गणेश पूजागणेश जी की पूजा से बुद्धि कैसे बढ़ती है?गणेश = ज्ञानमय (अथर्वशीर्ष)। स्वरूप: बड़ा सिर=बुद्धि, बड़े कान=ज्ञान ग्रहण, एक दांत=एकाग्रता। मूलाधार चक्र अधिपति → कुण्डलिनी → बुद्धि चक्र सक्रिय। बुध ग्रह संबंधित → बुद्धि कारक। उपाय: 108 जप, दूर्वा, अथर्वशीर्ष, बुधवार व्रत।#बुद्धि#गणेश#विद्या
दिव्यास्त्रअश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान कहाँ से मिला?अश्वत्थामा को पर्जन्यास्त्र का ज्ञान अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य से प्राप्त हुआ था। यह उनके विशाल दिव्यास्त्र संग्रह का हिस्सा था।#अश्वत्थामा
दिव्यास्त्रद्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र कहाँ से मिला?द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र की शिक्षा महर्षि अग्निवेश से प्राप्त हुई थी। यह ज्ञान आगे द्रोणाचार्य से अर्जुन और अश्वत्थामा तक पहुंचा।#द्रोणाचार्य#आग्नेयास्त्र#महर्षि अग्निवेश
शिव रूपदक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।#दक्षिणामूर्ति#गुरु#ज्ञान
ध्यान साधनाध्यान में चिन मुद्रा और ज्ञान मुद्रा में क्या अंतर है?हथेली ऊपर = ज्ञान (ग्रहण/expansive)। नीचे = चिन (संरक्षण/grounding)। दोनों: अंगूठा+तर्जनी = आत्मा+जीव मिलन। जो comfortable = वही।#चिन#ज्ञान#मुद्रा
ध्यान सिद्धिध्यान से भविष्य का ज्ञान प्राप्त होता है क्या?हां — पतंजलि (3.16): 'परिणाम संयम=भविष्य ज्ञान।' (3.33): 'प्रातिभ से सब।' Intuition↑ = 'पहले पता।' किन्तु: 100%≠, 'सिद्धि=बाधा', Wisdom>prediction। मोक्ष=लक्ष्य।#भविष्य#ज्ञान#ध्यान
उपनिषदउपनिषद क्या हैं?उपनिषद = गुरु के समीप बैठकर प्राप्त ब्रह्मज्ञान। वेद का अंतिम व उच्चतम भाग — इसीलिए 'वेदांत'। विषय: ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष, माया। गीता + ब्रह्मसूत्र + उपनिषद = प्रस्थानत्रयी। ज्ञान प्रधान, कर्मकांड गौण।#उपनिषद#वेदांत#ब्रह्म
वेद ज्ञानवेदों का महत्व क्या है?वेद धर्म का मूल ('वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — मनुस्मृति)। विश्व का सर्वप्राचीन ज्ञान। खगोल, आयुर्वेद, गणित, दर्शन सब समाहित। चार पुरुषार्थों का मार्गदर्शक। परलौकिक उपाय केवल वेद से जाना जाता है। सभी दर्शन, उपनिषद, पुराण वेद पर आधारित।#वेद#महत्व#सनातन धर्म
वेद ज्ञानवेद क्या हैं?वेद = संस्कृत 'विद्' धातु से — अर्थ है ज्ञान। अपौरुषेय (ईश्वरप्रदत्त), मनुष्यरचित नहीं। ऋषियों ने सुना/देखा — इसीलिए 'श्रुति'। चार वेद: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। प्रत्येक में संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद — चार भाग। सर्वोच्च प्रमाण।#वेद#श्रुति#अपौरुषेय
यंत्र साधनासरस्वती यंत्र विद्या प्राप्ति में कैसे सहायक है?एकाग्रता (focus), 'ऐं' बीज (बुद्धि+स्मरण), ऊर्जा क्षेत्र (सात्विक)। बसंत पंचमी/बुधवार। अध्ययन कक्ष। 108 'ऐं' + दीपक। परीक्षा: 108 'ॐ ऐं' + 5 मिनट ध्यान।#सरस्वती#यंत्र#विद्या
श्रद्धा और शिवदर्शनश्रद्धा को परम सूक्ष्म धर्म क्यों कहा गया है?श्रद्धा ज्ञान, हवन, तप, स्वर्ग और मोक्ष का फल देती है, इसलिए उसे परम सूक्ष्म धर्म कहा गया है।#श्रद्धा#परम सूक्ष्म धर्म#ज्ञान
शिवभक्तिशिवभक्ति पाने के साधन कौन-कौन से हैं?ज्ञान, अध्यापन, होम, ध्यान, यज्ञ, तप, वेद, दान और अध्ययन शिवभक्ति प्राप्त करने के साधन बताए गए हैं।#शिवभक्ति#ज्ञान#अध्यापन
ज्ञान और भक्तिशिव किस ज्ञान और भक्ति से प्रसन्न होते हैं?जड़ जगत से ईश्वर को पृथक जानने वाले ज्ञान और श्रद्धायुक्त भक्ति से शिव प्रसन्न होते हैं।#शिव प्रसन्नता#ज्ञान#भक्ति
मुक्ति और पाशुपत योगपरमेश्वर की कृपा से क्या-क्या सुलभ होता है?परमेश्वर की कृपा से धर्म, ऐश्वर्य, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष सुलभ हो जाते हैं।#परमेश्वर कृपा#धर्म#ऐश्वर्य
योग बाधाएँयोग में श्रद्धा क्यों जरूरी है?योग के साधन, साध्य, गुरु, ज्ञान, आचार और शिव में श्रद्धा न होना अश्रद्धा है, जो योग में बाधा बनती है।#श्रद्धा#अश्रद्धा#गुरु
श्रीमद्भागवतभक्ति योग वाला ज्ञान क्या है?भगवान की प्रसन्नता के लिए किए गए कर्मों से जो ज्ञान मिलता है, वह भक्ति योग से संयुक्त ज्ञान बताया गया है।#भक्ति योग#ज्ञान#भगवान की प्रसन्नता
श्रीमद्भागवतभगवान की माया को कैसे समझें?नारदजी को संतों की कृपा से गुप्त ज्ञान मिला, जिससे वे भगवान की माया का प्रभाव समझ सके।#भगवान की माया#ज्ञान#नारद
श्रीमद्भागवतभक्ति के बिना ज्ञान अधूरा क्यों है?नारदजी कहते हैं कि मोक्ष देने वाला निर्मल ज्ञान भी यदि अच्युत भाव से रहित हो तो उसकी शोभा पूर्ण नहीं रहती।#भक्ति#ज्ञान#मोक्ष
शिष्य परम्पराशैवी दीक्षा क्या बताई गई है?शैवी दीक्षा का अलग विधि-वर्णन यहाँ नहीं है; योगाचार्यों के शिष्य शैवी दीक्षा से सम्पन्न बताए गए हैं।#शैवी दीक्षा#शिष्य#भस्म
शिष्य परम्परायोगाचार्यों के शिष्यों के गुण क्या थे?योगाचार्यों के शिष्य धर्मात्मा, महान् ओजस्वी, विमल आत्मा, सिद्ध, ब्रह्मनिष्ठ, ज्ञान-योग में निरत, भस्म-विभूषित और शैवी दीक्षा से सम्पन्न थे।#योगाचार्य शिष्य#धर्मात्मा#ब्रह्मनिष्ठ
माहेश्वर योगज्ञान से योग और योग से मुक्ति कैसे मिलती है?शंकर की अनुकम्पा से ज्ञान, ज्ञान से योग में प्रवृत्ति और योग से मुक्ति प्राप्त होती है।#ज्ञान#योग#मुक्ति
माहेश्वर योगशिव की कृपा से ज्ञान कैसे मिलता है?शिव की अनुकम्पा से ज्ञान उत्पन्न होता है; उसी ज्ञान से योग में प्रवृत्ति होती है।#शिव कृपा#ज्ञान#योग
माहेश्वर योगमाहेश्वर योग क्या है?माहेश्वर योग शिवकृपा से प्राप्त होने वाला ज्ञानस्वरूप दिव्य योग है, जिसमें ज्ञान से योग और योग से मुक्ति बताई गई है।#माहेश्वर योग#शिव कृपा#ज्ञान
शंकर महिमाधर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य कैसे मिलते हैं?धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य शिवजी की कृपा से प्राप्त होते हैं।#धर्म#ज्ञान#वैराग्य
शंकर महिमाकेवल विषय त्याग अस्थायी क्यों है?आत्मानात्मविवेक रूप विशिष्ट ज्ञान के बिना किया गया क्षणिक विषयत्याग ज्ञानरहित और अस्थायी बताया गया है।#विषय त्याग#आत्मानात्म विवेक#ज्ञान
श्रीमद्भागवतदत्तात्रेय अवतार ने किसे ज्ञान दिया?दत्तात्रेय अवतार में भगवान ने अलर्क और प्रह्लाद आदि को ज्ञान का उपदेश दिया।#दत्तात्रेय#अत्रि#अनसूया
श्रीमद्भागवतभगवान का अनुभव कैसे होता है?भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और प्रेममयी भक्ति से भगवान के तत्त्व का अनुभव होता है।#भगवान अनुभव#परमात्मा#भक्ति
श्रीमद्भागवतभक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतभागवत सुनने से ज्ञान वैराग्य भक्ति कैसे बढ़ते हैं?विधिपूर्वक सप्ताह श्रवण के अंत में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को बड़ी पुष्टि मिली और वे तरुण होकर सबको आकर्षित करने लगे।#ज्ञान#वैराग्य#भक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के वक्ता की पूजा क्यों करें?वक्ता को शुकस्वरूप मानकर पूजते हैं और उससे कथा के प्रकाश से अज्ञान नष्ट करने की प्रार्थना करते हैं।#वक्ता पूजा#भागवत कथा#शुक स्वरूप
श्रीमद्भागवतगोकर्ण और धुंधुकारी में क्या अंतर था?गोकर्ण पंडित और ज्ञानी थे, जबकि धुंधुकारी अत्यंत दुष्ट, आचारहीन, हिंसक और माता-पिता को पीड़ित करने वाला निकला।#गोकर्ण#धुंधुकारी#चरित्र
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह तप से बड़ा क्यों है?कहा गया है कि जो फल तप, योग और समाधि से भी नहीं मिलता, वह भागवत सप्ताह से सहज मिल जाता है।#भागवत सप्ताह#तप#योग
श्रीमद्भागवतभागवत से ज्ञान वैराग्य कैसे बढ़ता है?भागवत के शब्द सुनने से ज्ञान-वैराग्य को बल मिलता है और उसका कष्ट मिटता है।#भागवत#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतभागवत सुनने के फायदे?भागवत सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल मिलता है, कलियुग दोष मिटते हैं और शोक-दुख नष्ट होते हैं।#भागवत#श्रवण#ज्ञान
श्रीमद्भागवतगीता पाठ से वैराग्य क्यों नहीं जागा?नारदजी ने गीता-पाठ किया, पर ज्ञान-वैराग्य पूरी तरह न जागे; सनकादि ने भागवत-कथा को फलरूप सार बताया।#गीता पाठ#वैराग्य#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतवैराग्य कैसे लाएं?वैराग्य को बल देने वाला उपाय श्रीमद्भागवत का पारायण और भक्ति की स्थापना बताया गया है।#वैराग्य#ज्ञान#भक्ति
श्रीमद्भागवतज्ञान वैराग्य कैसे जगाएं?ज्ञान-वैराग्य को जगाने का सफल उपाय श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।#ज्ञान#वैराग्य#भागवत पारायण
श्रीमद्भागवतभक्ति ज्ञान और वैराग्य कैसे बढ़ते हैं?भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की समस्या उठती है और समाधान का मार्ग श्रीमद्भागवत, भक्ति और भगवान के आश्रय की ओर जाता है।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
लोकब्रह्मा जी को वेदों का ज्ञाता क्यों कहते हैं?क्योंकि उनके चार मुख चार वेदों से जुड़े हैं।#ब्रह्मा#वेद#ज्ञान
लोकब्रह्मा जी सृष्टि के लिए तैयार कैसे हुए?भगवान के ज्ञान से वे सृष्टि-रचना के योग्य बने।#ब्रह्मा#सृष्टि#ज्ञान
लोकतत्त्वजिज्ञासु किसे कहते हैं?जो परम सत्य को जानना चाहता है, वह तत्त्वजिज्ञासु है।#तत्त्वजिज्ञासु#ज्ञान#सत्य
लोकव्यतिरेक क्या होता है?व्यतिरेक अस्थायी चीजों को अलग कर सत्य पहचानने की विधि है।#व्यतिरेक#ज्ञान#चतुःश्लोकी
लोकचतुःश्लोकी भागवत क्या है?चतुःश्लोकी भागवत भागवत के चार मूल ज्ञान-श्लोक हैं।#चतुःश्लोकी भागवत#भागवत#ज्ञान
लोकब्रह्मा जी ने तपस्या क्यों की?उन्होंने स्रष्टा और सृष्टि-ज्ञान पाने के लिए तपस्या की।#ब्रह्मा#तपस्या#ज्ञान
लोकपरोक्ष और अपरोक्ष में क्या फर्क है?परोक्ष सुना सत्य है, अपरोक्ष अनुभव किया सत्य है।#परोक्ष#अपरोक्ष#ज्ञान
लोकप्रत्यक्ष और परोक्ष में क्या फर्क है?प्रत्यक्ष इंद्रियों से, परोक्ष इंद्रियों से परे स्रोत से मिलता है।#प्रत्यक्ष#परोक्ष#ज्ञान
लोकप्रत्यक्ष ज्ञान क्या होता है?जो इंद्रियों से सीधे मिले, वह प्रत्यक्ष ज्ञान है।#प्रत्यक्ष ज्ञान#ज्ञान#इंद्रिय
लोकभगवान को बाहर खोजने से क्यों नहीं मिलता?क्योंकि परमसत्य बाहरी वस्तु नहीं, अंतःअनुभव का विषय है।#भगवान#अंतर्यात्रा#ज्ञान