विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी और चारों भाइयों का नामकरण गुरु वसिष्ठजी ने किया।
बालकाण्ड में कहा — कुछ समय बीतने पर चारों भाई बड़े हुए और गुरुजीने जाकर चूड़ाकर्म-संस्कार किया। ब्राह्मणोंने बहुत-सी दक्षिणा पायी। चारों सुन्दर राजकुमार बड़े ही मनोहर अपार चरित्र करते फिरते हैं।
वसिष्ठजी ने चारों पुत्रों के नाम उनके गुणों और अर्थ के अनुसार रखे — राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न।





