विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस के बालकाण्ड में शिवजी ने पार्वतीजी को भगवान के अवतार लेने के अनेक कारण बताये:
मुख्य कारण:
- 1धर्म की रक्षा — 'जब जब होइ धरम कै हानी' — जब धर्म का ह्रास हो
- 2सज्जनों की पीड़ा हरना — 'हरहिं कृपानिधि सजन पीरा'
- 3असुरों का वध — 'असुर मारि थापहिं सुरन्ह' — असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करना
- 4वेदमार्ग की रक्षा — 'राखहिं निज श्रुति सेतु' — अपने वेदरूपी सेतु (मार्ग) की रक्षा करना
- 5यश फैलाना — 'जग बिस्तारहिं बिसद जसु' — जगत में अपना निर्मल यश फैलाना
परन्तु शिवजी ने यह भी कहा — 'हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥' — हरि के अवतार का कारण 'बस यही है' ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। अनेकों कारण हो सकते हैं और ऐसे भी हो सकते हैं जिन्हें कोई जान ही नहीं सकता।
साथ ही भक्तों के प्रेम को भी कारण बताया — 'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया।





