विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में प्रतापभानु के मन्त्री का नाम 'धर्मरुचि' बताया गया है और भाई का 'अरिमर्दन'। ब्राह्मणों के शाप से प्रतापभानु का पूरा परिवार राक्षस कुल में उत्पन्न हुआ।
मानस के अनुसार प्रतापभानु = रावण, और उसके भाई तथा परिजन भी राक्षस बने। प्रतापभानु का भाई कुम्भकर्ण बना जो अत्यन्त बलवान् था।
बालकाण्ड में कुम्भकर्ण का वर्णन — 'अतिबल कुम्भकरन अस भ्राता। जेहि सम नहिं कोऊ बलवंता' — अत्यन्त बलवान् कुम्भकर्ण-सा उसका भाई था, जिसके जोड़का योद्धा जगतमें पैदा ही नहीं हुआ।
विभीषण भी उन्हीं का भाई था, पर उसने ब्रह्माजी से भगवान के चरणकमलों में निर्मल अनुराग माँगा — 'तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु' — इसलिये वह धर्मात्मा बना।





