विस्तृत उत्तर
रावण पुलस्त्य ऋषि के कुल में उत्पन्न हुआ। बालकाण्ड में कहा — 'उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप। तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अधरूप॥'
इसका अर्थ — यद्यपि वे पुलस्त्य ऋषिके पवित्र, निर्मल और अनुपम कुलमें उत्पन्न हुए, तथापि ब्राह्मणोंके शापके कारण वे सब पापरूप हुए।
पुराणों के अनुसार रावण का पिता विश्रवा (पुलस्त्य ऋषि का पौत्र/पुत्र) था। रामचरितमानस में विश्रवा का नाम सीधे नहीं आता, पर 'पुलस्त्यकुल' कहकर वंश स्पष्ट किया गया है। पुलस्त्य ऋषि ब्रह्माजी के मानसपुत्रों में से एक और सप्तर्षियों में से एक हैं — अत्यन्त पवित्र और श्रेष्ठ कुल।





