ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

श्रीलिङ्गमहापुराण प्रश्नोत्तरी — 578 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीलिङ्गमहापुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 578 प्रश्न

उपसर्ग और सिद्धियाँ

आस्वाद सिद्धि क्या है?

दिव्य रसों का सहज और यथार्थ ज्ञान होना आस्वाद सिद्धि है।

आस्वाद सिद्धिदिव्य रसरस ज्ञान
उपसर्ग और सिद्धियाँ

दर्शना सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास दिव्य रूपों का नेत्रेन्द्रिय से दिखाई पड़ना दर्शना सिद्धि है।

दर्शना सिद्धिदिव्य रूपनेत्रेन्द्रिय
उपसर्ग और सिद्धियाँ

वेदना सिद्धि क्या है?

स्पर्श की अनुभूति को वेदना सिद्धि कहा गया है।

वेदना सिद्धिस्पर्शअनुभूति
उपसर्ग और सिद्धियाँ

श्रवणा सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास सभी शब्द, स्वर और गुह्य ध्वनि सुनकर उनका यथार्थ ज्ञान होना श्रवणा सिद्धि है।

श्रवणा सिद्धिशब्द ज्ञानस्वर
उपसर्ग और सिद्धियाँ

प्रतिभा सिद्धि क्या है?

भूत, भविष्य, सूक्ष्म, अदृष्ट, दूरस्थ और समीप पदार्थों का ज्ञान देने वाली वृत्ति प्रतिभा सिद्धि कही गई है।

प्रतिभा सिद्धिभूत भविष्य ज्ञानसूक्ष्म ज्ञान
उपसर्ग और सिद्धियाँ

योग साधना में उपसर्ग क्या होते हैं?

विघ्नों के हट जाने के बाद योगसाधना में जो नाना उपद्रव उत्पन्न होते हैं, वे उपसर्ग हैं और असिद्धिसूचक कहे गए हैं।

उपसर्गयोग साधनासिद्धियाँ
योग बाधाएँ

योग की बाधाएं कैसे दूर होती हैं?

अत्यन्त उत्साह से अभ्यास करने वाले साधक की योग बाधाएँ दूर हो जाती हैं।

योग बाधाअभ्यासउत्साह
योग बाधाएँ

विषयलोलता योग में बाधा क्यों है?

योग्य-अयोग्य जानते हुए भी अयोग्य विषयों में हठपूर्वक आसक्ति रखना विषयलोलता है, इसलिए यह योग में बाधा है।

विषयलोलताअयोग्य विषययोग बाधा
योग बाधाएँ

दौर्मनस्य क्या है?

तमोगुण और रजोगुण से मिले मन में उत्पन्न दूषित भाव दौर्मनस्य है; इसे परम वैराग्य से नियंत्रित करना चाहिए।

दौर्मनस्यदुर्मनतमोगुण
योग बाधाएँ

तीन प्रकार के दुःख कौन से हैं?

तीन प्रकार के सहज दुःख आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक बताए गए हैं।

त्रिविध दुःखआध्यात्मिकआधिभौतिक
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

भ्रान्तिदर्शनविपरीत ज्ञानअनात्म
योग बाधाएँ

योग में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

योग के साधन, साध्य, गुरु, ज्ञान, आचार और शिव में श्रद्धा न होना अश्रद्धा है, जो योग में बाधा बनती है।

श्रद्धाअश्रद्धागुरु
योग बाधाएँ

चित्त का लक्ष्य में न ठहरना क्या कहलाता है?

समाधि अवस्था पाकर भी भवबन्धन के कारण चित्त का लक्ष्य में न ठहरना अनवस्थितचित्तत्व कहलाता है।

अनवस्थित चित्तचित्तसमाधि
योग बाधाएँ

योग करते समय संशय क्यों होता है?

यह करूँ या वह करूँ, ऐसी अनिश्चित बुद्धि स्थानसंशय कहलाती है और योग में बाधा बनती है।

संशयस्थानसंशयअनिश्चितता
योग बाधाएँ

प्रमाद योग में बाधा कैसे बनता है?

समाधि के साधनों का अनुष्ठान न करना प्रमाद है, इसलिए यह योग में बाधा बनता है।

प्रमादसमाधि साधनयोग बाधा
योग बाधाएँ

योग साधना में व्याधि का क्या मतलब है?

धातुवैषम्य, क्रिया से उत्पन्न विकार और वात-पित्त आदि दोषों से होने वाले विकार व्याधि कहे गए हैं।

व्याधिधातुवैषम्यवात पित्त
योग बाधाएँ

योग में आलस्य क्यों आता है?

शरीर और चित्त के भारीपन के कारण योग में प्रवृत्ति न होना आलस्य कहा गया है।

आलस्ययोग बाधाशरीर भारीपन
योग बाधाएँ

योग साधना में कौन-कौन सी बाधाएं आती हैं?

योग साधना में आलस्य, व्याधि, प्रमाद, संशय, चित्त की अनवस्थिति, अश्रद्धा, भ्रान्तिदर्शन, श्रान्ति, त्रिविध दुःख, दौर्मनस्य और विषयासक्ति जैसी बाधाएँ बताई गई हैं।

योग बाधाआलस्यव्याधि
योगसिद्धि

योग साधना के विघ्न कैसे दूर होते हैं?

योग-साधना के विघ्न निरंतर अभ्यास और गुरु के सान्निध्य से दूर होते हैं।

योग साधनाविघ्नअभ्यास
योगसिद्धि

योगसिद्धि जल्दी या देर से क्यों मिलती है?

पूर्वजन्म का योगाभ्यासी साधक योगसिद्धि जल्दी पाता है, नवीन साधक को विलम्ब से प्राप्त होती है।

योगसिद्धिपूर्वजन्मयोगाभ्यास
कुम्भक और ऐक्य

धारणा, ध्यान और समाधि की गणना कैसे बताई गई है?

बारह प्राणायामों की एक धारणा, बारह धारणाओं का एक ध्यान और बारह ध्यानों की एक समाधि कही गई है।

धारणाध्यानसमाधि
कुम्भक और ऐक्य

ईश्वर और जीव का ऐक्य कैसे प्राप्त होता है?

केवल कुम्भक में समरस होकर हृदय में शिव का ध्यान करने से साधक ईश्वर और जीव के ऐक्य को प्राप्त करता है।

ईश्वर जीव ऐक्यसमरसताकुम्भक
कुम्भक और ऐक्य

कुम्भक के साथ शिव ध्यान कैसे किया जाता है?

सुषुम्णा मार्ग से 12, 24 और 36 मात्रात्मक कुम्भक द्वारा शंकर का ध्यान करना बताया गया है।

कुम्भकमन्द कुम्भकमध्यम कुम्भक
शिव ध्यान

शिव का ध्यान करते समय उनका स्वरूप कैसा माना गया है?

शिव को निर्मल, अवयवरहित, ब्रह्मरूप, शान्त, ज्ञानस्वरूप, अनिर्देश्य, सूक्ष्म, मोक्षस्वरूप, अमृतस्वरूप और परात्पर माना गया है।

शिव स्वरूपनिर्मलब्रह्मरूप

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।