विस्तृत उत्तर
हिमवान की नगरी की स्त्रियों ने शिवजी की विचित्र बारात देखकर बड़ी व्याकुलता प्रकट की।
दोहा — 'समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं। बाल बुझाए बिबिध बिधि निडर होहु डरु नाहिं॥'
इसका अर्थ — महेश्वर (शिवजी) के समाजको समझकर (जानकर) सब माता-पिता मुस्कुराते हैं और बच्चोंको अनेकों प्रकारसे समझाते हैं — निडर हो जाओ, डरो मत।
परन्तु माता मैना (पार्वतीजी की माता) ने बारात देखकर बहुत दुख प्रकट किया। वे विलाप करने लगीं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





