विस्तृत उत्तर
शिवजी की बारात अत्यन्त विचित्र और भयानक थी। हिमवान की नगरी के लोगों ने ऐसी बारात कभी नहीं देखी थी।
जब बारात नगर के निकट आई तो लोग अगवानी (स्वागत) के लिये गये। देवताओं का समाज देखकर सब प्रसन्न हुए, पर जब शिवजी के दल को देखा तो हाहाकार मच गया।
नगर के लड़कों ने घर आकर माता-पिता को बताया — 'कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता। बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा॥'
अर्थ — क्या कहें, कोई बात कही नहीं जाती। यह बारात है या यमराजकी सेना? दूल्हा पागल है और बैलपर सवार है। साँप, कपाल और राख ही उसके गहने हैं।
छन्द में और विस्तार — 'जो जिअत रहिहि बारात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही। देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही॥'
अर्थ — जो बारातको देखकर जीता बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही पार्वतीका विवाह देखेगा। लड़कोंने घर-घर यही बात कही।




