विस्तृत उत्तर
विभीषण ने ब्रह्माजी से भगवान के चरणकमलों में निर्मल अनुराग (भक्ति) का वरदान माँगा।
दोहा — 'गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु। तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु॥'
इसका अर्थ — फिर ब्रह्माजी विभीषणके पास गये और कहा — हे पुत्र! वर माँगो। उसने (विभीषण ने) भगवान्के चरणकमलोंमें निर्मल अनुराग (भक्ति) माँगा।
तीनों भाइयों के वरदानों में विभीषण का वरदान सबसे श्रेष्ठ था:
- ▸रावण ने अमरत्व (भौतिक शक्ति) माँगा
- ▸कुम्भकर्ण ने नींद (बुद्धि भ्रम से) माँगी
- ▸विभीषण ने भगवान की भक्ति माँगी
इसी कारण विभीषण धर्मात्मा बने, रामजी की शरण में आये और अन्त में लंका का राज्य पाया।





