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विस्तृत उत्तर
जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक को अकृतक लोक कहा गया है। अकृतक का अर्थ है वे लोक जो प्रलय की अग्नि से सर्वथा अछूते, शाश्वत और अविनाशी रहते हैं। ब्रह्मा की रात्रिकालीन प्रलय में नीचे के लोक जलते और जलमग्न होते हैं, पर जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक सुरक्षित रहते हैं।
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