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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात का स्वरूप कैसा था — क्या विचित्रता थी?

बारात अत्यन्त विचित्र और भयानक — लड़कों ने कहा 'यह बारात है या यमराज की सेना? दूल्हा पागल है, बैल पर सवार, साँप-कपाल-राख के गहने।' जो बारात देखकर जीवित बचे उसके बड़े पुण्य। देवताओं का दल सुन्दर पर शिवजी का दल भयानक।

बालकाण्डशिव बारातविचित्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात में कौन-कौन शामिल थे?

शिवजी की बारात में भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ, राक्षस, विचित्र गण शामिल थे। दूल्हे के शरीर पर राख, साँप-कपाल के गहने, नग्न, जटाधारी। देवताओं का दल सुन्दर था पर शिवजी का दल देखकर सबके वाहन डरकर भागे।

बालकाण्डशिव बारातभूत-प्रेत
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी के विवाह का प्रस्ताव देवताओं ने किससे रखा?

देवताओं ने ब्रह्माजी से विनती की, ब्रह्माजी ने शिवजी से प्रार्थना की। शिवजी ने प्रभु रामजी के वचन याद कर प्रसन्नतापूर्वक कहा — 'ऐसेइ होउ' (ऐसा ही हो)। देवताओं ने नगाड़े बजाये और पुष्पवर्षा की।

बालकाण्डशिव विवाह प्रस्तावब्रह्मा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदहन के बाद जगत में क्या प्रभाव पड़ा?

चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।

बालकाण्डकामदहन प्रभावदेवता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव भस्म होने के बाद किस नाम से जाने गये?

कामदेव 'अनंग' (बिना शरीर/अंग के) नाम से जाने गये। शिवजी ने कहा — 'होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि' — बिना शरीर के ही सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहेंगे।

बालकाण्डअनंगकामदेव
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रति को शिवजी ने क्या वरदान दिया?

शिवजी ने वरदान दिया — (1) कामदेव का नाम 'अनंग' (बिना शरीर) होगा, (2) बिना शरीर के ही सबके हृदय में व्यापेगा, (3) श्रीकृष्ण अवतार में प्रद्युम्न रूप में जन्म लेगा — तब रति को पति वापस मिलेगा।

बालकाण्डरति वरदानअनंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति ने क्या किया?

रति पति की दशा सुनकर मूर्छित हो गयीं। फिर रोती-चिल्लाती शिवजी के पास गयीं और अत्यन्त प्रेम से विनती की। आशुतोष कृपालु शिवजी ने अबला को देखकर सान्त्वना दी।

बालकाण्डरतिकामदेव भस्म
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने कामदेव को कैसे भस्म किया?

कामदेव ने आम के पेड़ से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े, समाधि टूटी। शिवजी ने तीसरा नेत्र खोला — 'तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥' — देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया। तीनों लोक काँप उठे।

बालकाण्डकामदहनतीसरा नेत्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य — विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गयी। कामदेव के प्रभाव से सृष्टि का सारा विवेक और संयम नष्ट हो गया। केवल शिवजी अप्रभावित रहे।

बालकाण्डकामदेवविवेक सेना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव के बाण चलाने पर क्या-क्या प्रभाव पड़ा — सारी सृष्टि पर?

सारी सृष्टि काम-वश हो गयी — ब्रह्मचर्य, धीरज, ज्ञान, सदाचार, योग, वैराग्य सब भागे। स्त्री-पुरुष सब मर्यादा छोड़ बैठे। लताएँ वृक्षों पर झुकीं, नदियाँ समुद्र की ओर दौड़ीं। केवल शिवजी की समाधि अचल रही।

बालकाण्डकामदेव प्रभावसृष्टि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये क्या किया?

कामदेव ने — (1) वसन्त ऋतु प्रकट की, (2) सारी सृष्टि को काम-वश किया, (3) करोड़ों उपाय किये पर शिवजी की समाधि न डिगी, (4) अन्त में आम के पेड़ पर चढ़कर पुष्प-धनुष से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े।

बालकाण्डकामदेववसन्त
रामचरितमानस — बालकाण्ड

देवताओं ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये किसे भेजा?

देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने पहले कहा कि शिवजी से विरोध में मेरी कुशल नहीं, पर परोपकार धर्म मानकर काम स्वीकार किया — 'श्रुति कह परम धरम उपकारा' — वेद कहते हैं उपकार परम धर्म है।

बालकाण्डकामदेवशिव तपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?

सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।

बालकाण्डसप्तर्षि आशीर्वादपार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने सप्तर्षियों की शिवनिन्दा सुनकर क्या उत्तर दिया?

पार्वतीजी ने कहा — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्मों तक या तो शिवजी को वरूँगी या कुमारी रहूँगी। स्वयं शिवजी मना करें तब भी नारदजी का उपदेश नहीं छोडूँगी। ऋषि प्रसन्न हुए — 'जय जगदम्बिके भवानी!'

बालकाण्डपार्वती दृढ़ संकल्पसप्तर्षि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने शिवजी के बारे में क्या-क्या बुराइयाँ बताईं?

शिवजी को बताया — (1) अवगुणों का भवन, (2) निर्गुण, निलज, (3) कुबेष (भस्म-साँप-खोपड़ी), (4) अकुल (कुलहीन), (5) अगेह (बेघर/श्मशानवासी), (6) दिगम्बर (नग्न), (7) उदासीन। ये सब परीक्षा के लिये कहा — पार्वतीजी का संकल्प जाँचने हेतु।

बालकाण्डसप्तर्षिशिव दोष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने पार्वतीजी से क्या कहकर उनकी परीक्षा ली?

सप्तर्षियों ने शिवजी को अवगुणों का भवन, निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, दिगम्बर बताया। नारदजी के उपदेश की भी आलोचना की — कि जिसने सुना उसका घर बर्बाद हुआ। यह सब पार्वतीजी का संकल्प डिगाने के लिये था।

बालकाण्डसप्तर्षिपरीक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

देवताओं ने पार्वतीजी की परीक्षा के लिये किन्हें भेजा?

सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा। ऋषियों ने पार्वतीजी को देखा — 'मूरतिमंत तपस्या जैसी' — मानो मूर्तिमान तपस्या ही हो। उन्होंने प्रश्न पूछे और शिवजी की निन्दा करके पार्वतीजी का संकल्प डिगाने का प्रयास किया।

बालकाण्डसप्तर्षिपार्वती परीक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी की तपस्या से तीनों लोकों में क्या प्रभाव पड़ा?

पार्वतीजी का शरीर तप से क्षीण हो गया, तब आकाश से ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — अब शिवजी मिलेंगे। ब्रह्माजी ने कहा कि ऐसा कठोर तप किसी ने नहीं किया। सप्तर्षि जब मिलें तब इस वाणी को प्रमाण जानना।

बालकाण्डपार्वती तप प्रभावब्रह्मवाणी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?

'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'

बालकाण्डअपर्णापार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी की तपस्या कितनी कठोर थी — क्या-क्या त्यागा?

क्रमशः — (1) 1000 वर्ष कन्दमूल-फल, (2) 100 वर्ष केवल साग, (3) कुछ दिन जल-वायु फिर उपवास, (4) 3000 वर्ष केवल सूखे बेलपत्र, (5) पत्ते भी छोड़े — तब 'अपर्णा' नाम पड़ा। शरीर क्षीण हुआ तब ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — शिवजी मिलेंगे।

बालकाण्डपार्वती तपस्याकठोर तप
रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने अपनी तपस्या कहाँ की?

पार्वतीजी ने वन (बिपिन) में जाकर तपस्या की। 'उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना॥' — शिवजी के चरणों को हृदय में धारण करके वन में तप करने लगीं। सुकुमार शरीर होने पर भी सब भोग त्याग दिये।

बालकाण्डपार्वती तपस्यावन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?

अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।

बालकाण्डचौपाई अर्थतपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने पार्वतीजी को शिवजी प्राप्ति के लिये क्या उपाय बताया?

नारदजी ने कहा — 'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू॥' — ऐसी तपस्या करो जिससे शिवजी मिलें, दूसरा कोई उपाय काम नहीं करेगा। शिवजी दुराराध्य हैं पर आशुतोष भी हैं।

बालकाण्डनारद उपायतपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?

नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।

बालकाण्डनारदभविष्यवाणी

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