ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

विधि — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 185 प्रश्न

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पूजा विधि

हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

हनुमान पूजा में: स्नान, लाल वस्त्र, सिंदूर लेपन, चमेली तेल का दीप, 21 लाल गुड़हल, गुड़-चना भोग, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप, हनुमान चालीसा पाठ और आरती करें। मंगलवार-शनिवार को सिंदूर का चोला अर्पण विशेष फलदायी है।

हनुमान पूजाविधिसिंदूर
पूजा विधि

गणेश पूजा विधि क्या है?

गणेश पूजा में पंचामृत स्नान, सिंदूर, 21 दूर्वा, लाल पुष्प, जनेऊ अर्पण, 21 मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप और आरती करें। पूजा में तुलसी वर्जित है। बुधवार और चतुर्थी तिथि सर्वश्रेष्ठ है।

गणेश पूजाविधिषोडशोपचार
व्रत विधि

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा कैसे करें?

शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर, लक्ष्मी जी को कमल-गुलाब अर्पित करें, सिंदूर-कुमकुम लगाएं, श्री सूक्त पाठ करें और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करें। वैभवलक्ष्मी व्रत 11 या 21 शुक्रवार तक करें।

शुक्रवार व्रतशुक्रवार पूजालक्ष्मी व्रत
पूजा विधि

लक्ष्मी पूजन की सही विधि क्या है?

लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी ध्यान, पंचामृत स्नान, पीत वस्त्र, सिंदूर-कुमकुम, कमल-गुलाब, श्री सूक्त पाठ, 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप और आरती करें। शुक्रवार प्रदोष काल में यह पूजा सर्वाधिक फलदायी है।

लक्ष्मी पूजनविधिषोडशोपचार
पूजा विधि

काली पूजा की सही विधि क्या है?

काली पूजा दीपावली रात, अमावस्या या नवरात्रि सप्तमी को करें। सरसों का दीप, 108 लाल गुड़हल, सिंदूर, खीर का भोग, काली ध्यान श्लोक, 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप और आरती — यह पूर्ण विधि है।

काली पूजादीपावलीविधि
साधना विधि

काली साधना कैसे की जाती है?

काली साधना भक्ति मार्ग और तंत्र मार्ग से होती है। अमावस्या की रात दक्षिण मुख करके बैठें, सरसों का दीप जलाएं, लाल गुड़हल अर्पित करें और 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप करें। उच्च तांत्रिक साधना गुरु दीक्षा के बाद ही करें।

काली साधनामहाकालीविधि
पूजा विधि

दुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?

ईशान कोण में देवी प्रतिमा स्थापित करें। आचमन, संकल्प, पंचोपचार पूजन (जल, चंदन, सिंदूर, लाल फूल, भोग), नवार्ण मंत्र जप, देवी सूक्त पाठ और आरती करें। नवरात्रि में अखंड दीप और नवमी को कन्या पूजन अनिवार्य है।

घर पर पूजादुर्गा पूजाविधि
साधना विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके बैठें, रुद्राक्ष माला से नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का 108 बार जप करें। तर्जनी माला को न छुए। नवरात्रि में 1008 बार जप विशेष फलदायी है।

मंत्र जपदुर्गा मंत्रविधि
पाठ नियम

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला, कीलक और नवार्ण मंत्र अनिवार्य है। स्नान करें, लाल आसन पर बैठें, पुस्तक भूमि पर न रखें, शुद्ध उच्चारण करें और एक बार शुरू करें तो पूरा करें।

चंडी पाठ नियमविधिनियम
साधना विधि

दुर्गा साधना कैसे करें?

दुर्गा साधना में ब्रह्ममुहूर्त में लाल आसन पर बैठकर, नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) का 108 बार जप, सप्तशती पाठ और आरती करें। नवरात्रि में 9 दिन व्रत, अखंड दीप और कन्या पूजन विशेष महत्व का है।

दुर्गा साधनाउपासनानवरात्रि साधना
नवरात्रि विधि

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि प्रतिपदा को जौ बोकर, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें। पाँच आम पत्ते मुख पर रखें, नारियल ऊपर स्थापित करें। ईशान कोण में रखें और 'ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से स्थापना करें।

कलश स्थापनानवरात्रिघट स्थापना
पाठ नियम

दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम क्या हैं?

सप्तशती पाठ के नियम: स्नान, ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन, लाल/पीत वस्त्र, एक बार शुरू करें तो पूरा करें, बीच में न उठें, शुद्ध उच्चारण करें। नवरात्रि में लहसुन-प्याज-मांस वर्जित है। पुस्तक भूमि पर न रखें।

सप्तशती नियमपाठ नियमविधि
पूजा विधि

शिव जी की आरती कैसे करें?

शिव जी की आरती पंचमुखी दीप या घी के दीप से, 'ओम जय शिव ओंकारा' के गायन के साथ, दक्षिणावर्त 7 बार घुमाते हुए करें। शंख-घंटा बजाएं और अंत में दीप की लौ आँखों से लगाएं।

आरतीशिव आरतीविधि
स्थापना विधि

शिवलिंग की स्थापना कैसे करें?

ईशान कोण में, शुभ मुहूर्त में, पंचामृत स्नान कराकर, पंडित जी से प्राण प्रतिष्ठा करवाकर शिवलिंग स्थापित करें। जलहरी का मुख उत्तर में हो और शिवलिंग का आकार गृह पूजा के लिए अंगूठे जितना उचित है।

शिवलिंग स्थापनाप्रतिष्ठागृह पूजा
साधना विधि

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

कुश आसन पर पूर्व/उत्तर दिशा में बैठकर, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। तर्जनी से माला न स्पर्श करें। जप के बाद दशांश हवन करें।

महामृत्युंजय जपविधिसाधना
व्रत विधि

सोमवार व्रत करने का सही तरीका क्या है?

सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके शिव पूजा करें — जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जप करें। दिन में एक बार फलाहार लें, नमक का त्याग करें और सायंकाल व्रत कथा सुनें।

सोमवार व्रतशिव व्रतउपवास
अभिषेक विधि

रुद्राभिषेक करने की सही विधि क्या है?

रुद्राभिषेक में श्री रुद्रम् पाठ के साथ शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, नारियल जल से क्रमशः अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, विभूति अर्पण और आरती की जाती है।

रुद्राभिषेकअभिषेकशिव पूजा
मंत्र विधि

मंत्र जप में संकल्प का क्या महत्व है?

संकल्प = उद्देश्य + प्रतिज्ञा। 'संकल्पमूलो हि कामः' — सभी कर्म संकल्प मूल। बोलें: काल, स्थान, नाम, गोत्र, मंत्र, संख्या, उद्देश्य। क्यों: एकाग्रता, ऊर्जा निर्देशन, प्रतिबद्धता, पूर्ण फल। निष्काम: 'ईश्वर प्रीत्यर्थे' = सर्वोच्च।

संकल्पउद्देश्यविधि
हवन/यज्ञ

महामृत्युंजय हवन की विधि और सामग्री क्या है?

'ॐ त्र्यम्बकं...स्वाहा'। सामग्री: घी+तिल+जौ+दूर्वा+बिल्व+धतूरा+चंदन। 1,25,000 (पूर्ण) / 108 (सरल)। कब: रोग, दुर्घटना, शनि, दीर्घायु। श्वेत, रुद्राक्ष। पुरोहित=अनुशंसित।

महामृत्युंजयहवनविधि
ध्यान साधना

ध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें?

ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है।

ध्यानपरिभाषाविधि
गीता अध्ययन

भगवद गीता का पाठ कैसे करें?

गीता का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात, शांत मन से, श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। पहले महात्म्य पढ़ें, फिर श्लोकों का अर्थ समझते हुए क्रमशः अध्याय 1 से 18 तक पाठ करें और ज्ञान को जीवन में उतारें।

गीता पाठविधिनियम
मंदिर ज्ञान

मंदिर में चरणामृत पीने की सही विधि क्या है?

दाहिने हाथ (कुप्पी मुद्रा), तुरंत पिएं, शेष शिर पर। बायां वर्जित। तुलसी+जल+चंदन+कपूर। शिर/बालों में फेरें। पंचामृत: दूध+दही+घी+शहद+शक्कर। तुलसी = antibacterial।

चरणामृतपीनेविधि
तंत्र साधना

तंत्र में होम और हवन की विशेष विधि क्या है?

कुंड: त्रिकोण(शक्ति)/वर्ग(शिव)/गोल(विष्णु)। देवता अनुसार सामग्री। मंत्र+'स्वाहा'+घी। दशांश (जप÷10)। पूर्णाहुति (नारियल)। अग्नि=देवमुख। तांत्रिक: यंत्र समक्ष, बीज, रात्रि।

होमहवनतांत्रिक
दशमहाविद्या

बगलामुखी मंत्र का जप कैसे करें और कितनी बार?

'ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः'। 108 दैनिक, सवा लाख अनुष्ठान। हल्दी माला। पीला: आसन/वस्त्र/फूल। मंगलवार/शनिवार। गुरु दीक्षा अनुशंसित। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य।

बगलामुखीमंत्रजप

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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