विस्तृत उत्तर
कुलदेवी या कुलदेवता उस परिवार के मुख्य रक्षक होते हैं। यदि वे रुष्ट हों, तो अन्य देवी-देवताओं की गई पूजा भी पूर्ण रूप से फलित नहीं होती। आधुनिक युग में कई परिवार अपनी कुलदेवी का नाम या उनका विशिष्ट मंत्र भूल चुके हैं।
ऐसी स्थिति में कुलदेवी को प्रसन्न करने के लिए एक सार्वभौमिक और गुप्त मंत्र है: 'ॐ कुलदेव्यै नमः, सर्व विघ्न विनाशिन्यै नमः।' यदि परिवार की कुलदेवी ज्ञात न हों, तो माता दुर्गा के नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' को ही कुलदेवी का स्वरूप मानकर जपना चाहिए। नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को परिवार सहित लाल चुनरी, नारियल और सिंदूर अर्पित कर इस मंत्र का जप करने से कुलदेवी पुनः जाग्रत होकर परिवार के सभी संकटों को हर लेती हैं।





