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तिथि

पूर्णिमा तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(38)

पूर्णिमा तिथि से जुड़े 38 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

तिथि शास्त्र

पूर्णिमा को कौन से काम शुभ?

पूर्णिमा=पूर्ण चंद्र। शुभ: सत्यनारायण, व्रत, दान, पूजा, गंगा स्नान, तीर्थ। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। भक्ति+दान+साधना दिन।

#पूर्णिमा#शुभ#व्रत
देवी पूजा नियम

देवी की पूजा पूर्णिमा को करें या अमावस्या को?

सौम्य (लक्ष्मी/सरस्वती) = पूर्णिमा। उग्र (काली/छिन्नमस्ता) = अमावस्या। सर्वोत्तम = अष्टमी/नवमी। नवरात्रि 9 दिन। दीपावली अमावस्या = काली+लक्ष्मी दोनों।

#पूर्णिमा#अमावस्या#देवी
शिव पूजा नियम

शिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।

#अमावस्या#पूर्णिमा#श्रेष्ठ
लोक

अष्टमी पर पूर्णिमा पितर का श्राद्ध कर सकते हैं?

हाँ, छूटने पर अष्टमी विकल्प है।

#पूर्णिमा#अष्टमी#श्राद्ध विकल्प
लोक

पूर्णिमा श्राद्ध छूट जाए तो क्या करें?

अष्टमी, द्वादशी या अमावस्या पर कर सकते हैं।

#पूर्णिमा श्राद्ध#अष्टमी#अमावस्या
शुभ मुहूर्त

माँ त्रिपुर सुंदरी की साधना कब करनी चाहिए?

माँ त्रिपुर सुंदरी साधना का शुभ काल: शुक्रवार = विशेष शुभ। गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा भी उपयुक्त। अन्य शुभ तिथियों पर भी साधना की जा सकती है।

#त्रिपुर सुंदरी मुहूर्त#शुक्रवार#गुप्त नवरात्रि
पाठ विधि और नियम

चन्द्रदोष निवारण के लिए कौन सी दिशा में बैठकर पाठ करें?

चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में मुख करके पाठ करें — विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में यह विशेष लाभकारी है।

#चन्द्रदोष दिशा#उत्तर दिशा#वायव्य
पाठ विधि और नियम

चन्द्रदोष निवारण के लिए चन्द्रशेखराष्टकम् कब पढ़ें?

चन्द्रदोष निवारण के लिए सोमवार प्रदोष काल, पूर्णिमा, महाशिवरात्रि और श्रावण सोमवार पर चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ विशेष फलदायी है।

#चन्द्रदोष निवारण#पूर्णिमा#सोमवार
पाठ विधि और नियम

चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?

चन्द्रशेखराष्टकम् सोमवार को प्रदोष काल में करें। विशेष फल के लिए पूर्णिमा, महाशिवरात्रि और श्रावण मास के सोमवार पर पाठ करें।

#पाठ समय#प्रदोष काल#सोमवार
काल निर्णय

सत्यनारायण पूजा के लिए सबसे शुभ दिन (तिथि) कौन सा है?

सत्यनारायण पूजा के लिए 'पूर्णिमा' (पूर्णमासी) का दिन सबसे शुभ माना जाता है। वह दिन चुनना चाहिए जब शाम के समय (गोधूलि बेला) पूर्णिमा तिथि मौजूद हो।

#पूर्णिमा#प्रदोष व्यापिनी#तिथि निर्णय
विशिष्ट पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का क्या महत्व है?

इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इसे देव दीपावली कहते हैं। इस दिन दीप दान करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है।

#कार्तिक पूर्णिमा#देव दीपावली#त्रिपुरी पूर्णिमा
विशिष्ट पूर्णिमा

वट सावित्री व्रत किस पूर्णिमा को होता है?

ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत होता है। इसमें महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं।

#वट पूर्णिमा#ज्येष्ठ पूर्णिमा#सावित्री व्रत
विशिष्ट पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा पर रात में खीर क्यों रखते हैं?

मान्यता है कि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत बरसाता है। चांदनी में रखी खीर में वह औषधीय अमृत समा जाता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है।

#शरद पूर्णिमा#कोजागरी पूर्णिमा#अमृत वर्षा
विशिष्ट पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। यह महर्षि वेदव्यास का जन्मदिन है और इसी दिन से सन्यासी अपना चातुर्मास शुरू करते हैं।

#गुरु पूर्णिमा#आषाढ़ पूर्णिमा#वेदव्यास जन्म
उद्यापन और दान

पूर्णिमा के दिन क्या दान करना चाहिए?

महीने के हिसाब से दान करें- वैशाख की गर्मी में पंखा/जल, कार्तिक में दीप और कंबल, आषाढ़ में अन्न और माघ की सर्दी में तिल व ऊनी कपड़े दान करने चाहिए।

#पूर्णिमा दान#मत्स्य पुराण#अक्षय पुण्य
व्रत का महत्व

पूर्णिमा के व्रत का वैज्ञानिक कारण क्या है?

पूर्णिमा पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से शरीर के अंदर पानी का दबाव बढ़ता है जिससे गुस्सा और बेचैनी आती है। उपवास रखने से शरीर का पानी कंट्रोल में रहता है और मन शांत होता है।

#वैज्ञानिक कारण#ज्वारीय प्रभाव#मानसिक संतुलन
पूजा विधि

पूर्णिमा के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, पानी, सफेद फूल, चंदन और चावल मिलाकर चंद्रमा को चढ़ाएं। इसके बाद ही प्रसाद खाकर व्रत खोलें।

#चंद्र अर्घ्य#अर्घ्य मंत्र#पारण
पूजा विधि

पूर्णिमा व्रत की पूजा कैसे करें?

सुबह तिल और आंवले के जल से नहाकर संकल्प लें। शाम को कलश स्थापित कर भगवान सत्यनारायण की 16 तरीकों से पूजा करें, कथा पढ़ें और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

#सत्यनारायण पूजा#संकल्प#षोडशोपचार
नियम और निषेध

पूर्णिमा के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

सभी अनाज (गेहूं, चावल), दालें, प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, बैंगन और लौकी नहीं खानी चाहिए। मसूर की दाल खाना शास्त्रों में सख्त मना है।

#वर्जित भोजन#अनाज निषेध#तामसिक भोजन
आहार और नियम

पूर्णिमा के व्रत में क्या खाना चाहिए?

व्रत में फल, आलू, शकरकंद, साबूदाना, कुट्टू, दूध, दही और घी खा सकते हैं। नमक में केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

#फलाहार#सेंधा नमक#व्रत का भोजन
व्रत नियम और संकल्प

पूर्णिमा का व्रत किस दिन रखें? (तिथि का नियम)

व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पूर्णिमा हो। अगर पहले दिन शाम को पूर्णिमा है और अगले दिन शाम से पहले खत्म हो रही है, तो व्रत पहले दिन ही रखा जाएगा।

#प्रदोष व्यापिनी#तिथि निर्णय#व्रत का दिन
व्रत नियम और संकल्प

पूर्णिमा का व्रत कितने दिन रखना चाहिए?

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार संकट टालने और मनोकामना पूरी करने के लिए लगातार 32 पूर्णिमा तक व्रत रखने का नियम बताया गया है।

#32 पूर्णिमा#व्रत अवधि#धनेश्वर ब्राह्मण
व्रत का महत्व

पूर्णिमा का व्रत क्यों किया जाता है?

यह व्रत मानसिक शांति, मनोकामनाओं की पूर्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए किया जाता है। कलयुग में भगवान सत्यनारायण की कृपा पाने के लिए यह सबसे उत्तम व्रत है।

#पूर्णिमा व्रत#सत्यनारायण#मानसिक शांति
पूजा विधान और नियम

पूर्णिमा की रात्रि में सोमानंदीश्वर शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक का क्या तांत्रिक और शास्त्रीय महत्त्व है?

पूर्णिमा की रात्रि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन और चंद्र-तत्त्व की पूर्णता का समय है। तंत्र-शास्त्रों के अनुसार इस रात्रि यहाँ कच्चे दूध से अभिषेक करने पर अनिद्रा, अवसाद और अज्ञात भय दूर होते हैं।

#पूर्णिमा साधना#दुग्धाभिषेक#तांत्रिक महत्त्व
पर्व

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं क्या

हाँ (मान्यता + कुछ शोध)। गीता 15.13: चन्द्रमा औषधि पोषक। 16 कलाओं से पूर्ण। BHU: लैक्टिक अम्ल+स्टार्च चन्द्रकिरण अवशोषित। आयुर्वेद: शरद पित्त+चन्द्र शीतल=पित्तशामक। काशी: अस्थमा औषधि। बड़े clinical trials नहीं, खीर=पौष्टिक+शीतल।

#शरद पूर्णिमा#चन्द्र किरणें#औषधि
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा में क्या देनी चाहिए

गुरु दक्षिणा: यथाशक्ति धन (₹101/501/1001), वस्त्र, फल-मिठाई, पुस्तकें, गौदान, स्वर्ण। सर्वोत्तम = गुरु सेवा + आज्ञा पालन + शिक्षा अभ्यास। 'विना दक्षिणा विद्या निष्फल'। राशि गौण, कृतज्ञता प्रधान।

#गुरु पूर्णिमा#दक्षिणा#गुरु
ध्यान अनुभव

पूर्णिमा की रात ध्यान करने का क्या विशेष लाभ है?

पूर्णिमा ध्यान: चन्द्र ऊर्जा चरम (मन शांत), सत्त्व प्रधान, पिनियल ग्रंथि (मेलाटोनिन), भावनात्मक शुद्धि (ज्वार-भाटा), बुद्ध=पूर्णिमा बोधि। शरद/गुरु/बुद्ध पूर्णिमा=सर्वश्रेष्ठ।

#पूर्णिमा#ध्यान#चन्द्रमा
त्योहार पूजा

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या महत्व है?

16 कला: अमृता से पूर्णामृता तक=पूर्णतम चन्द्रमा, अमृत वर्षा (खीर चाँदनी में), कोजागरी लक्ष्मी ('को जागर्ति?'=जागने वाले को कृपा), पित्त शांति (आयुर्वेद), कृष्ण महारास (भागवत)। खीर+जागरण+लक्ष्मी पूजा।

#शरद पूर्णिमा#16 कला#चंद्रमा
त्योहार पूजा

गुरु पूर्णिमा पर चप्पल क्यों नहीं पहनते?

चप्पल नहीं: गुरु सम्मान (विनम्रता), पृथ्वी=गुरु चरण (अपमान न हो), तप (कष्ट=गुरु सेवा), Earthing, अहंकार त्याग। कठोर नियम नहीं — भावना महत्वपूर्ण। 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...'

#गुरु पूर्णिमा#चप्पल#नंगे पैर
व्रत विधि

पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?

सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।

#सत्यनारायण#पूर्णिमा#विष्णु
तंत्र साधना

तंत्र में पूर्णिमा और अमावस्या की साधना में क्या भेद है

पूर्णिमा = सौम्य/सात्विक: प्रकाश, शान्ति, ज्ञान, विष्णु/लक्ष्मी/गुरु। अमावस्या = उग्र/तामसिक: अन्धकार, गोपनीय शक्ति, काली/भैरव, पितृ। दीपावली = सबसे शक्तिशाली अमावस्या। पूर्णिमा = सभी, अमावस्या = उन्नत/दीक्षित। दोनों में सात्विक जप-ध्यान शुभ।

#पूर्णिमा#अमावस्या#तंत्र
पर्व

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों का क्या विशेष प्रभाव है

शरद पूर्णिमा चन्द्र प्रभाव: (1) 16 कलाओं से पूर्ण — अन्य पूर्णिमाओं में नहीं। (2) गीता 15.13: 'सोमो भूत्वा रसात्मकः' — अमृत वर्षा। (3) आयुर्वेद: पित्त शमन, औषधि निर्माण। (4) BHU शोध: लैक्टिक अम्ल + स्टार्च चन्द्रकिरणें अवशोषित करते हैं। (5) पेरिजी + स्वच्छ वातावरण = तीव्र किरणें। अस्थमा, नेत्र, चर्म लाभ।

#शरद पूर्णिमा#चन्द्रमा#अमृत वर्षा
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजा का क्या विधान है

व्यास पूजा: आषाढ़ पूर्णिमा। व्यास पीठ → चित्र/पादुका स्थापित → गणपति पूजन → व्यास पूजन → गुरु परम्परा (ब्रह्मा से गुरु तक) → 'गुरुर्ब्रह्मा...' मंत्र → गुरु गीता पाठ → दक्षिणा। व्यास = वेद विभाजक, आदि गुरु। चातुर्मास साधना आरम्भ।

#गुरु पूर्णिमा#व्यास पूजा#वेदव्यास
पर्व

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा का क्या कारण है

शरद पूर्णिमा खीर: (1) चन्द्रमा सोलह कलाओं में पूर्ण — अमृत वर्षा। (2) आयुर्वेद: शरद में पित्त बढ़ता है, चन्द्र किरण + खीर = शीतल, पित्तशामक। (3) भागवत: कृष्ण रासलीला रात्रि। (4) कोजागरी: लक्ष्मी जागने वालों को धन देती हैं। चाँदनी में रखकर प्रातः प्रसाद।

#शरद पूर्णिमा#खीर#चन्द्रमा
पर्व

गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा कैसे करें

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा = व्यास जन्मदिन। गुरु/व्यास पादुका पूजा → 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जप → गुरु गीता पाठ → चरण स्पर्श → दक्षिणा → विद्वान भोजन। गुरु = ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप।

#गुरु पूर्णिमा#व्यास पूजा#गुरु
व्रत

पूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करें

पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।

#पूर्णिमा#व्रत#चन्द्र
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों करते हैं

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों: (1) स्कन्द पुराण में शुक्ल पक्ष/पूर्णिमा विधान। (2) पूर्णिमा = विष्णु की तिथि, पूर्णता-सम्पन्नता प्रतीक। (3) शुक्ल पक्ष चरम = सर्वाधिक शुभ। (4) मासिक नियमितता सुविधाजनक। अन्य दिन भी मान्य: एकादशी, संक्रान्ति, शुभ अवसर।

#सत्यनारायण#पूर्णिमा#विष्णु
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में कलश स्थापना कैसे करें

कलश स्थापना: चौकी पर अक्षत → ताँबे का कलश → शुद्ध जल + गंगाजल + तुलसी + दूर्वा + सुपारी + सिक्का → 'कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से पूजन → 5 आम पत्ते मुख पर → नारियल (रोली-चन्दन-मौली सहित) ऊपर → कलश के गले में मौली। कलश = ब्रह्माण्ड का प्रतीक।

#सत्यनारायण#कलश स्थापना#विष्णु
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
सभी पर्व देखें

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।