंधित है।
मृत्यु से संबंधित — हाँ, प्रेतकल्प में मृत्यु के स्वरूप, आत्मा की यात्रा, यमलोक, नरक, प्रेत-योनि और श्राद्ध-कर्म का विस्तृत वर्णन है। यही कारण है कि इसे मृत्यु के बाद 13 दिनों में सुनाया जाता है।
जीवन से भी संबंधित — प्रेतकल्प का अधिकांश संदेश जीवित व्यक्तियों के लिए है। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'कुछ लोगों में यह भ्रांत धारणा बनी है कि इस गरुड़पुराण को घर में नहीं रखना चाहिए। यह धारणा अत्यंत भ्रामक और अंधविश्वासयुक्त है।'
जीवन में उपयोग — दान कब और कैसे करें, किन कर्मों से नरक मिलता है, किन से स्वर्ग — यह सब जीवित मनुष्य के लिए मार्गदर्शन है।
आत्मज्ञान — प्रेतकल्प का अंतिम उपदेश आत्मज्ञान और परमात्मा-शरण है — जो जीवित व्यक्ति के लिए है।
संक्षेप में — प्रेतकल्प का अध्ययन जीवित के लिए मार्गदर्शन है और मृत के लिए कल्याण है।





