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श्रीलिङ्गमहापुराण से जुड़े सभी प्रश्न(578)

श्रीलिङ्गमहापुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 578 प्रश्न उपलब्ध हैं।

प्रलय

महाप्रलय में क्या होता है?

महाप्रलय में सम्पूर्ण सृष्टि का लय हो जाता है और शिव की आज्ञा से प्रलय का भी प्रलय होता है।

#महाप्रलय#सृष्टि लय#शिव आज्ञा
कल्प और मन्वन्तर

ब्रह्मा के तैंतीस कल्प कौन से हैं?

ब्रह्मा के तैंतीस कल्पों में भवोद्भव से सर्वरूपक तक अनेक नाम गिनाए गए हैं।

#तैंतीस कल्प#ब्रह्मा#कल्प नाम
देव काल

रुद्र का एक दिन कितना बताया गया है?

विष्णु के नौ हजार दिनों का समय कालात्मा रुद्र के एक दिन का समय कहा गया है।

#रुद्र#रुद्र का दिन#विष्णु का दिन
देव काल

विष्णु का एक दिन कितना बताया गया है?

ब्रह्मा के एक हजार युग विष्णु के एक दिन के बराबर बताए गए हैं।

#विष्णु#विष्णु का दिन#ब्रह्मा का युग
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का एक वर्ष कितना होता है?

हजार कल्पों का काल ब्रह्माजी का एक वर्ष बताया गया है।

#ब्रह्मा#ब्रह्म वर्ष#कल्प
कल्प और मन्वन्तर

एक मन्वन्तर कितने वर्षों का होता है?

मनुष्यवर्ष से तीस करोड़ सरसठ लाख बीस हजार वर्षों का काल मन्वन्तर के लिए बताया गया है।

#मन्वन्तर#मनुष्य वर्ष#तीस करोड़
विशेष काल गणना

ध्रुव वर्ष क्या होता है?

मनुष्यों के नौ हजार नब्बे वर्ष मिलाकर एक ध्रुव वर्ष बताया गया है।

#ध्रुव वर्ष#ध्रौव्य वर्ष#मनुष्य वर्ष
विशेष काल गणना

सप्तर्षियों का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन हजार तीस वर्ष सप्तर्षियों के एक वर्ष के बराबर माने गए हैं।

#सप्तर्षि#सप्तर्षि वर्ष#मनुष्य वर्ष
देव काल

देवताओं का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन सौ साठ वर्ष देवताओं के एक वर्ष के बराबर बताए गए हैं।

#देवता#देव वर्ष#मनुष्य वर्ष
देव काल

देवताओं का एक महीना कितना होता है?

मनुष्यों के तीस वर्ष का काल देवताओं के एक महीने के बराबर बताया गया है।

#देवता#देव मास#मनुष्य वर्ष
देव काल

दक्षिणायन देवताओं की रात क्यों कहा गया है?

सूर्य का दक्षिण की ओर संक्रमण देवताओं की रात्रि कहा गया है।

#दक्षिणायन#देवताओं की रात#सूर्य संक्रमण
देव काल

उत्तरायण देवताओं का दिन क्यों कहा गया है?

सूर्य का उत्तर की ओर संक्रमण देवताओं का दिवस कहा गया है।

#उत्तरायण#देवताओं का दिन#सूर्य संक्रमण
पितृ काल

पितरों का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन सौ साठ महीनों का समय पितरों का एक संवत्सर माना गया है।

#पितर#पितृ वर्ष#संवत्सर
पितृ काल

पितरों का एक महीना कितना होता है?

मनुष्यों के तीस महीने का समय पितरों के एक मास के बराबर माना गया है।

#पितर#पितृ मास#मनुष्य महीना
पितृ काल

पितरों का एक दिन कितना होता है?

मनुष्यों का एक कृष्णपक्ष पितरों के एक दिन के बराबर बताया गया है।

#पितर#कृष्णपक्ष#शुक्लपक्ष
सूक्ष्म काल गणना

मनुष्यों का दिन कितने मुहूर्त का होता है?

मनुष्यों का एक दिन पन्द्रह मुहूर्त का और एक रात भी पन्द्रह मुहूर्त की बताई गई है।

#मनुष्य दिन#मुहूर्त#रात
सूक्ष्म काल गणना

मुहूर्त क्या होता है?

तीस कलाओं को मिलाकर एक मुहूर्त कहा गया है।

#मुहूर्त#कला#काष्ठा
सूक्ष्म काल गणना

कला क्या होती है?

तीस काष्ठाओं से एक कला होती है।

#कला#काष्ठा#मुहूर्त
सूक्ष्म काल गणना

काष्ठा क्या होती है?

स्वस्थ मनुष्य के नेत्र के पन्द्रह निमेष के समय को एक काष्ठा कहा गया है।

#काष्ठा#निमेष#काल गणना
युग मान

युगों की संध्या और संध्यांश क्या होते हैं?

युगों के आरंभ-अंत से जुड़े सन्ध्या और सन्ध्यांश के वर्ष बताए गए हैं, जैसे सत्ययुग में चार सौ-चार सौ वर्ष।

#सन्ध्या#सन्ध्यांश#सत्ययुग
युग मान

चतुर्युगी कितने वर्षों की होती है?

सन्ध्या-सन्ध्यांश छोड़कर चारों युगों का काल छत्तीस लाख मानुषी वर्ष और सन्ध्यांश तीन लाख साठ हजार वर्ष बताया गया है।

#चतुर्युगी#चार युग#युग मान
युग मान

कलियुग कितने वर्ष का होता है?

कलियुग का नियत समय एक हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से तीन लाख साठ हजार वर्ष बताया गया है।

#कलियुग#युग मान#मानुष वर्ष
युग मान

द्वापरयुग कितने वर्ष का होता है?

द्वापरयुग का नियत समय दो हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से सात लाख बीस हजार वर्ष बताया गया है।

#द्वापरयुग#युग मान#मानुष वर्ष
युग मान

त्रेतायुग कितने वर्ष का होता है?

त्रेतायुग का नियत समय तीन हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से दस लाख अस्सी हजार वर्ष बताया गया है।

#त्रेतायुग#युग मान#मानुष वर्ष
युग मान

सत्ययुग कितने वर्ष का होता है?

सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षों का और मानुषी वर्ष से चौदह लाख चालीस हजार वर्षों का बताया गया है।

#सत्ययुग#कृतयुग#दिव्य वर्ष
कल्प और मन्वन्तर

एक कल्प में कितनी चतुर्युगी होती हैं?

एक हजार चतुर्युगों का काल एक कल्प कहा गया है।

#कल्प#चतुर्युगी#युग
कल्प और मन्वन्तर

एक कल्प में कितने मनु होते हैं?

एक हजार चतुर्युगी की अवधि में चौदह मनु उत्पन्न होते हैं।

#कल्प#मनु#चतुर्युगी
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन रात मनुष्यों जैसा क्यों नहीं है?

ब्रह्मा का अहोरात्र उत्पत्ति और प्रलय से जुड़ा है, मनुष्यों की तरह सूर्योदय-सूर्यास्त वाला नहीं।

#ब्रह्मा#अहोरात्र#सूर्योदय
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा रात में क्या करते हैं?

ब्रह्मा रात में प्रलय करते हैं और दिन की सृष्टि विलीन हो जाती है।

#ब्रह्मा#रात#प्रलय
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा दिन में क्या करते हैं?

ब्रह्मा दिन में सृष्टि करते हैं और वैकारिक सृष्टि सहित देवता, प्रजापति और महर्षि विद्यमान रहते हैं।

#ब्रह्मा#दिन#सृष्टि
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन क्या होता है?

ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।

#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
सृष्टि तत्त्व

प्राकृत सर्ग क्या है?

प्राकृत सर्ग पुरुषाधिष्ठित, ईश्वरकृत, अबुद्धिपूर्वक उत्पन्न और कल्याणकारी प्राथमिक सर्ग बताया गया है।

#प्राकृत सर्ग#प्राथमिक सर्ग#पुरुषाधिष्ठित
शिव तत्त्व

सदाशिव सर्वात्मक क्यों कहे गए हैं?

सदाशिव भव, विष्णु, ब्रह्मा आदि रूपों में स्थित होने और लोकों तथा पितामह के रूप में कहे जाने से सर्वात्मक बताए गए हैं।

#सदाशिव#सर्वात्मक#भव
शिव तत्त्व

महेश्वर रजोगुण सत्त्वगुण और तमोगुण से कैसे जुड़े हैं?

महेश्वर सृष्टि में रजोगुण, पालन में सत्त्वगुण और प्रलय में तमोगुण से जुड़े बताए गए हैं।

#महेश्वर#रजोगुण#सत्त्वगुण
शिव तत्त्व

महेश्वर सृष्टि पालन और संहार कैसे करते हैं?

महेश्वर तीन रूपों में होकर सृष्टि, पालन और संहार करते हैं।

#महेश्वर#सृष्टि#पालन
ब्रह्माण्ड वर्णन

करोड़ों ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

प्रधान प्रकृति सदाशिव के आश्रय से करोड़ों ब्रह्माण्डों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सृजन करती है।

#करोड़ों ब्रह्माण्ड#प्रधान#सदाशिव
ब्रह्माण्ड वर्णन

ब्रह्माण्ड के सात आवरण कौन से हैं?

अण्ड के सात प्राकृत आवरण जल, तेज, वायु, आकाश, तामस अहंकार, महत्तत्त्व और अव्यक्त प्रधान बताए गए हैं।

#ब्रह्माण्ड#सात आवरण#जल
ब्रह्माण्ड वर्णन

ब्रह्माण्ड अण्ड कैसे उत्पन्न होता है?

महत्तत्त्व से पंचमहाभूत तक सभी तत्त्व अण्ड की उत्पत्ति करते हैं।

#ब्रह्माण्ड#अण्ड#महत्तत्त्व
जीव और इन्द्रियाँ

मन को उभयात्मक क्यों कहा गया है?

मन को पाँच ज्ञानेन्द्रियों और पाँच कर्मेन्द्रियों के साथ जीव के लिए उभयात्मक बताया गया है।

#मन#उभयात्मक#ज्ञानेन्द्रियाँ
जीव और इन्द्रियाँ

पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ क्यों बनाई गईं?

शब्द, स्पर्श आदि को ग्रहण करने के लिए पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और मन बनाए गए।

#ज्ञानेन्द्रियाँ#कर्मेन्द्रियाँ#मन
सृष्टि तत्त्व

जल अग्नि वायु और आकाश में कितने गुण होते हैं?

जल चार गुणों से, अग्नि तीन गुणों से, वायु दो गुणों से और आकाश एक गुण से युक्त बताया गया है।

#जल#अग्नि#वायु
सृष्टि तत्त्व

पृथ्वी में पाँच गुण क्यों बताए गए हैं?

पृथ्वी शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध पाँचों गुणों से युक्त बताई गई है।

#पृथ्वी#पाँच गुण#शब्द
सृष्टि तत्त्व

वायु अग्नि जल और पृथ्वी कैसे उत्पन्न होते हैं?

आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।

#वायु#अग्नि#जल
सृष्टि तत्त्व

आकाश की उत्पत्ति कैसे होती है?

तामस अहंकार से शब्द तन्मात्रावाले अव्यय आकाश की उत्पत्ति बताई गई है।

#आकाश#शब्द तन्मात्रा#तामस अहंकार
सृष्टि तत्त्व

पंच तन्मात्रा कैसे उत्पन्न होती हैं?

अहंकार से शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं और उनसे भूतसर्ग आगे बढ़ता है।

#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
सृष्टि तत्त्व

तामस अहंकार क्या है?

तामस अहंकार तमोगुण की अधिकता वाला अहंकार है, जिससे भूतसर्ग का वर्णन किया गया है।

#तामस अहंकार#तमोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

राजस अहंकार क्या है?

राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।

#राजस अहंकार#रजोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

सात्त्विक अहंकार क्या है?

सात्त्विक अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न संकल्प-अध्यवसायवृत्तिरूप अहंकार है।

#सात्त्विक अहंकार#महत्तत्त्व#संकल्प
सृष्टि तत्त्व

अहंकार कितने प्रकार का बताया गया है?

अहंकार तीन प्रकार का बताया गया है: सात्त्विक, राजस और तामस।

#अहंकार#सात्त्विक अहंकार#राजस अहंकार
सृष्टि तत्त्व

महत्तत्त्व कैसे उत्पन्न होता है?

सृष्टि के समय तीन गुणों से युक्त अजरूप पुरुष की आज्ञा से अधिष्ठित माया से महत्तत्त्व उत्पन्न हुआ।

#महत्तत्त्व#माया#अजा
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