विस्तृत उत्तर
तुलसीदासजी ने रामचरितमानस के सात काण्डों को मानस सरोवर की सात सुन्दर सीढ़ियों (सोपानों) से तुलना की है।
चौपाई — 'सप्त प्रबंध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना॥'
इसका अर्थ — सात काण्ड (प्रबन्ध) ही इस मानस-सरोवरकी सुन्दर सात सीढ़ियाँ हैं, जिनको ज्ञानरूपी नेत्रोंसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है।
ये सात सोपान (सात काण्ड) हैं:
- 1बालकाण्ड
- 2अयोध्याकाण्ड
- 3अरण्यकाण्ड
- 4किष्किन्धाकाण्ड
- 5सुन्दरकाण्ड
- 6लंकाकाण्ड
- 7उत्तरकाण्ड
जैसे सरोवर में उतरने के लिये सीढ़ियाँ होती हैं, वैसे ही इन सात काण्डों के माध्यम से पाठक रामकथारूपी अमृत-सरोवर में क्रमशः उतरता जाता है।





