विस्तृत उत्तर
लेपभाज् पितृ वे उच्चतर पीढ़ियों के पूर्वज हैं जिन्हें प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड नहीं दिया जाता, बल्कि पिण्ड बनाते समय हाथ में लगा अन्न का लेप उनका भाग माना जाता है। मत्स्य पुराण और ब्रह्म पुराण के आधार पर पिता, पितामह और प्रपितामह पिण्डभाज् पितर हैं, जिन्हें प्रत्यक्ष पिण्ड दिया जाता है। चतुर्थ, पञ्चम और षष्ठ पीढ़ी, अर्थात वृद्ध-प्रपितामह आदि, लेपभाज् हैं। पिण्ड बनाते समय यजमान के हाथ में जो अन्न का लेप लगा रहता है, उसे दर्भ पर पोंछ दिया जाता है और वही इन तीन उच्चतर पीढ़ियों का भाग माना गया है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



