विस्तृत उत्तर
रावण और राक्षसों के अत्याचार से पीड़ित होकर पृथ्वी ने गऊ (गाय) का रूप धारण किया ताकि देवताओं और मुनियों के समक्ष अपना दुख प्रकट कर सके। गाय हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र और करुणा का प्रतीक है — पृथ्वी ने इसी रूप में अपनी असहायता दिखाई।
देवता बैठकर विचार करने लगे कि प्रभुको कहाँ पावें। शिवजी ने कहा — 'हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना' — भगवान सर्वत्र व्यापक हैं, प्रेम से प्रकट होते हैं। ब्रह्माजी ने स्तुति की और भगवान ने अवतार का आश्वासन दिया।
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