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विस्तृत उत्तर
८४-अंश सिद्धान्त के अनुसार पूर्वजों से प्राप्त ५६ अंशों में प्रथम और सबसे बड़ा हिस्सा पिता से आता है। पिता से २१ अंश माने गए हैं। पिता यजमान के भौतिक शरीर का सबसे निकटतम कारण है और पितृ वर्गीकरण में पिता को वसु स्वरूप माना गया है। चूँकि पिता से प्राप्त अंश सबसे अधिक हैं, इसलिए उनके प्रति पितृ-ऋण भी अत्यंत प्रबल माना गया है और श्राद्ध में पिता को प्रथम पिण्ड वसु स्वरूप देकर तर्पित किया जाता है।
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