विस्तृत उत्तर
प्रतापभानु अगले जन्म में रावण (दशानन/लंकापति) बने।
बालकाण्ड में कहा — ब्राह्मणों के शाप के कारण प्रतापभानु और उसका सारा परिवार राक्षस कुल में उत्पन्न हुआ।
चौपाई — 'कामरूप खल जिनस अनेका। कुटिल भयंकर बिगत बिबेका। कृपा रहित हिंसक सब पापी। बरनि न जाहिं बिस्व परितापी॥'
इसका अर्थ — वे सब अनेकों जातिके, मनमाना रूप धारण करनेवाले, दुष्ट, कुटिल, भयङ्कर, विवेकरहित, निर्दयी, हिंसक, सब पापी और संसारभरको दुःख देनेवाले हुए; उनका वर्णन नहीं हो सकता।
दोहा — 'उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप। तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अधरूप॥'
अर्थ — यद्यपि वे पुलस्त्य ऋषिके पवित्र, निर्मल और अनुपम कुलमें उत्पन्न हुए, तथापि ब्राह्मणोंके शापके कारण वे सब पापरूप हुए।
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