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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध का अन्न पितर की वर्तमान योनि के अनुसार रूपांतरित होता है। यदि कोई पूर्वज पशु योनि में है, तो वह अर्पित अन्न उसके लिए तृण यानी घास के रूप में परिणत होकर पहुँचता है। यह सिद्धांत बताता है कि श्राद्ध केवल पितृलोक में स्थित आत्माओं तक ही नहीं, बल्कि कर्मानुसार अन्य योनियों में स्थित पूर्वजों तक भी पहुँच सकता है।
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