विस्तृत उत्तर
यह आहुति अग्नि को कव्यवाहन यानी पितरों तक हवि पहुँचाने वाले रूप में अर्पित की जाती है।
अग्नये कव्यवाहनाय स्वाहा का क्या महत्व है को संदर्भ सहित समझें
अग्नये कव्यवाहनाय स्वाहा का क्या महत्व है का सबसे सीधा सार यह है: अग्नि को पितृ हवि का वाहक मानना।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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संकर्षण की अग्नि का उद्गम कहाँ से होता है?
संकर्षण की अग्नि (कालानल) का उद्गम पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग (संकर्षण/अनन्त देव) के मुख से होता है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।
संकर्षण की अग्नि क्या है?
संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।
वायव्यास्त्र आग्नेयास्त्र को कैसे प्रभावित करता था?
वायव्यास्त्र आग्नेयास्त्र की अग्नि को और भी भयंकर और विनाशकारी बना देता था। वायु और अग्नि के संयोजन से शत्रु के लिए यह अत्यंत घातक बन जाता था।
तंत्र में मणिपूर चक्र को कैसे जागृत करें?
तीसरा — 10 दल, पीला, अग्नि, बीज 'रं'। 'ॐ रं जाग्रनय ह्रीं मणिपुर रं ॐ फट'। कपालभाति/नौली। लक्षण: 'आत्मविश्वास, बुद्धि, सही निर्णय।' अग्नि=तीव्र। गुरु।
तंत्र में अग्नि स्थापना कैसे करें?
कुंड (चतुष्कोण) → शुभ समिधा (आम/पीपल/बिल्व) → अग्नि प्रज्वलन (काष्ठ/दीपक) → 'ॐ अग्नये नमः' → घी+समिधा+मंत्र = प्रथम आहुति। ऋग्वेद: 'अग्नि=देवताओं का मुख।' विद्वान से सीखें।
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